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Kathua News: लावारिस मवेशियों से लोग परेशान, नगर निगम लगाम कसने में रहा नाकाम
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कठुआ। पिछले कुछ सालों के दौरान शहर में लगातार बढ़ रही लावारिस मवेशियों की संख्या आम लोगों के लिए सिरदर्द बनती जा रही है। जगह-जगह लगने वाला इनका जमावड़ा कभी सड़क हादसों का कारण बनता है तो कई बार इनके उग्र हो जाने से लोग घायल हो जाते हैं। इसके कारण पूरे शहर में जहां-तहां घूमने वाले इन मवेशियों का लोगों में डर बढ़ता जा रहा है। वहीं इनको शहर से हटाने के लिए प्रशासन की ओर से कोई पहल न किए जाने से लोग में रोष भी है।
कभी केवल शहर के अंदर दिखने वाले इन मवेशियों की उपस्थिति अब हाईवे पर भी देखी जा सकती है, जो कई बार राष्ट्रीय राजमार्ग पर तेज गति से चलने वाले वाहन की चपेट में आ जाते हैं। इससे इन मवेशियों को नुकसान होता ही है, कई वाहनों के साथ उस पर सवार भी घायल हो जाते हैं। लगातार बढ़ती इनकी संख्या से किसानों के सामने भी अपनी फसल की रखवाली करना एक बढ़ी समस्या बन रही है। लोगों का कहना है कि पहले गली मोहल्लों में उनके बच्चे निकलकर आ जा सकते थे लेकिन अब तो वह भी असंभव हो गया है।
गोशालाओं का भी नहीं हो रहा कोई लाभ
शहर में लावारिस मवेशियों को आश्रय देने के लिए पिछले सालों में कई गोशालाएं खोली गई हैं। सैकड़ों कनाल भूमि में खोली गई इन गोशालाओं में भी लावारिस घूमने वाले इन मवेशियों को आश्रय नहीं मिल पा रहा है। इस बारे में जब गोशाला संचालकों से बात की जाती है तो वे अपनी क्षमता के अनुसार ही मवेशियों को रखने की बात कहकर शहर की इस मुख्य समस्या से निपटने में अपना योगदान देने से पीछे हट जाते हैं। इसके कारण इन गोशालाओं का भी कोई लाभ नहीं हो रहा है।
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आगे नहीं बढ़ पाई कैटल पांड की बात
शहर में लावारिस घूमने वाले इन मवेशियों की समस्या का समाधान करने के लिए वर्ष 2019 में कठुआ नगर परिषद की ओर से कैटल पांड बनाने का एक प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजा गया था। शहर के रामलीला मैदान से सटे उद्योग विभाग के खाली पड़े वर्क सेंटर की भूमि नगर परिषद ने इसके लिए मांगी थी। इसके बाद तत्कालीन मंडलायुक्त संजीव वर्मा ने इस जगह का दौरा भी किया लेकिन इससे आगे कोई बात नहीं बढ़ पाई।
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शहर में चौक-चौराहों के बाद अब गली मोहल्लों में भी लावारिस मवेशियों की मौजूदगी लोगों के लिए खतरा बनती जा रही है। लोगों की इस गंभीर समस्या का निदान करने के लिए प्रशासन की ओर से कोई पहल न किया जाना निराशाजनक है। अगर इसी तरह से इन मवेशियों की संख्या बढ़ी तो आने वाले दिनों में बच्चों, महिलाओं के साथ बुजुर्गों का तो सड़क पर निकल पाना भी मुश्किल हो जाएगा।
-मदन लाल खजूरिया।
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शहर में लावारिस मवेशियों को रखने के लिए जगह-जगह गोशालाएं तो खोल दी गई हैं लेकिन वहां सिर्फ उन्हीं मवेशियों को आश्रय मिल रहा है, जो दूध देते हैं, जबकि अन्य मवेशी आज भी सड़कों पर घूम रहे हैं। दुखद स्थितियां हैं कि हमेशा धर्म की बात करने वाले धार्मिक संगठन भी इस पर कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं।
-अनिल भारद्वाज
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पिछले कुछ सालों में शहर में मवेशियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ये अक्सर सड़क दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं क्योंकि रात के समय शहर की प्रमुख सड़कों पर इनका कब्जा बना रहता है। कई बार लोग इनसे टकराकर घायल होते हैं। वहीं चौक-चौराहों पर इन्हीं का कब्जा दिखाई देता है। -देवेंद्र कुमार
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शहर में लावारिस मवेशियों की समस्या गंभीर है। इसके लिए दो बार इन मवेशियों को शहर से दूर भेजने का प्रयास भी किया गया। लगातार इन मवेशियों की बढ़ रही संख्या से लोग असुरक्षित हैं। शहर को इस गंभीर समस्या से निजात दिलाने के लिए वर्ष 2019 में कैटल पांड का प्रस्ताव नगर परिषद ने बनाकर भेजा था। अब सरकार को समाधान के लिए पहल करनी होगी।
-नरेश शर्मा, पूर्व प्रधान नगर परिषद कठुआ।
