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Kathua News: सृष्टि के संघारक नहीं सृजनकर्ता हैं भोले शंकर
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कठुआ। कृष्णा कॉलोनी स्थित श्री महाकालेश्वर शिव दुर्गा मंदिर में आयोजित शिव महापुराण कथा में कथावाचक मनोहर लाल शास्त्री ने बताया कि इस सृष्टि में भगवान शिव की भूमिका संघारक की है लेकिन वास्तव में वही सृजनकर्ता हैं।
उन्होंने कहा कि शिव तपस्या, त्याग, संयम एवं करुणा की मूर्ति हैं। शिव पूजन से प्राणी में उपरोक्त गुण पैदा होते हैं। शिव की उपासना करने वाले में अगर त्याग, दया व संयम नहीं है तो विचार कर लेना चाहिए कि साधना में त्रुटि अवश्य रह गई है। शिव कथा जीवन को स्वच्छ बनाने की प्रेरणा देती है। शिव उपासक बड़े से बड़ा त्याग भी कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि मर्यादा को तोड़ने वाले जीव को शिव स्वीकार नहीं करते।
मनोहर लाल शास्त्री ने कहा कि जब माता सती शिव के वचनों पर विश्वास न करते हुए श्रीराम की परीक्षा लेने के लिए सीता का रूप बनाकर गईं तो राम जी ने सीता रूप में आई हुई माता सती की चरण वंदना की एवं भगवान शिव की महिमा का वर्णन किया। भगवान शिव को जब सारी घटना का पता चला कि माता सती ने मर्यादा की पालना नहीं किया है तो शिव ने अपनी अर्धांगिनी सती का मन से परित्याग कर दिया। अगले जन्म में सती ने पार्वती का अवतार लेकर भगवान शिव को प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि शिव पूजन एवं कथा से स्वच्छ विचार एवं शिक्षाएं अपने जीवन में उतारकर जन कल्याण करना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि शिव तपस्या, त्याग, संयम एवं करुणा की मूर्ति हैं। शिव पूजन से प्राणी में उपरोक्त गुण पैदा होते हैं। शिव की उपासना करने वाले में अगर त्याग, दया व संयम नहीं है तो विचार कर लेना चाहिए कि साधना में त्रुटि अवश्य रह गई है। शिव कथा जीवन को स्वच्छ बनाने की प्रेरणा देती है। शिव उपासक बड़े से बड़ा त्याग भी कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि मर्यादा को तोड़ने वाले जीव को शिव स्वीकार नहीं करते।
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मनोहर लाल शास्त्री ने कहा कि जब माता सती शिव के वचनों पर विश्वास न करते हुए श्रीराम की परीक्षा लेने के लिए सीता का रूप बनाकर गईं तो राम जी ने सीता रूप में आई हुई माता सती की चरण वंदना की एवं भगवान शिव की महिमा का वर्णन किया। भगवान शिव को जब सारी घटना का पता चला कि माता सती ने मर्यादा की पालना नहीं किया है तो शिव ने अपनी अर्धांगिनी सती का मन से परित्याग कर दिया। अगले जन्म में सती ने पार्वती का अवतार लेकर भगवान शिव को प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि शिव पूजन एवं कथा से स्वच्छ विचार एवं शिक्षाएं अपने जीवन में उतारकर जन कल्याण करना चाहिए।
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