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Kathua News: गलत तरीके से रास्ता रोकने और आर्म्स एक्ट के आरोपी को दी सशर्त जमानत
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। विशेष मोबाइल मजिस्ट्रेट ने गलत तरीके से रास्ता रोकने और आर्म्स एक्ट के आरोपी को सशर्त जमानत दी है। अदालत ने आरोपी को जमानत के लिए 20 हजार रुपये का जमानती बांड सहित समान राशि का व्यक्तिगत बांड जांच अधिकारी के समक्ष पेश करने का आदेश दिया है।
इसके अलावा आरोपी को निर्देश दिया गया है कि वह जांच में कोई बाधा नहीं डालेगा और न ही अभियोजन पक्ष के गवाहों के साथ छेड़छाड़ करेगा। पुलिस की ओर से दायर रिपोर्ट के मुताबिक अनिल कुमार निवासी वार्ड चार हीरानगर पर आरोप है कि उसने 24 फरवरी को शिकायतकर्ता का रास्ता रोका जब वह अपने ऑटो में जा रहा था। आरोपी पर टोके से हमला करने का भी आरोप है। शिकायतकर्ता मौके से भाग गया, लेकिन आरोपी ने उसका ऑटो क्षतिग्रस्त कर दिया। हीरानगर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 126 (2), 324 (4) और 4/25 आर्म्स एक्ट के मामला दर्ज किया था।
आरोपी के वकील ने न्यायालय में जमानत अर्जी दायर कर कहा कि उसका मुव्वकिल निर्दोष है। उसे पुलिस ने झूठे मामले में फंसाया है और वह घटना के बाद से ही गिरफ्तार है। लिहाजा उसे जमानत दी जाए। जिसका अभियोजन पक्ष ने विरोध किया। कहा कि आरोपी की ओर से किए गए आपराधिक कृत्य से आम जनता और बड़े पैमाने पर समाज की शांति व सुरक्षा को खतरा है। अगर आरोपी को जमानत दी जाती है तो अभियोजन पक्ष गवाहों के साथ छेड़छाड़ की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपी को सशर्त जमानत देने का फैसला सुनाया।
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कठुआ। विशेष मोबाइल मजिस्ट्रेट ने गलत तरीके से रास्ता रोकने और आर्म्स एक्ट के आरोपी को सशर्त जमानत दी है। अदालत ने आरोपी को जमानत के लिए 20 हजार रुपये का जमानती बांड सहित समान राशि का व्यक्तिगत बांड जांच अधिकारी के समक्ष पेश करने का आदेश दिया है।
इसके अलावा आरोपी को निर्देश दिया गया है कि वह जांच में कोई बाधा नहीं डालेगा और न ही अभियोजन पक्ष के गवाहों के साथ छेड़छाड़ करेगा। पुलिस की ओर से दायर रिपोर्ट के मुताबिक अनिल कुमार निवासी वार्ड चार हीरानगर पर आरोप है कि उसने 24 फरवरी को शिकायतकर्ता का रास्ता रोका जब वह अपने ऑटो में जा रहा था। आरोपी पर टोके से हमला करने का भी आरोप है। शिकायतकर्ता मौके से भाग गया, लेकिन आरोपी ने उसका ऑटो क्षतिग्रस्त कर दिया। हीरानगर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 126 (2), 324 (4) और 4/25 आर्म्स एक्ट के मामला दर्ज किया था।
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आरोपी के वकील ने न्यायालय में जमानत अर्जी दायर कर कहा कि उसका मुव्वकिल निर्दोष है। उसे पुलिस ने झूठे मामले में फंसाया है और वह घटना के बाद से ही गिरफ्तार है। लिहाजा उसे जमानत दी जाए। जिसका अभियोजन पक्ष ने विरोध किया। कहा कि आरोपी की ओर से किए गए आपराधिक कृत्य से आम जनता और बड़े पैमाने पर समाज की शांति व सुरक्षा को खतरा है। अगर आरोपी को जमानत दी जाती है तो अभियोजन पक्ष गवाहों के साथ छेड़छाड़ की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपी को सशर्त जमानत देने का फैसला सुनाया।
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