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Kathua News: भागवत कथा के शुभारंभ पर निकाली कलश यात्रा
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कठुआ। शहर के वार्ड नंबर 12 स्थित ठाकुरद्वारा में श्रीमद्भागवत कथा का कलश यात्रा के साथ शुभारंभ किया गया। शुक्रवार को मंदिर परिसर से ढोल नगाड़े के साथ निकाली गई कलश यात्रा में शामिल भक्तों की ओर से लगाए गए जयघोष और भजन कीर्तन से माहौल भक्तिमय हो गया।
कलश यात्रा शहर के जराई चौक और मुखर्जी चौक से होती हुई शहर के प्राचीन बावलियों पर पहुंची, जहां पूजा अर्चना के साथ कलशों को बावली के पवित्र जल से भरा गया और यात्रा वापस मंदिर में यात्रा आकर संपन्न हुई। यहां कलश की स्थापना की गई।
इस मौके पर कथाव्यास आचार्य लीला किशोरी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने से मानव जीवन में एक जन्म नहीं, अपितु कई जन्मों के पापों का नाश होने के साथ ही हमारे शुभ कर्मों का उदय होता है। इसके श्रवण मात्र से जीव जन्म और मरण के बंधन से मुक्त होकर शांत व स्थिर हो जाता है। उन्होंने कहा कि नारद जी ने भक्ति देवी के कष्ट की निवृत्ति के लिए श्रीमद्भागवत कथा का साप्ताहिक अनुष्ठान हरिद्वार में किया था। वहां संत कुमारों ने भागवत का प्रवचन करते हुए नारद के मन का संशय दूर किया।
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आचार्य लीला किशोरी ने बताया कि इसी कथा को धुंधकारी प्रेत ने अपने अग्रज से श्रवण किया और प्रेत मुनि से इस योनि से मुक्ति पाकर विष्णु लोक को प्राप्त हुए। भगवत श्रवण से जीव के सभी पाप कर्म मिट जाते हैं। भगवान विष्णु कहते हैं कि जो मेरी कथा कहता और करवाता है, उसके इस लोक के सभी कष्टों का वह हरण करते हैं। अंत में उसे बैकुंठ में वास मिलता है। अंत में प्रसाद वितरण के साथ पहले दिन की कथा को विराम दिया गया।
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कलश यात्रा शहर के जराई चौक और मुखर्जी चौक से होती हुई शहर के प्राचीन बावलियों पर पहुंची, जहां पूजा अर्चना के साथ कलशों को बावली के पवित्र जल से भरा गया और यात्रा वापस मंदिर में यात्रा आकर संपन्न हुई। यहां कलश की स्थापना की गई।
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इस मौके पर कथाव्यास आचार्य लीला किशोरी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने से मानव जीवन में एक जन्म नहीं, अपितु कई जन्मों के पापों का नाश होने के साथ ही हमारे शुभ कर्मों का उदय होता है। इसके श्रवण मात्र से जीव जन्म और मरण के बंधन से मुक्त होकर शांत व स्थिर हो जाता है। उन्होंने कहा कि नारद जी ने भक्ति देवी के कष्ट की निवृत्ति के लिए श्रीमद्भागवत कथा का साप्ताहिक अनुष्ठान हरिद्वार में किया था। वहां संत कुमारों ने भागवत का प्रवचन करते हुए नारद के मन का संशय दूर किया।
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आचार्य लीला किशोरी ने बताया कि इसी कथा को धुंधकारी प्रेत ने अपने अग्रज से श्रवण किया और प्रेत मुनि से इस योनि से मुक्ति पाकर विष्णु लोक को प्राप्त हुए। भगवत श्रवण से जीव के सभी पाप कर्म मिट जाते हैं। भगवान विष्णु कहते हैं कि जो मेरी कथा कहता और करवाता है, उसके इस लोक के सभी कष्टों का वह हरण करते हैं। अंत में उसे बैकुंठ में वास मिलता है। अंत में प्रसाद वितरण के साथ पहले दिन की कथा को विराम दिया गया।