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शहर में लावारिस मवेशियों की तादाद काफी ज्यादा है, जिससे परेशानी होना भी स्वाभाविक है। इसके लिए कैटल पांड की जरूरत है। नगर परिषद ने अगर कैटल पांड बनाने के लिए कोई प्रस्ताव भेजा था तो वह क्यों नही मंजूर हुआ है। इसकी जानकारी नहीं है। फिलहाल इस मामले में विभाग के उच्चाधिकारियों से बात की जाएगी।
-निनाद सेन, मुख्य कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद कठुआ।
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कभी केवल शहर के अंदर दिखने वाले इन मवेशियों की उपस्थिति अब हाईवे पर भी देखी जा सकती है, जो कई बार राष्ट्रीय राजमार्ग पर तेज गति से चलने वाले वाहन की चपेट में आ जाते हैं। इससे इन मवेशियों को नुकसान होता ही है, कई वाहनों के साथ उस पर सवार भी घायल हो जाते हैं। लगातार बढ़ती इनकी संख्या से किसानों के सामने भी अपनी फसल की रखवाली करना एक बढ़ी समस्या बन रही है। लोगों का कहना है कि पहले गली मोहल्लों में उनके बच्चे निकलकर आ जा सकते थे लेकिन अब तो वह भी असंभव हो गया है।
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गोशालाओं का भी नहीं हो रहा कोई लाभ
शहर में लावारिस मवेशियों को आश्रय देने के लिए पिछले सालों में कई गोशालाएं खोली गई हैं। सैकड़ों कनाल भूमि में खोली गई इन गोशालाओं में भी लावारिस घूमने वाले इन मवेशियों को आश्रय नहीं मिल पा रहा है। इस बारे में जब गोशाला संचालकों से बात की जाती है तो वे अपनी क्षमता के अनुसार ही मवेशियों को रखने की बात कहकर शहर की इस मुख्य समस्या से निपटने में अपना योगदान देने से पीछे हट जाते हैं। इसके कारण इन गोशालाओं का भी कोई लाभ नहीं हो रहा है।
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आगे नहीं बढ़ पाई कैटल पांड की बात
शहर में लावारिस घूमने वाले इन मवेशियों की समस्या का समाधान करने के लिए वर्ष 2019 में कठुआ नगर परिषद की ओर से कैटल पांड बनाने का एक प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजा गया था। शहर के रामलीला मैदान से सटे उद्योग विभाग के खाली पड़े वर्क सेंटर की भूमि नगर परिषद ने इसके लिए मांगी थी। इसके बाद तत्कालीन मंडलायुक्त संजीव वर्मा ने इस जगह का दौरा भी किया लेकिन इससे आगे कोई बात नहीं बढ़ पाई।
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शहर में चौक-चौराहों के बाद अब गली मोहल्लों में भी लावारिस मवेशियों की मौजूदगी लोगों के लिए खतरा बनती जा रही है। लोगों की इस गंभीर समस्या का निदान करने के लिए प्रशासन की ओर से कोई पहल न किया जाना निराशाजनक है। अगर इसी तरह से इन मवेशियों की संख्या बढ़ी तो आने वाले दिनों में बच्चों, महिलाओं के साथ बुजुर्गों का तो सड़क पर निकल पाना भी मुश्किल हो जाएगा।
-मदन लाल खजूरिया।
शहर में लावारिस मवेशियों को रखने के लिए जगह-जगह गोशालाएं तो खोल दी गई हैं लेकिन वहां सिर्फ उन्हीं मवेशियों को आश्रय मिल रहा है, जो दूध देते हैं, जबकि अन्य मवेशी आज भी सड़कों पर घूम रहे हैं। दुखद स्थितियां हैं कि हमेशा धर्म की बात करने वाले धार्मिक संगठन भी इस पर कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं।
-अनिल भारद्वाज
पिछले कुछ सालों में शहर में मवेशियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ये अक्सर सड़क दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं क्योंकि रात के समय शहर की प्रमुख सड़कों पर इनका कब्जा बना रहता है। कई बार लोग इनसे टकराकर घायल होते हैं। वहीं चौक-चौराहों पर इन्हीं का कब्जा दिखाई देता है। -देवेंद्र कुमार
शहर में लावारिस मवेशियों की समस्या गंभीर है। इसके लिए दो बार इन मवेशियों को शहर से दूर भेजने का प्रयास भी किया गया। लगातार इन मवेशियों की बढ़ रही संख्या से लोग असुरक्षित हैं। शहर को इस गंभीर समस्या से निजात दिलाने के लिए वर्ष 2019 में कैटल पांड का प्रस्ताव नगर परिषद ने बनाकर भेजा था। अब सरकार को समाधान के लिए पहल करनी होगी।
-नरेश शर्मा, पूर्व प्रधान नगर परिषद कठुआ।
शहर में लावारिस मवेशियों की तादाद काफी ज्यादा है, जिससे परेशानी होना भी स्वाभाविक है। इसके लिए कैटल पांड की जरूरत है। नगर परिषद ने अगर कैटल पांड बनाने के लिए कोई प्रस्ताव भेजा था तो वह क्यों नही मंजूर हुआ है। इसकी जानकारी नहीं है। फिलहाल इस मामले में विभाग के उच्चाधिकारियों से बात की जाएगी।
-निनाद सेन, मुख्य कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद कठुआ।