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बनकर तैयार हुआ उत्तर भारत का पहला बायोटेक पार्क
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घाटी औद्योगिक क्षेत्र में तैयार बायोटेक पार्क की इमारत। संवाद
- फोटो : KATHUA
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कठुआ। जम्मू-कश्मीर में उत्तर भारत का पहला बायोटेक पार्क बनकर तैयार हो गया है। इसी माह 28 तारीख को केंद्रीय मंत्री इस बायोटेक पार्क को देश को समर्पित करने जा रहे हैं।
कठुआ जिले के घाटी औद्योगिक क्षेत्र में लगभग 44 करोड़ की राशि से तैयार हुआ यह बायोटेक पार्क प्रदेश में अनुसंधान के साथ साथ युवा उद्यमियों के साथ साथ किसानों को मंच उपलब्ध कराएगा। केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की परियोजना में व्यक्तिगत रुचि के बाद 10 फरवरी, 2019 को इसका काम शुरू किया गया था। कोरोना महामारी के चलते प्रभावित हुए निर्माण के बाद भी इसे लेकर पीएमओ कार्यालय की विशेष रुचि के बाद परियोजना को निर्धारित लक्ष्य तक पूरा कर लिया गया है। परियोजना से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इसी माह के अंत तक परियोजना का उद्घाटन होने जा रहा है, जिसे लेकर तैयारियां पूरी की जा रही हैं।
बायोटेक पार्क में प्रदेश में होने वाले औषधीय गुणों के पौधों पर अनुसंधान किया जा सकेगा। स्थानीय किसान, पढ़े-लिखे युवा जो नया उद्योग लगाना चाहते हैं या ऐसे उद्यमी जो अपनी उत्पादों को दुनिया के सामने रखना चाहते हैं, इस प्लेटफॉर्म का उपयोग कर सकेंगे। लैब स्केल पर क्वालिटी, स्टैंडर्डाइजेशन में भी यह बायोटेक पार्क मदद करेगा। औषधीय या ऐरोमैटिक पौधों के उत्पादन को भी बढ़ावा देगा, जिससे बड़े पैमाने पर खाली पड़ी बंजर जमीनों का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे बेहतर उत्पादों को बाजार तक पहुंचाना आसान होगा, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था में निश्चित माना जा रहा है। प्रदेश में चल रहे अरोमा मिशन में यह पार्क जान फूंकने की तैयारी में है, चूंकि अब तक प्रदेश में तैयार होने वाले औषधीय और सुगंधित पौधों से तेल या अर्क निकालकर इस पर शोध कर इसका मूल्यवर्धन नहीं किया जा सकता था, लेकिन अब यह संभव हो जाएगा। इससे किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी।
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एनपीसीसी की ओर से तैयार की जा रही बायोटेक पार्क की इमारत के अलावा इस पार्क को सीएसआईआर यानी काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च की निगरानी में विकसित किया जा रहा है।
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ग्रीन कैटेगरी के उद्योगों को भी बढ़ावा देगा
आईआईएम जम्मू से बायोटेक पार्क कठुआ के लिए ओएसडी नियुक्त डॉ. जबीर अहमद ने बताया कि कठुआ के बायोटेक पार्क से जहां जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की जैव विविधताओं, औषधीय और ऐरामैटिक पौधों पर अनुसंधान होगा, वहीं यह ग्रीन कैटेगरी के उद्योगों को भी बढ़ावा देगा। पार्क जम्मू संभाग के कंडी इलाकों से लेकर भद्रवाह, बनी, बसोहली और किश्तवाड़ आदि के मौसम के अनुकूल औषधीय पौधों की पैदावार बढ़ाकर किसानों को पारंपरिक खेती से अलग बेहतर आय के साधन भी उपलब्ध कराएगा। शिक्षित बेरोजगार युवाओं के ज्ञान और उनकी उद्यमी सोच को बढ़ावा देने के लिए आईआईआईएम, जम्मू की ओर से पहले ही काम शुरू किया जा चुका है।
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बायोटेक पार्क में होंगी ये सुविधाएं
- एक्सट्रैक्शन-जिसमें पॉयलट स्केल पौधों से एक्सट्रैक्शन की जाएगी
- कंपाउंड फर्मेंटेशन-एंजाइम या अन्य मॉलिक्यूल पर काम होगा
