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खरोट में छाया पानी का संकट
Kathua
Updated Mon, 12 Nov 2012 12:00 PM IST
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कठुआ। त्योहारी सीजन में निर्बाध बिजली-पानी मुहैया करवाने की व्यवस्थाएं बेमानी साबित हो रही हैं। गौर करें, तो शहर से सटे मॉडल विलेज खरोट में पानी का संकट बना हुआ है।
अपर खरोट में जहां पंचायत के पांच वार्डों के लोग पीने के पानी को लेकर खासे परेशान हैं, वहीं लोअर खरोट की सप्लाई भी गाहे बगाहे प्रभावित चलती है। ऐसे में ग्रामीणाें समेत पंचायत सदस्यों ने भी पीएचई विभाग की कार्यप्रणाली को आड़े हाथों लिया है। सरपंच मोहन सिंह समेत पंच रंदीप सिंह, मनीषा शर्मा, अशोक सिंह, बलवान सिंह ने बताया कि अपर खरोट में स्थित ट्यूबवेल का बूस्टर पंप दो सप्ताह तक खराब रहने के बाद दो दिन पूर्व ही ठीक करवाया गया। दो दिन चलने के बाद बूस्टर पंप फिर से खराब हो गया। ऐसे में पीने के पानी की आपूर्ति पूरी तरह से ठप हो गई है। पंचायत सदस्यों ने कहा कि इससे पूर्व भी ट्यूबवेल से पानी की आपूर्ति करवाने वाली मशीनरी खराब होती रही है। उन्होंने कहा कि पीएचई विभाग के मुख्य अभियंता पीएचई के मीटर लगाने की बात कर रहे हैं, लेकिन पीएचई का तकनीकी विंग खुद ही पंगु है, जो लोगाें को पानी की आपूर्ति तक नहीं करवा पा रहा है। उन्होंने कहा कि बार बार मशीनरी खराब होने से विभाग की कार्यप्रणाली ही शक के घेरे में आ जाती है। विभागीय उच्चाधिकारियाें को इस बात की जांच करवानी चाहिए कि आखिर तकनीकी विंग की मशीनरी में बार-बार खराबी क्यों आती है।
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अपर खरोट में जहां पंचायत के पांच वार्डों के लोग पीने के पानी को लेकर खासे परेशान हैं, वहीं लोअर खरोट की सप्लाई भी गाहे बगाहे प्रभावित चलती है। ऐसे में ग्रामीणाें समेत पंचायत सदस्यों ने भी पीएचई विभाग की कार्यप्रणाली को आड़े हाथों लिया है। सरपंच मोहन सिंह समेत पंच रंदीप सिंह, मनीषा शर्मा, अशोक सिंह, बलवान सिंह ने बताया कि अपर खरोट में स्थित ट्यूबवेल का बूस्टर पंप दो सप्ताह तक खराब रहने के बाद दो दिन पूर्व ही ठीक करवाया गया। दो दिन चलने के बाद बूस्टर पंप फिर से खराब हो गया। ऐसे में पीने के पानी की आपूर्ति पूरी तरह से ठप हो गई है। पंचायत सदस्यों ने कहा कि इससे पूर्व भी ट्यूबवेल से पानी की आपूर्ति करवाने वाली मशीनरी खराब होती रही है। उन्होंने कहा कि पीएचई विभाग के मुख्य अभियंता पीएचई के मीटर लगाने की बात कर रहे हैं, लेकिन पीएचई का तकनीकी विंग खुद ही पंगु है, जो लोगाें को पानी की आपूर्ति तक नहीं करवा पा रहा है। उन्होंने कहा कि बार बार मशीनरी खराब होने से विभाग की कार्यप्रणाली ही शक के घेरे में आ जाती है। विभागीय उच्चाधिकारियाें को इस बात की जांच करवानी चाहिए कि आखिर तकनीकी विंग की मशीनरी में बार-बार खराबी क्यों आती है।
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