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सीआईसी और एमआईएस आपरेटरों ने एडीडीसी पर लगाए गंभीर आरोप

Jammu and Kashmir Bureau जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
Updated Wed, 15 Sep 2021 12:35 AM IST
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प्रशासन द्वारा तबादले के आदेश दिए जाने का विरोध करते ग्रामीण विकास विभाग के सीआईसी व एमआईएस आपरे?
प्रशासन द्वारा तबादले के आदेश दिए जाने का विरोध करते ग्रामीण विकास विभाग के सीआईसी व एमआईएस आपरे? - फोटो : KATHUA
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कठुआ। सीआईसी और एमआईएस ऑपरेटरों ने कठुआ के एडीडीसी पर तानाशाह रवैया, पक्षपात और बदसलूकी के गंभीर आरोप लगाए हैं। इसके लिए उन्होंने मंगलवार को एक पत्रकार वार्ता का आयोजन किया।
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उन्होंने कहा है कि कुछ चहेते कर्मचारियों को बचाते हुए एडीडीसी जानबूझकर कुछ कर्मचारियों को निशाना बना रहे हैं। सीआईसी ऑपरेटर सुरेंद्र गुप्ता ने कहा कि सीआईसी ऑपरेटर केंद्र और प्रदेश प्रायोजित योजनाओं पर काम कर रहे हैं। गत सोमवार शाम चार बजे एक बैठक बुलाई गई, जिसका मकसद विकास योजनाओं की समीक्षा करना था। लेकिन, बैठक में पहुंचने पर अधिकारियों ने कर्मचारियों से उनके ब्लॉक के यूजरनेम और पासवर्ड मांगे गए।

उन्होंने बताया कि अधिकारियों ने जबरन उनसे एक कागज पर हस्ताक्षर करवाए। पूछे जाने पर बताया गया कि उनका तबादला कर दिया गया है। अब अस्थायी नौकरी में तबादला नीति को शामिल कर उसकी अवहेलना की जा रही है। इसका विरोध करने पर अधिकारियों ने कर्मचारियों के साथ बदसलूकी भी की। तीन सौ रुपये दिहाड़ी पर काम करने वाले कर्मचारियों के 20-20 किलोमीटर दूर तबादले कर दिए गए हैं। इतने में ठीक से घर ही चलाना मुश्किल हो रहा था।
सुरेंद्र गुप्ता ने बताया कि अधिकारियों ने कई चहेते कर्मचारियों को वहीं रहने दिया है। वे लोग विभाग में स्थायी हैं, और 15-15 साल से नौकरियां कर रहे हैं। जिनके तबादले हुए हैं उन्हें 15 सितंबर तक नौकरी पर पहुंचने को कहा गया है। अगर कोई ऐसा नहीं करता है, तो उसे निकालने की चेतावनी दी गई है। यह साफ तौर पर तानाशाही रवैया है। उन्होंने उपराज्यपाल से मांग की है कि मामले की विभागीय जांच कराई जाए।
वहीं, एमआईएस ऑपरेटर रॉकी जसरोटिया ने बताया कि उन्हें एक साल पहले कठुआ से डुग्गन स्थानांतरित किया गया था। उन्होंने कहा कि वह 10 हजार वेतन पाते हैं। इतनी कम तनख्वाह पर उन्हें घर से दूर स्थानांतरित तो किया ही गया, साथ ही अकारण जांच भी बैठा दी गई। इसके बाद उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। अदालत ने स्थानांतरण पर रोक लगा दी, लेकिन अधिकारी कोर्ट के आदेश को भी मानने को तैयार नहीं हैं।
रॉकी ने आरोप लगाए कि अधिकारी उनसे जबरन वे काम भी करवाते हैं, जिनके लिए सीआईसी या एमआईएस ऑपरेटर नियुक्त नहीं हुए हैं। जरूर एसीडी ने उपायुक्त को भी गुमराह किया गया है, और तबादलों के आदेश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि छोटे कर्मचारियों के साथ बदसलूकी करने वालों के खिलाफ उपराज्यपाल प्रशासन को कार्रवाई करनी चाहिए।
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जिन कारणों के चलते इन अस्थायी कर्मचारियों का तबादला किया गया है, वे हमारी ओर से जारी किए आदेश में इंगित किए गए हैं।
- पुनीत शर्मा, एडीडीसी, कठुआ

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