{"_id":"618583941ae06449fb1ea8b0","slug":"dengu-kathua-news-jmu2472476175","type":"story","status":"publish","title_hn":"शहर भर में डेंगू की दस्तक, स्प्रे प्रभावित क्षेत्रों तक सीमित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शहर भर में डेंगू की दस्तक, स्प्रे प्रभावित क्षेत्रों तक सीमित
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कठुआ। जिले में डेंगू के अबतक के सबसे अधिक मामले सामने आए हैं। ऐसा पहली बार हुआ है कि कठुआ जिले में सरकारी रिकार्ड में भी डेंगू के पॉजीटिव पाए गए मरीजों का आंकड़ा 200 पार कर गया है। शुक्रवार को 12 नए मामले सामने आए हैं जिसके बाद आंकड़ा बढ़कर 207 हो गया है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार प्रभावित इलाकों में एंटी लारवा स्प्रे कर रही हैं, लेकिन हालात यह हैं कि इस बार स्प्रे भी बेअसर साबित हो रहा है।
डेंगू ने कठुआ शहर के लगभग हर कोने में दस्तक दे दी है। लेकिन इस बार केवल प्रभावित इलाकों तक ही स्प्रे और फॉगिंग सीमित रही है। निचले इलाकों में बारिश के थमने के साथ ही मच्छरों को पनपने से रोकने के लिए एंटी लारवा स्प्रे किया जाता रहा है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं किया गया। नतीजा यह निकला कि संभाग के सबसे अधिक प्रभावित जिलों में से एक कठुआ जिला है, जहां डेंगू पीड़ितों का सरकारी आंकड़ा ही दो सौ के पार हो गया है।
गोविंदसर गांव सबसे अधिक प्रभावित
जिले में इस बार डेंगू का प्रकोप रेलवे स्टेशन से सटे गोविंदसर से शुरू हुआ था। सितंबर माह में ही रेलवे कॉलोनी में डेंगू के आधा दर्जन मरीजों की पुष्टि के साथ ही एक महिला की मौत भी दर्ज की जा चुकी थी। हैरत की बात यह थी कि सितंबर माह के अंत तक स्वास्थ्य विभाग को जिले में डेंगू की दस्तक का अंदाजा भी नहीं था। अमर उजाला की ओर से मामले प्रकाश में लाए जाने के बाद आनन फानन में स्वास्थ्य विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और स्प्रे शुरू किया। लेकिन देरी से शुरू हुए अभियान के चलते डेंगू ने पहले ही कई इलाकों को प्रभावित करना शुरू कर दिया था। इसके बाद जिले में सबसे अधिक मामले प्रभावित इलाके से सटे गोविंदसर गांव से आना शुरू हुए।
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एक महिला की इसी गांव में पॉजीटिव पाए जाने के बाद मौत
स्थिति यह है कि गांव में तीन तीन बार एंटी लारवा स्प्रे, फॉगिंग के साथ साथ संभाग स्तरीय टीम और डीसी कठुआ के दौरे के बाद भी लगातार मामले सामने आए ही जा रहे हैं। हाल ही में डेंगू से पंजाब की एक महिला की इसी गांव में पॉजीटिव पाए जाने के बाद मौत भी हुई। जबकि अनाधिकारिक तौर पर गोविंदसर में पांच सौ से ज्यादा लोग इस बार डेंगू के पीड़ित हुए हैं। आधिकारिक तौर पर भी गोविंदसर गांव में आंकड़ा सौ के पार है।
चौबीस घंटे का दावा, रिपोर्ट मिल रही तीन-चार दिन बाद
कठुआ। जिले में डेंगू के लगातार सामने आ रहे मामलों के बीच स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आती रही है। जीएमसी कठुआ में उपचार के लिए ड्रिप सेट से लेकर पैरासीटामोल और इंजेक्शन तक उपलब्ध नहीं होने का मरीज और तीमारदार आरोप लगाते रहे हैं, तो वहीं डेंगू वार्ड पिछले कई दिनों तक बंद ही पाया गया है। जनसेवा संस्थान गोविंदसर के अध्यक्ष शशि शर्मा ने कहा कि गरीब लोगों के लिए कोई रास्ता नहीं है। समृद्ध लोग यहां उपचार से बेहतर समझ रहे हैं कि वह मरीजों को पंजाब ले जाएं। उन्होंने कहा कि मामला जिला उपायुक्त से लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी के संज्ञान में भी लाया गया है। लेकिन कोई भी हल नजर नहीं आ रहा है। उपराज्यपाल से मांग की गई है कि संज्ञान लिया जाए और लापरवाही बरतने वालों पर फौरी कार्रवाई की जाए।
