{"_id":"5d361abd8ebc3e6cc92d6896","slug":"anganbadi-workers-protest-kathua-news-jmu1898907187","type":"story","status":"publish","title_hn":"पंचायत-निकायों के अधीन करने का फैसला मंजूर नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पंचायत-निकायों के अधीन करने का फैसला मंजूर नहीं
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कठुआ। पंचायत और निकायों के अधीन करने के राज्यपाल के फैसले के संदर्भ में आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्पर्स में रोष है।
सोमवार को आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्पर्स यूनियन की ओर से आदेश का विरोध करते हुए नारेबाजी की।
वहीं, ड्रीमलैंड पार्क से जिला सचिवालय तक रोष रैली निकालते हुए सरकार से फैसले को वापस लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों में शामिल रेणुका जसरोटिया ने सरकार के फैसले को आंगनबाड़ी वर्करों के विरुद्ध बताते हुए कहा कि यह फैसला मंजूर नहीं है। पूर्व में जारी किए गए पंचायतों और निकायों द्वारा राशन जारी करने का आदेश मंजूर है। मगर आंगनबाड़ी कर्मियों का वेतन पंचों, सरपंचों और पार्षदों द्वारा जारी करने का फैसला मंजूर नहीं है।
उन्होंने राज्यपाल से इस आदेश को वापस लेते हुए वेतन पूर्व की तरह विभाग की ओर से जारी करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पांच माह से मानदेय नहीं मिला है, जिस कारण वह आर्थिक तंगी का सामना कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा उनके वेतन में पांच सौ रुपये की बढ़ोतरी की थी, जो अभी तक जारी नहीं हुई है।
विज्ञापन
सोमवार को आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्पर्स यूनियन की ओर से आदेश का विरोध करते हुए नारेबाजी की।
वहीं, ड्रीमलैंड पार्क से जिला सचिवालय तक रोष रैली निकालते हुए सरकार से फैसले को वापस लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों में शामिल रेणुका जसरोटिया ने सरकार के फैसले को आंगनबाड़ी वर्करों के विरुद्ध बताते हुए कहा कि यह फैसला मंजूर नहीं है। पूर्व में जारी किए गए पंचायतों और निकायों द्वारा राशन जारी करने का आदेश मंजूर है। मगर आंगनबाड़ी कर्मियों का वेतन पंचों, सरपंचों और पार्षदों द्वारा जारी करने का फैसला मंजूर नहीं है।
उन्होंने राज्यपाल से इस आदेश को वापस लेते हुए वेतन पूर्व की तरह विभाग की ओर से जारी करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पांच माह से मानदेय नहीं मिला है, जिस कारण वह आर्थिक तंगी का सामना कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा उनके वेतन में पांच सौ रुपये की बढ़ोतरी की थी, जो अभी तक जारी नहीं हुई है।
विज्ञापन