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देश व्यापी हड़ताल के दौरान निर्माण मजदूरों ने सरकार के खिलाफ जताया रोष
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कठुआ। निर्माण मजदूरों के हक़ में बने भवन तथा अन्य विनिर्माण श्रमिक अधिनियम 1996 को सरकार पूरी तरह से खत्म कर इन्हे लेबर कोड में शामिल किए जाने के विरोध में भवन निर्माण कामगार यूनियन की कठुआ इकाई ने कड़ा विरोध जताया है। वीरवार को यूनियन के बैनर तले सैकड़ों मजदूरों ने जिला श्रम कार्यालय के समक्ष अपने हक के लिए आवाज बुलंद करते हुए चेतावनी दी कि अगर सरकार ने मजदूरों की मांगों को पूर्ण न किया तो आंदोलन तेज होगा।
प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे यूनियन के जिला महासचिव राज कुमार ने कहा कि पूरे देश में निर्माण कार्य से जुड़े मजदूर वर्ग को उनका हक दिलाने के लिए भवन तथा अन्य विनिर्माण श्रमिक बोर्ड 1996 में बना था। क्योंकि इससे पहले जो निर्माण मजदूर बड़े-बड़े दलों में काम करता है, कंस्ट्रक्शन के अंदर जो काम करता है, उसकी कोई भी सोशल सिक्योरिटी नहीं थी। उक्त कानून कुछ संशोधनों के साथ वर्ष 2010 में जम्मू कश्मीर में लागू हुआ और इसे लागू करवाने के लिए भी मजदूरों को बहुत बड़ी जद्दोजहद करनी पड़ी थी। उसके बाद तब से यह कानून आधा अधूरा ही चल रहा है। एक्ट के मुताबिक इसके अंदर जो प्रावधान हैं वह अब तक मजदूरों को मजदूर कल्याण बोर्ड वह दे रहा था। इसके तहत स्वास्थ्य सुविधा, एजुकेशन के अलावा मजदूरों को कई कल्याणकारी सुविधाएं मिल रहे थे। इसके बाद 2016 में बच्चों को दी जाने वाली मदद भी बंद कर दी है। सरकार द्वारा मजदूरों के बोर्ड को कमजोर कर इन्हें लेबर कोड में शामिल किया है और वहां बड़ी चालाकी से मजदूरों के अधिकारों को गोलमोल कर दिया गया है। सरकार की मंशा इसे कमजोर कर सरकार निर्माण मजदूर की सुरक्षा को छीनना है। ऐसे में अब मजदूरों के पास हड़ताल के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
उन्होंने कहा कि लगातार मजदूरों के हकों के साथ हो रहे खिलवाड़ के खिलाफ यूनियन गांव-गांव में जाकर के मजदूरों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करेगी। अगर जरूरत पड़ी जो मजदूरों के हक के लिए इस आंदोलन को वह आगे तक ले जाएंगे। जब तक देश सरकार अपने मनमाने ढंग अपने तानाशाही रवैए को वापस नहीं लेती।
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इस मौके पर यूनियन केे जिला प्रधान अजीत कुमार, संपूर्ण सिंह, गरीब दास, सोम लाल, कुलदीप कुमार, बिशनदास, मंगलदास, तिलक राज आदि भी उपस्थित रहे।
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प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे यूनियन के जिला महासचिव राज कुमार ने कहा कि पूरे देश में निर्माण कार्य से जुड़े मजदूर वर्ग को उनका हक दिलाने के लिए भवन तथा अन्य विनिर्माण श्रमिक बोर्ड 1996 में बना था। क्योंकि इससे पहले जो निर्माण मजदूर बड़े-बड़े दलों में काम करता है, कंस्ट्रक्शन के अंदर जो काम करता है, उसकी कोई भी सोशल सिक्योरिटी नहीं थी। उक्त कानून कुछ संशोधनों के साथ वर्ष 2010 में जम्मू कश्मीर में लागू हुआ और इसे लागू करवाने के लिए भी मजदूरों को बहुत बड़ी जद्दोजहद करनी पड़ी थी। उसके बाद तब से यह कानून आधा अधूरा ही चल रहा है। एक्ट के मुताबिक इसके अंदर जो प्रावधान हैं वह अब तक मजदूरों को मजदूर कल्याण बोर्ड वह दे रहा था। इसके तहत स्वास्थ्य सुविधा, एजुकेशन के अलावा मजदूरों को कई कल्याणकारी सुविधाएं मिल रहे थे। इसके बाद 2016 में बच्चों को दी जाने वाली मदद भी बंद कर दी है। सरकार द्वारा मजदूरों के बोर्ड को कमजोर कर इन्हें लेबर कोड में शामिल किया है और वहां बड़ी चालाकी से मजदूरों के अधिकारों को गोलमोल कर दिया गया है। सरकार की मंशा इसे कमजोर कर सरकार निर्माण मजदूर की सुरक्षा को छीनना है। ऐसे में अब मजदूरों के पास हड़ताल के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
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उन्होंने कहा कि लगातार मजदूरों के हकों के साथ हो रहे खिलवाड़ के खिलाफ यूनियन गांव-गांव में जाकर के मजदूरों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करेगी। अगर जरूरत पड़ी जो मजदूरों के हक के लिए इस आंदोलन को वह आगे तक ले जाएंगे। जब तक देश सरकार अपने मनमाने ढंग अपने तानाशाही रवैए को वापस नहीं लेती।
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इस मौके पर यूनियन केे जिला प्रधान अजीत कुमार, संपूर्ण सिंह, गरीब दास, सोम लाल, कुलदीप कुमार, बिशनदास, मंगलदास, तिलक राज आदि भी उपस्थित रहे।