उधर, हालात ऐसे हैं कि स्वास्थ्य विभाग निजी लैब में डेंगू की जांच रिपोर्ट को वैध नहीं मानता है और न ही इनके आंकड़ों को शामिल करता है। ऐसे में सवाल यह भी है कि आखिर ऐसी जांच क्यूं होने दी जा रही है। मरीजों से आठ सौ रुपये से 18 सौ रुपये तक वसूले जा रहे हैं, लेकिन रिपोर्ट ही वैध नहीं है। जीएमसी कठुआ में जांच रिपोर्ट आने को लेकर चौबीस घंटे का दावा प्रदेश स्तर के अधिकारी करते रहे हैं। लेकिन असलियत यह है कि डेंगू के प्रकोप के बीच एक सप्ताह के लगभग जांच जहां ठप रही है, वहीं अब भी जांच रिपोर्ट तीन से चार दिन में हासिल होती है।
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डेंगू ने कठुआ शहर के लगभग हर कोने में दस्तक दे दी है। लेकिन इस बार केवल प्रभावित इलाकों तक ही स्प्रे और फॉगिंग सीमित रही है। निचले इलाकों में बारिश के थमने के साथ ही मच्छरों को पनपने से रोकने के लिए एंटी लारवा स्प्रे किया जाता रहा है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं किया गया। नतीजा यह निकला कि संभाग के सबसे अधिक प्रभावित जिलों में से एक कठुआ जिला है, जहां डेंगू पीड़ितों का सरकारी आंकड़ा ही दो सौ के पार हो गया है।
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गोविंदसर गांव सबसे अधिक प्रभावित
जिले में इस बार डेंगू का प्रकोप रेलवे स्टेशन से सटे गोविंदसर से शुरू हुआ था। सितंबर माह में ही रेलवे कॉलोनी में डेंगू के आधा दर्जन मरीजों की पुष्टि के साथ ही एक महिला की मौत भी दर्ज की जा चुकी थी। हैरत की बात यह थी कि सितंबर माह के अंत तक स्वास्थ्य विभाग को जिले में डेंगू की दस्तक का अंदाजा भी नहीं था। अमर उजाला की ओर से मामले प्रकाश में लाए जाने के बाद आनन फानन में स्वास्थ्य विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और स्प्रे शुरू किया। लेकिन देरी से शुरू हुए अभियान के चलते डेंगू ने पहले ही कई इलाकों को प्रभावित करना शुरू कर दिया था। इसके बाद जिले में सबसे अधिक मामले प्रभावित इलाके से सटे गोविंदसर गांव से आना शुरू हुए।
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एक महिला की इसी गांव में पॉजीटिव पाए जाने के बाद मौत
स्थिति यह है कि गांव में तीन तीन बार एंटी लारवा स्प्रे, फॉगिंग के साथ साथ संभाग स्तरीय टीम और डीसी कठुआ के दौरे के बाद भी लगातार मामले सामने आए ही जा रहे हैं। हाल ही में डेंगू से पंजाब की एक महिला की इसी गांव में पॉजीटिव पाए जाने के बाद मौत भी हुई। जबकि अनाधिकारिक तौर पर गोविंदसर में पांच सौ से ज्यादा लोग इस बार डेंगू के पीड़ित हुए हैं। आधिकारिक तौर पर भी गोविंदसर गांव में आंकड़ा सौ के पार है।
चौबीस घंटे का दावा, रिपोर्ट मिल रही तीन-चार दिन बाद
कठुआ। जिले में डेंगू के लगातार सामने आ रहे मामलों के बीच स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आती रही है। जीएमसी कठुआ में उपचार के लिए ड्रिप सेट से लेकर पैरासीटामोल और इंजेक्शन तक उपलब्ध नहीं होने का मरीज और तीमारदार आरोप लगाते रहे हैं, तो वहीं डेंगू वार्ड पिछले कई दिनों तक बंद ही पाया गया है। जनसेवा संस्थान गोविंदसर के अध्यक्ष शशि शर्मा ने कहा कि गरीब लोगों के लिए कोई रास्ता नहीं है। समृद्ध लोग यहां उपचार से बेहतर समझ रहे हैं कि वह मरीजों को पंजाब ले जाएं। उन्होंने कहा कि मामला जिला उपायुक्त से लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी के संज्ञान में भी लाया गया है। लेकिन कोई भी हल नजर नहीं आ रहा है। उपराज्यपाल से मांग की गई है कि संज्ञान लिया जाए और लापरवाही बरतने वालों पर फौरी कार्रवाई की जाए।
उधर, हालात ऐसे हैं कि स्वास्थ्य विभाग निजी लैब में डेंगू की जांच रिपोर्ट को वैध नहीं मानता है और न ही इनके आंकड़ों को शामिल करता है। ऐसे में सवाल यह भी है कि आखिर ऐसी जांच क्यूं होने दी जा रही है। मरीजों से आठ सौ रुपये से 18 सौ रुपये तक वसूले जा रहे हैं, लेकिन रिपोर्ट ही वैध नहीं है। जीएमसी कठुआ में जांच रिपोर्ट आने को लेकर चौबीस घंटे का दावा प्रदेश स्तर के अधिकारी करते रहे हैं। लेकिन असलियत यह है कि डेंगू के प्रकोप के बीच एक सप्ताह के लगभग जांच जहां ठप रही है, वहीं अब भी जांच रिपोर्ट तीन से चार दिन में हासिल होती है।