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Kathua News: सेना ने जगाई उम्मीद, आठ साल बाद अक्षय ने पुकारा मां
Sun, 17 Aug 2025 01:43 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Sun, 17 Aug 2025 01:43 AM IST
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बनी के डुग्गन में सेना के अधिकारी डॉक्टर के साथ अक्षय और उसका परिवार सेना
कठुआ। बनी के दूर दराज डुग्गन गांव के एक गरीब परिवार का बेटा, अक्षय शर्मा, आठ वर्षों तक मौन जीवन जीता रहा। जन्म से ही होंठ और तालु की विकृति से ग्रस्त अक्षय ने तीन वर्ष की उम्र में ऑपरेशन तो करवाया, लेकिन बोलना फिर भी संभव नहीं हो पाया। आर्थिक तंगी से जूझते माता-पिता ने बेटे की आवाज सुनने की उम्मीद लगभग छोड़ दी थी।
क्षेत्र में तैनात एक सेना के डॉ. कैप्टन सौरभ सौलंखे की नजर अक्षय पर पड़ी। परिवार की पीड़ा से भावुक होकर उन्होंने अक्षय की जांच की और पाया कि उचित थेरेपी से वह बोल सकता है। गांव में कोई सुविधा न होने के कारण उन्होंने स्वयं स्पीच थेरेपी की तकनीकें सीखीं और अपने खाली समय में अक्षय को धैर्यपूर्वक सिखाना शुरू किया। पहले ध्वनियां, फिर शब्द, और अंततः वाक्य पर काम किया।
महीनों की मेहनत के बाद जब अक्षय ने पहली बार अपने माता-पिता को पुकारा तो उनके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। वह आवाज उनके लिए सिर्फ शब्द नहीं थी बल्कि वह एक चमत्कार था। एक ऐसा सपना जिसे उन्होंने वर्षों पहले दफना दिया था अब उनके आंगन में गूंज रहा था। दरअसल, यह सिर्फ एक सैनिक का करुणा भरा प्रयास नहीं था, बल्कि पूरे समुदाय के लिए आशा की किरण बन गया है।
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क्षेत्र में तैनात एक सेना के डॉ. कैप्टन सौरभ सौलंखे की नजर अक्षय पर पड़ी। परिवार की पीड़ा से भावुक होकर उन्होंने अक्षय की जांच की और पाया कि उचित थेरेपी से वह बोल सकता है। गांव में कोई सुविधा न होने के कारण उन्होंने स्वयं स्पीच थेरेपी की तकनीकें सीखीं और अपने खाली समय में अक्षय को धैर्यपूर्वक सिखाना शुरू किया। पहले ध्वनियां, फिर शब्द, और अंततः वाक्य पर काम किया।
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महीनों की मेहनत के बाद जब अक्षय ने पहली बार अपने माता-पिता को पुकारा तो उनके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। वह आवाज उनके लिए सिर्फ शब्द नहीं थी बल्कि वह एक चमत्कार था। एक ऐसा सपना जिसे उन्होंने वर्षों पहले दफना दिया था अब उनके आंगन में गूंज रहा था। दरअसल, यह सिर्फ एक सैनिक का करुणा भरा प्रयास नहीं था, बल्कि पूरे समुदाय के लिए आशा की किरण बन गया है।
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