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Kathua News: कर्ज वसूली के नाम पर लगाया धमकाने का आरोप
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कठुआ। निजी माइक्रो फाइनेंस कंपनी के कर्ज में डूबे गोविंदसर लोगों ने कंपनी पर उन्हें धमकाने और अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया है। शनिवार को जिला पुलिस मुख्यालय पहुंची प्रभावित महिलाओं ने पुलिस से ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग की।
कर्ज के नीचे दबी महिलाओं का नेतृत्व कर रहे आम आदमी पार्टी के नेता सुदेश कुमार भंडारी ने बताया कि मदद के नाम पर लोगों को पिछले काफी सालों से कर्ज के मकड़जाल में फंसाया जा रहा है। पचास हजार रुपये कर्ज देने के लिए उक्त कंपनियां केवल उन गांवों मोहल्लों की ओर ध्यान केंद्रित करती हैं, जहां लोग अशिक्षित होने के साथ आर्थिक रूप से कमजोर हैं। वे मजबूरी में उनकी शर्तों को आसानी से मान लेते हैं। उन्होंने बताया कि गली-गली में घूमने वाले ऐसे लोग कर्ज देने से पहले पांच हजार फाइल चार्ज के नाम पर वसूल लेते हैं। वहीं कर्ज देने के बाद दो हजार कमीशन भी लिया जाता है। ढाई साल के दौरान 2760 रुपये प्रतिमाह किश्तों से अदा होने वाले इस कर्ज की एक भी किश्त अगर निर्धारित समय पर अदा न की जाए तो कंपनी के कर्मचारी लोगों को धमकाने, पुलिस कार्रवाई करवाने और अभद्र भाषा का प्रयोग करने से भी पीछे नहीं रहते हैं। गत दिन भी गांव की एक महिला जब निर्धारित समय पर अपनी किश्त नहीं दे पाई तो उसे अपनी पायल देकर किश्त से छुटकारा पाना पड़ा है।
उन्होंने कहा कि आज वे लोगों के साथ छल करने वाले ऐसे लोगों पर रोक लगाने की मांग लेकर एसएसपी कठुआ से मिलने आए थे लेकिन उनके उपलब्ध न होने के कारण वे अपनी फरियाद उनके सामने नहीं कर पाए हैं लेकिन वह उम्मीद करते हैं कि गरीब लोगों को महंगे कर्ज के नीचे दबाने वाले ऐसे लोगों को रोकने के लिए पुलिस आवश्यक कार्रवाई करेगी।
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कर्ज के नीचे दबी महिलाओं का नेतृत्व कर रहे आम आदमी पार्टी के नेता सुदेश कुमार भंडारी ने बताया कि मदद के नाम पर लोगों को पिछले काफी सालों से कर्ज के मकड़जाल में फंसाया जा रहा है। पचास हजार रुपये कर्ज देने के लिए उक्त कंपनियां केवल उन गांवों मोहल्लों की ओर ध्यान केंद्रित करती हैं, जहां लोग अशिक्षित होने के साथ आर्थिक रूप से कमजोर हैं। वे मजबूरी में उनकी शर्तों को आसानी से मान लेते हैं। उन्होंने बताया कि गली-गली में घूमने वाले ऐसे लोग कर्ज देने से पहले पांच हजार फाइल चार्ज के नाम पर वसूल लेते हैं। वहीं कर्ज देने के बाद दो हजार कमीशन भी लिया जाता है। ढाई साल के दौरान 2760 रुपये प्रतिमाह किश्तों से अदा होने वाले इस कर्ज की एक भी किश्त अगर निर्धारित समय पर अदा न की जाए तो कंपनी के कर्मचारी लोगों को धमकाने, पुलिस कार्रवाई करवाने और अभद्र भाषा का प्रयोग करने से भी पीछे नहीं रहते हैं। गत दिन भी गांव की एक महिला जब निर्धारित समय पर अपनी किश्त नहीं दे पाई तो उसे अपनी पायल देकर किश्त से छुटकारा पाना पड़ा है।
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उन्होंने कहा कि आज वे लोगों के साथ छल करने वाले ऐसे लोगों पर रोक लगाने की मांग लेकर एसएसपी कठुआ से मिलने आए थे लेकिन उनके उपलब्ध न होने के कारण वे अपनी फरियाद उनके सामने नहीं कर पाए हैं लेकिन वह उम्मीद करते हैं कि गरीब लोगों को महंगे कर्ज के नीचे दबाने वाले ऐसे लोगों को रोकने के लिए पुलिस आवश्यक कार्रवाई करेगी।
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