{"_id":"62c4898ee0207f736b34360b","slug":"education-kathua-news-kathua-news-jmu263363692","type":"story","status":"publish","title_hn":"तलाश पूरी, पढ़ाई छोड़ चुके 4657 बच्चे फिर लौटेंगे स्कूल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तलाश पूरी, पढ़ाई छोड़ चुके 4657 बच्चे फिर लौटेंगे स्कूल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कठुआ। जिले में स्कूल छोड़ चुके बच्चों की तलाश के लिए व्यापक स्तर पर चलाया गया अभियान पूरा हो चुका है। इसमें चिह्नित 4657 बच्चों को फिर से स्कूल तक पहुंचाने और शिक्षा की अलख जगाने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रयास तेज कर दिए हैं। कोरोना के चलते दो साल में डेढ़ हजार ऐसे बच्चे अधिक पाए गए हैं, जिन्होंने किन्हीं कारणों से स्कूल छोड़ दिया। जिले के 1368 सर्वेक्षकों ने 517 योजनाकर्ताओं के साथ जोनल नोडल अधिकारियों और जिला नोडल अधिकारी की देखरेख में इस अभियान को अंजाम दिया।
एप के जरिए डोर-टू-डोर चले इस अभियान में जिले के डेढ़ लाख से अधिक बच्चों की जानकारी जुटाई गई। इनमें से 4657 बच्चों को आउट ऑफ स्कूल पाया गया है। शिक्षा विभाग के अनुसार इनमें से कुछ बच्चे स्कूल छोड़ चके हैं तो कुछ ऐसे हैं जिनका कभी स्कूलों में दाखिला हुआ ही नहीं है। शिक्षा विभाग की समग्र योजना के तहत इनका दाखिला नजदीकी स्कूलों में करवाए जाने की योजना है।
------
टेस्ट या स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट के अुनसार मिलेगा दाखिला
जिन बच्चों के पास पूर्व में किसी कक्षा का स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट होगा, उन्हें अगली कक्षा में दाखिला मिल जाएगा। बताया कि कभी भी स्कूल न गए बच्चों के लिए तीन महीने के अक्षरज्ञान के बाद एक जांच प्रक्रिया रखी जाएगी और फिर उन्हें उसी अनुसार कक्षा में दाखिला दिया जाएगा। यह दाखिला पांचवीं कक्षा तक रहेगा। मुख्य शिक्षा अधिकारी ने बताया कोरोना के चलते श्रमिक आबादी का अपने गांव को लौटना और अब वापस आना संभवत आंकड़ों के बढ़ने की वजह है।
विज्ञापन
---
तलाश सर्वे के दौरान सामने आए आंकड़ेे काफी ज्यादा हैं। इन सभी बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। 2019 में हुए सर्वे में जिले में सामने आए इस वर्ग के बच्चों से इस साल का आंकड़ा लगभग डेढ़ हजार अधिक है। तलाश में पाए गए बच्चे दो वर्ग के हैं, इनमें कुछ वे बच्चे हैं जो किन्हीं कारणों से स्कूल शिक्षा को छोड़ चुके हैं। जबकि दूसरा वर्ग नेवर इनरोल का है, जिनका दाखिला कभी स्कूलों में हुआ ही नहीं। ये बच्चे शिक्षा से वंचित हैं।
प्रकाश लाल थापा, मुख्य शिक्षा अधिकारी
शिक्षा जोन - आउटऑफ स्कूल बच्चे
भड्डू 463
बनी 691
बिलावर 352
बसोहली 443
महानपुर 235
मल्हार 981
सल्लन 148
हीरानगर 88
बरनोटी 379
कठुआ 325
लखनपुर 365
मढ़ीन 187
कुल 4657
विज्ञापन
एप के जरिए डोर-टू-डोर चले इस अभियान में जिले के डेढ़ लाख से अधिक बच्चों की जानकारी जुटाई गई। इनमें से 4657 बच्चों को आउट ऑफ स्कूल पाया गया है। शिक्षा विभाग के अनुसार इनमें से कुछ बच्चे स्कूल छोड़ चके हैं तो कुछ ऐसे हैं जिनका कभी स्कूलों में दाखिला हुआ ही नहीं है। शिक्षा विभाग की समग्र योजना के तहत इनका दाखिला नजदीकी स्कूलों में करवाए जाने की योजना है।
विज्ञापन
------
टेस्ट या स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट के अुनसार मिलेगा दाखिला
जिन बच्चों के पास पूर्व में किसी कक्षा का स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट होगा, उन्हें अगली कक्षा में दाखिला मिल जाएगा। बताया कि कभी भी स्कूल न गए बच्चों के लिए तीन महीने के अक्षरज्ञान के बाद एक जांच प्रक्रिया रखी जाएगी और फिर उन्हें उसी अनुसार कक्षा में दाखिला दिया जाएगा। यह दाखिला पांचवीं कक्षा तक रहेगा। मुख्य शिक्षा अधिकारी ने बताया कोरोना के चलते श्रमिक आबादी का अपने गांव को लौटना और अब वापस आना संभवत आंकड़ों के बढ़ने की वजह है।
विज्ञापन
---
तलाश सर्वे के दौरान सामने आए आंकड़ेे काफी ज्यादा हैं। इन सभी बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। 2019 में हुए सर्वे में जिले में सामने आए इस वर्ग के बच्चों से इस साल का आंकड़ा लगभग डेढ़ हजार अधिक है। तलाश में पाए गए बच्चे दो वर्ग के हैं, इनमें कुछ वे बच्चे हैं जो किन्हीं कारणों से स्कूल शिक्षा को छोड़ चुके हैं। जबकि दूसरा वर्ग नेवर इनरोल का है, जिनका दाखिला कभी स्कूलों में हुआ ही नहीं। ये बच्चे शिक्षा से वंचित हैं।
प्रकाश लाल थापा, मुख्य शिक्षा अधिकारी
शिक्षा जोन - आउटऑफ स्कूल बच्चे
भड्डू 463
बनी 691
बिलावर 352
बसोहली 443
महानपुर 235
मल्हार 981
सल्लन 148
हीरानगर 88
बरनोटी 379
कठुआ 325
लखनपुर 365
मढ़ीन 187
कुल 4657