{"_id":"6849e46a7f57bf37a70f7103","slug":"court-order-in-kathua-kathua-news-c-201-1-knt1009-120920-2025-06-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kathua News: पशु तस्करी के दोषी पर 4,050 रुपये जुर्माना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kathua News: पशु तस्करी के दोषी पर 4,050 रुपये जुर्माना
Thu, 12 Jun 2025 01:47 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Thu, 12 Jun 2025 01:47 AM IST
विज्ञापन
कठुआ। हीरानगर की मुंसिफ कोर्ट ने पशु तस्करी के दोषी को 4,050 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। तय जुर्माना चुकाने पर कोर्ट ने दोषी के जमानती और व्यक्तिगत बाॅन्ड को खारिज कर मामले का निपटारा कर दिया।
थाना राजबाग पुलिस ने इसी साल अप्रैल में बनिहाल रामबन निवासी शबीर अहमद को पशु तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया था। सबूत जुटाने के बाद पुलिस ने उसके खिलाफ मामला दर्ज कर कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया।
आरोपी ने मई में न्यायालय के समक्ष अपने अपराध के लिए स्वीकारोक्ति आवेदन दिया और प्रार्थना की गई कि वह अपने अपराध के लिए दोषी होना चाहता है। अदालत ने मामले में अभियुक्त को कानूनी प्रक्रिया के बारे में बताया और कहा कि वह ऐसा बयान देने के लिए बाध्य नहीं है। अगर वह ऐसा करता है तो उसका बयान उसके खिलाफ भी पढ़ा जा सकता है।
विज्ञापन
इसलिए आरोपी को अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने के लिए पर्याप्त समय भी दिया गया, लेकिन वह अपना बयान दर्ज करवाने पर अड़ा रहा। इसके बाद कोर्ट ने उसे दोषी करार देकर उसे 4,050 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
आदेश के अनुसार दोषी को बीएनएस की धारा 223 के तहत जिला मजिस्ट्रेट के आदेश की अवहेलना करने पर चार हजार रुपये और पीसीए की धारा 11 के तहत पशुओं के साथ क्रूरता करने के अपराध के लिए 50 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। दोषी ने इस राशि को मौके पर ही अदा कर दिया। इसके बाद कोर्ट ने मामले का निपटारा कर दिया गया।
विज्ञापन
थाना राजबाग पुलिस ने इसी साल अप्रैल में बनिहाल रामबन निवासी शबीर अहमद को पशु तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया था। सबूत जुटाने के बाद पुलिस ने उसके खिलाफ मामला दर्ज कर कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया।
विज्ञापन
आरोपी ने मई में न्यायालय के समक्ष अपने अपराध के लिए स्वीकारोक्ति आवेदन दिया और प्रार्थना की गई कि वह अपने अपराध के लिए दोषी होना चाहता है। अदालत ने मामले में अभियुक्त को कानूनी प्रक्रिया के बारे में बताया और कहा कि वह ऐसा बयान देने के लिए बाध्य नहीं है। अगर वह ऐसा करता है तो उसका बयान उसके खिलाफ भी पढ़ा जा सकता है।
विज्ञापन
इसलिए आरोपी को अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने के लिए पर्याप्त समय भी दिया गया, लेकिन वह अपना बयान दर्ज करवाने पर अड़ा रहा। इसके बाद कोर्ट ने उसे दोषी करार देकर उसे 4,050 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
आदेश के अनुसार दोषी को बीएनएस की धारा 223 के तहत जिला मजिस्ट्रेट के आदेश की अवहेलना करने पर चार हजार रुपये और पीसीए की धारा 11 के तहत पशुओं के साथ क्रूरता करने के अपराध के लिए 50 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। दोषी ने इस राशि को मौके पर ही अदा कर दिया। इसके बाद कोर्ट ने मामले का निपटारा कर दिया गया।