{"_id":"28-42310","slug":"Kathua-42310-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"मैदानी इलाकों में वन्यजीवों की दस्तक से दहशत ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मैदानी इलाकों में वन्यजीवों की दस्तक से दहशत
Kathua
Updated Mon, 30 Dec 2013 05:47 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कठुआ/बसोहली। पहाड़ों पर बर्फबारी के बाद वन्यजीवों का रुख मैदानी इलाकों की ओर होने लगा है। हाल के दिनों में जहां बनी, बसोहली और बिलावर में वन्य जीवों के हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं, वहीं निचले इलाकों में भी वन्य जीव देखे जाने की सूचनाएं बढ़ने लगी हैं। ऐसे में आबादी वाले इलाकों में वन्य जीवों के हमलों की घटनाएं परेशानी का सबब बन गई हैं।
जिले के दर्जनों पंचायतों में वन्य जीव देखे जाने की सूचनाओं से लोग दहशत में हैं। इस बीच कुछेक स्थानों पर तो तेंदुए के हमले लगातार हो रहे हैं। खासकर वन क्षेत्र से सटे इलाके खासे प्रभावित हैं। वन्य जीव विभाग के आंकड़े बताते हैं कि सर्दी के सीजन में वन्य जीवों के आबादी वाले इलाकों में हमले ज्यादा हो जाते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह पर्वतीय इलाकों में बर्फबारी होती है। वन्य जीव विभाग के डीएफओ सलीम उल हक के अनुसार वन क्षेत्र में इंसानी आबादी का दखल होता रहता है। वर्तमान में पर्वतीय इलाके बर्फ से ढंके हैं। ऐसे में वन्य जीव निचले इलाकों का रुख करते हैं। उन्होंने कहा कि स्टाफ को बाकायदा जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। ग्रामीणों को भी सतर्कता बरतने की अपील की जाती है। बसोहली कसबे से सटी पंचायत सैलो पिक्कड़ में भी तेंदुए के हमलों से दहशत है। पिछले पांच दिन से लगातार हो रहे तेंदुओं के हमले में लोगों के मवेशी निशाना बन रहे हैं। बीती देर रात हुए एक और हमले में दो कुत्तों को तेंदुए ने अपना शिकार बनाया। दहशतजदा लोग शाम ढलने के बाद घरों में दुबकने को मजबूर हो गए हैं।
सरपंच जरनैल सिंह ने बताया कि पांच दिन में कई दफा तेंदुआ हमला कर चुका है। इस बाबत संबंधित विभाग को तेंदुआ पकड़ने की गुहार लगाई गई, लेकिन फिलहाल कोई कदम नहीं उठाया जा सका है।
विज्ञापन
सरपंच सहित स्थानीय ग्रामीण भगत राम ने बताया कि तेंदुए के हमले सर्दी के सीजन में यकायक बढ़ गए हैं। एक तरफ जहां मवेशी मारे जा रहे हैं, वहीं स्थानीय ग्रामीणों की भी जान पर बनी हुई है। अब तो इंसानों पर हमले की चिंता सताने लगी है। जल्द वन्य जीव विभाग ने फौरी कार्रवाई नहीं की तो बड़ा हादसा हो सकता है।
विज्ञापन
जिले के दर्जनों पंचायतों में वन्य जीव देखे जाने की सूचनाओं से लोग दहशत में हैं। इस बीच कुछेक स्थानों पर तो तेंदुए के हमले लगातार हो रहे हैं। खासकर वन क्षेत्र से सटे इलाके खासे प्रभावित हैं। वन्य जीव विभाग के आंकड़े बताते हैं कि सर्दी के सीजन में वन्य जीवों के आबादी वाले इलाकों में हमले ज्यादा हो जाते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह पर्वतीय इलाकों में बर्फबारी होती है। वन्य जीव विभाग के डीएफओ सलीम उल हक के अनुसार वन क्षेत्र में इंसानी आबादी का दखल होता रहता है। वर्तमान में पर्वतीय इलाके बर्फ से ढंके हैं। ऐसे में वन्य जीव निचले इलाकों का रुख करते हैं। उन्होंने कहा कि स्टाफ को बाकायदा जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। ग्रामीणों को भी सतर्कता बरतने की अपील की जाती है। बसोहली कसबे से सटी पंचायत सैलो पिक्कड़ में भी तेंदुए के हमलों से दहशत है। पिछले पांच दिन से लगातार हो रहे तेंदुओं के हमले में लोगों के मवेशी निशाना बन रहे हैं। बीती देर रात हुए एक और हमले में दो कुत्तों को तेंदुए ने अपना शिकार बनाया। दहशतजदा लोग शाम ढलने के बाद घरों में दुबकने को मजबूर हो गए हैं।
विज्ञापन
सरपंच जरनैल सिंह ने बताया कि पांच दिन में कई दफा तेंदुआ हमला कर चुका है। इस बाबत संबंधित विभाग को तेंदुआ पकड़ने की गुहार लगाई गई, लेकिन फिलहाल कोई कदम नहीं उठाया जा सका है।
विज्ञापन
सरपंच सहित स्थानीय ग्रामीण भगत राम ने बताया कि तेंदुए के हमले सर्दी के सीजन में यकायक बढ़ गए हैं। एक तरफ जहां मवेशी मारे जा रहे हैं, वहीं स्थानीय ग्रामीणों की भी जान पर बनी हुई है। अब तो इंसानों पर हमले की चिंता सताने लगी है। जल्द वन्य जीव विभाग ने फौरी कार्रवाई नहीं की तो बड़ा हादसा हो सकता है।