- सेंट्रल इंस्ट्रूमेंटेशन-जिसमें वैज्ञानिक और केमिकल स्टैंडर्डाइजेशन किया जाएगा
- एनालिटिकल लैब सुविधा
- ट्रेनिंग और कांफ्रेंस हॉल
- बिजनेस विकास ग्रुप के लिए मीटिंग रूम
- कैफेटेरिया, बैंक और डिस्पेंसरी
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कठुआ जिले के घाटी औद्योगिक क्षेत्र में लगभग 44 करोड़ की राशि से तैयार हुआ यह बायोटेक पार्क प्रदेश में अनुसंधान के साथ साथ युवा उद्यमियों के साथ साथ किसानों को मंच उपलब्ध कराएगा। केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की परियोजना में व्यक्तिगत रुचि के बाद 10 फरवरी, 2019 को इसका काम शुरू किया गया था। कोरोना महामारी के चलते प्रभावित हुए निर्माण के बाद भी इसे लेकर पीएमओ कार्यालय की विशेष रुचि के बाद परियोजना को निर्धारित लक्ष्य तक पूरा कर लिया गया है। परियोजना से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इसी माह के अंत तक परियोजना का उद्घाटन होने जा रहा है, जिसे लेकर तैयारियां पूरी की जा रही हैं।
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बायोटेक पार्क में प्रदेश में होने वाले औषधीय गुणों के पौधों पर अनुसंधान किया जा सकेगा। स्थानीय किसान, पढ़े-लिखे युवा जो नया उद्योग लगाना चाहते हैं या ऐसे उद्यमी जो अपनी उत्पादों को दुनिया के सामने रखना चाहते हैं, इस प्लेटफॉर्म का उपयोग कर सकेंगे। लैब स्केल पर क्वालिटी, स्टैंडर्डाइजेशन में भी यह बायोटेक पार्क मदद करेगा। औषधीय या ऐरोमैटिक पौधों के उत्पादन को भी बढ़ावा देगा, जिससे बड़े पैमाने पर खाली पड़ी बंजर जमीनों का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे बेहतर उत्पादों को बाजार तक पहुंचाना आसान होगा, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था में निश्चित माना जा रहा है। प्रदेश में चल रहे अरोमा मिशन में यह पार्क जान फूंकने की तैयारी में है, चूंकि अब तक प्रदेश में तैयार होने वाले औषधीय और सुगंधित पौधों से तेल या अर्क निकालकर इस पर शोध कर इसका मूल्यवर्धन नहीं किया जा सकता था, लेकिन अब यह संभव हो जाएगा। इससे किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी।
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एनपीसीसी की ओर से तैयार की जा रही बायोटेक पार्क की इमारत के अलावा इस पार्क को सीएसआईआर यानी काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च की निगरानी में विकसित किया जा रहा है।
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ग्रीन कैटेगरी के उद्योगों को भी बढ़ावा देगा
आईआईएम जम्मू से बायोटेक पार्क कठुआ के लिए ओएसडी नियुक्त डॉ. जबीर अहमद ने बताया कि कठुआ के बायोटेक पार्क से जहां जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की जैव विविधताओं, औषधीय और ऐरामैटिक पौधों पर अनुसंधान होगा, वहीं यह ग्रीन कैटेगरी के उद्योगों को भी बढ़ावा देगा। पार्क जम्मू संभाग के कंडी इलाकों से लेकर भद्रवाह, बनी, बसोहली और किश्तवाड़ आदि के मौसम के अनुकूल औषधीय पौधों की पैदावार बढ़ाकर किसानों को पारंपरिक खेती से अलग बेहतर आय के साधन भी उपलब्ध कराएगा। शिक्षित बेरोजगार युवाओं के ज्ञान और उनकी उद्यमी सोच को बढ़ावा देने के लिए आईआईआईएम, जम्मू की ओर से पहले ही काम शुरू किया जा चुका है।
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बायोटेक पार्क में होंगी ये सुविधाएं
- एक्सट्रैक्शन-जिसमें पॉयलट स्केल पौधों से एक्सट्रैक्शन की जाएगी
- कंपाउंड फर्मेंटेशन-एंजाइम या अन्य मॉलिक्यूल पर काम होगा
- सेंट्रल इंस्ट्रूमेंटेशन-जिसमें वैज्ञानिक और केमिकल स्टैंडर्डाइजेशन किया जाएगा
- एनालिटिकल लैब सुविधा
- ट्रेनिंग और कांफ्रेंस हॉल
- बिजनेस विकास ग्रुप के लिए मीटिंग रूम
- कैफेटेरिया, बैंक और डिस्पेंसरी