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गोपाष्टमी पर श्रद्धालुओं ने की गो माता की पूजा
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कठुआ/बिलावर। जिला भर में गोपाष्टमी का पर्व मनाया गया। इस दौरान विभिन्न गोशालाओं एवं मंदिरों में कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहां श्रद्धालुओं ने विधि विधान से गो माता का पूजन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। वहीं महिलाओं ने संकीर्तन किया।
पर्व के चलते बेड़ियां पत्तन स्थित गायत्री गोशाला में विशेष समारोह का आयोजन किया गया। इसमें श्री श्री 1008 अक्षरानंद महाराज विशेष रूप से उपस्थित रहे। उनके मार्गदर्शन में श्रद्धालुओं ने गो माता का विधि विधान से पूजन किया। कार्यक्रम के दौरान अक्षरानंद महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को गो माता के महत्व से परिचित कराते हुए सभी से गो पालन करने के लिए कहा।
गोशाला के चेयरमैन ज्ञान सिंह पठानिया ने लोगों को गोपाष्टमी की बधाई देते हुए कहा कि संपूर्ण विश्व में हमारी सनातन संस्कृति ही एकमात्र ऐसी संस्कृति है, जहां पशु-पक्षी, नदी, पहाड़, वनस्पति सभी को आदर दिया जाता है। यही हमारी श्रेष्ठता का परिचायक है। गोमाता में सनातन संस्कृति के अनुसार 33 करोड़ देवी देवताओं का वास है। उनकी सेवा और पूजन से हमें देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जो हमारे सभी कष्टों विघ्नों का नाश करता है।
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बिलावर में भी लोगों ने गोमाता को तिलक लगाकर हार पहनाए। कई भक्तों ने चारा भी खिलाया। इस दौरान सुख-समृद्धि के लिए कामना भी की गई। पंडित राधा कृष्ण शास्त्री ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार माना गया है कि जो लोग गाय माता की पूजा करते हैं और गाय की परिक्रमा करते हैं, उस व्यक्ति की हर मनोकामना पूरी होती है। उन्होंने बताया कि गोमाता में 33 करोड़ देवता वास करते हैं और जो व्यक्ति गो माता की पूजा करता है, उसे सभी देवी देवताओं की पूजा जैसा फल प्राप्त होता है। गाय की पूजा करने वाले व्यक्ति पर ग्रहों का प्रभाव नहीं पड़ता है।
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पर्व के चलते बेड़ियां पत्तन स्थित गायत्री गोशाला में विशेष समारोह का आयोजन किया गया। इसमें श्री श्री 1008 अक्षरानंद महाराज विशेष रूप से उपस्थित रहे। उनके मार्गदर्शन में श्रद्धालुओं ने गो माता का विधि विधान से पूजन किया। कार्यक्रम के दौरान अक्षरानंद महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को गो माता के महत्व से परिचित कराते हुए सभी से गो पालन करने के लिए कहा।
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गोशाला के चेयरमैन ज्ञान सिंह पठानिया ने लोगों को गोपाष्टमी की बधाई देते हुए कहा कि संपूर्ण विश्व में हमारी सनातन संस्कृति ही एकमात्र ऐसी संस्कृति है, जहां पशु-पक्षी, नदी, पहाड़, वनस्पति सभी को आदर दिया जाता है। यही हमारी श्रेष्ठता का परिचायक है। गोमाता में सनातन संस्कृति के अनुसार 33 करोड़ देवी देवताओं का वास है। उनकी सेवा और पूजन से हमें देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जो हमारे सभी कष्टों विघ्नों का नाश करता है।
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बिलावर में भी लोगों ने गोमाता को तिलक लगाकर हार पहनाए। कई भक्तों ने चारा भी खिलाया। इस दौरान सुख-समृद्धि के लिए कामना भी की गई। पंडित राधा कृष्ण शास्त्री ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार माना गया है कि जो लोग गाय माता की पूजा करते हैं और गाय की परिक्रमा करते हैं, उस व्यक्ति की हर मनोकामना पूरी होती है। उन्होंने बताया कि गोमाता में 33 करोड़ देवता वास करते हैं और जो व्यक्ति गो माता की पूजा करता है, उसे सभी देवी देवताओं की पूजा जैसा फल प्राप्त होता है। गाय की पूजा करने वाले व्यक्ति पर ग्रहों का प्रभाव नहीं पड़ता है।