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औद्योगिक इकाईयों के बाद आम लोगों को भी झेलना होगा बिजली संकट
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कठुआ। बिजली विभाग ने नार्दन ग्रिड से ओवर ड्रॉ को कम करने के लिए औद्योगिक क्षेत्रों में कटौती तय समय पर शुरू कर दी गई है। उधर, घरेलू कनेक्शनों में भी नवरात्र के बाद बिजली कटौती और बढ़ना तय माना जा रहा है। वर्तमान में एसएलडीसी की ओर से नवरात्र में जीरो कटौती के निर्देश के बाद भी ओवर ड्रॉ से बचने के लिए दो से तीन घंटे की बिजली कटौती की जा रही है। कई इलाकों में कटौती इससे भी ज्यादा हो रही है।
बिजली विभाग की ओर से पूववर्ती शेड्यूल के अनुसार शहरी इलाकों में चार घंटे और ग्रामीण इलाकों में छह घंटे तक बिजली कटौती की जाती है। लेकिन लगातार प्रदेश में बिजली संकट के बीच ऐसा माना जा रहा है कि शहरी इलाकों में नवरात्र के बाद आठ घंटे तक और ग्रामीण इलाकों में दस घंटे तक बिजली कटौती की जा सकती है। ऐसा तब है जबकि पारा 40 डिग्री सेल्सियस तक ही पहुंच पाया है। फिलहाल एसी, कूलर आदि की बिजली खपत नहीं हुई है। जिससे विभाग की चिंता और भी बढ़ गई है। प्रदेश सरकार को ओवर ड्रॉ से बचना इसलिए भी जरूरी है चूंकि आम तौर पर मिलने वाली नार्दन ग्रिड से बिजली के रेट से ओवर ड्रॉ का रेट कई गुना अधिक होता है। ऐसे में पहले से ही घाटे में चल रहे बिजली विभाग पर यह दोहरी मार होगी।
उधर, औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली कटौती के शेड्यूल के बाद कामकाज प्रभावित होना लगा है। जनरेटर के सहारे फिलहाल काम चलाया जा रहा है। कई जगह तो इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ने लगा है।
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बिजली विभाग की ओर से पूववर्ती शेड्यूल के अनुसार शहरी इलाकों में चार घंटे और ग्रामीण इलाकों में छह घंटे तक बिजली कटौती की जाती है। लेकिन लगातार प्रदेश में बिजली संकट के बीच ऐसा माना जा रहा है कि शहरी इलाकों में नवरात्र के बाद आठ घंटे तक और ग्रामीण इलाकों में दस घंटे तक बिजली कटौती की जा सकती है। ऐसा तब है जबकि पारा 40 डिग्री सेल्सियस तक ही पहुंच पाया है। फिलहाल एसी, कूलर आदि की बिजली खपत नहीं हुई है। जिससे विभाग की चिंता और भी बढ़ गई है। प्रदेश सरकार को ओवर ड्रॉ से बचना इसलिए भी जरूरी है चूंकि आम तौर पर मिलने वाली नार्दन ग्रिड से बिजली के रेट से ओवर ड्रॉ का रेट कई गुना अधिक होता है। ऐसे में पहले से ही घाटे में चल रहे बिजली विभाग पर यह दोहरी मार होगी।
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उधर, औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली कटौती के शेड्यूल के बाद कामकाज प्रभावित होना लगा है। जनरेटर के सहारे फिलहाल काम चलाया जा रहा है। कई जगह तो इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ने लगा है।
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