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पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी ने किया नये साल का स्वागत
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कठुआ/बिलावर। बनी, मल्हार और बिलावर के पहाड़ों पर साल की पहली बर्फबारी से मैदानों में शीतलहर का प्रकोप बढ़ गया है। बुधवार सुबह बनी के आसपास के इलाकों, बिलावर के मंधार, किंडली, सदरोता, डुगैन आदि में बर्फबारी का सिलसिला शुरू हुआ। इससे मैदानी इलाके भी कड़ाके की सर्दी की चपेट में चले गए हैं। बुधवार को जिला में दो तरह का मौसम देखने को मिला। अंदड़ और कंडी के मैदानी इलाकों में हल्की धूप के बावजूद सर्दी का प्रभाव रहा तो वहीं बिलावर, बसोहली में बादल छाए रहे और हल्की बूंदाबांदी भी दर्ज की गई। बनी और लोहाई मल्हार के इलाकों में बर्फबारी होती रही।
बुधवार को पहाड़ी इलाकों में भारी बर्फबारी के बीच तापमान में भी भारी गिरावट आई है। बनी और मल्हार के इलाकों में दिन का अधिकतम तापमान तीन डिग्री सेल्सियस, जबकि रात का न्यूनतम तापमान माइनस 4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कठुआ में बुधवार को दिन का अधिकतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बिलावर और बसोहली में अधिकतम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस तो वहीं न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस रहा।
जानकारी के अनुसार बुधवार को रुक-रुक कर दिन में दो बार बर्फ के फाहे गिरे तो वहीं रात में भी कई इलाकों में बर्फबारी के आसार बने हुए हैं। बनी के रौलका, सरथल, छत्रगलां, भंडार, भुलाड़ी, ढ़ग्गर, दौला माता समेत डुग्गन के कई अन्य इलाकों में भी नये साल के दूसरे दिन बर्फबारी दर्ज की गई है। ताजा हिमपात के बाद मैदानी क्षेत्रों में भी तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है जिससे पूरा जिला कड़ाके की सर्दी की चपेट में चला गया है। शाम ढ़लते तक एक बार फिर सर्दी ने जोर पकड़ लिया। ठिठुरन बढ़ने के साथ ही बाजारों ने गरम कपड़ों की बिक्री ने जोर पकड़ लिया है। बर्फबारी से किसानों के चेहरे खिले हुए हैं।
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सरसों के फूल देख खिले किसानों के चेहरे
मौसम अनुकूल रहा तो लोहड़ी से पहले शुरू कर देंगे गेहूं की बुआई
अमर उजाला ब्यूरो
बिलावर। उपजिला में सरसों की फसल को लेकर किसान इस इस बार खुश हैं। अधिकतर किसान अपनी फसलों की पैदावार के लिए ज्यादातर बारिशों पर ही निर्भर है। इस बार समय पर हुई बारिश से जहां फसल लहलहा रही है वहीं किसानों के चेहरे की खुशी भी साफ महसूस की जा सकती है। किसान पुरुषोत्तम कुमार, सरदारी लाल, रविंद्र कुमार,और विद्यासागर स्पोलिया आदि ने बताया कि इस बार सरसों की फसल की पैदावार पिछले वर्ष की तुलना में अधिक हुई है। ज्यादातर किसानों ने सरसों की फसल को इकट्ठा कर लिया है और जो थोड़ी बहुत बची है उसको कुछ ही दिनों में वह इकट्ठा कर उसी जगह पर गेहूं की बुआई करेंगे।
उन्होंने बताया कि अगर मौसम अनुकूल रहता है तो वे लोहड़ी से पहले पहले गेहूं की बुआई कर सकते हैं। समय पर अगर बारिश मिल जाती है तो लोहड़ी से पहले गेहूं की फसल की उन्हें पैदावार भी अच्छी मिलेगी। उन्होंने बताया कि पिछले महीनों में हुई ओलावृष्टि और बारिश के चलते जो उनकी धान की फसल बर्बाद हुई थी सरकार ने अभी तक उसका मुआवजा उनको नहीं दिया है। किसानों ने सरकार से मांग की कि जो पिछले दिनों उनकी धान की फसल बर्बाद हुई थी जल्द से जल्द उसका मुआवजा किसानों को दिया जाए।
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बुधवार को पहाड़ी इलाकों में भारी बर्फबारी के बीच तापमान में भी भारी गिरावट आई है। बनी और मल्हार के इलाकों में दिन का अधिकतम तापमान तीन डिग्री सेल्सियस, जबकि रात का न्यूनतम तापमान माइनस 4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कठुआ में बुधवार को दिन का अधिकतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बिलावर और बसोहली में अधिकतम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस तो वहीं न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस रहा।
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जानकारी के अनुसार बुधवार को रुक-रुक कर दिन में दो बार बर्फ के फाहे गिरे तो वहीं रात में भी कई इलाकों में बर्फबारी के आसार बने हुए हैं। बनी के रौलका, सरथल, छत्रगलां, भंडार, भुलाड़ी, ढ़ग्गर, दौला माता समेत डुग्गन के कई अन्य इलाकों में भी नये साल के दूसरे दिन बर्फबारी दर्ज की गई है। ताजा हिमपात के बाद मैदानी क्षेत्रों में भी तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है जिससे पूरा जिला कड़ाके की सर्दी की चपेट में चला गया है। शाम ढ़लते तक एक बार फिर सर्दी ने जोर पकड़ लिया। ठिठुरन बढ़ने के साथ ही बाजारों ने गरम कपड़ों की बिक्री ने जोर पकड़ लिया है। बर्फबारी से किसानों के चेहरे खिले हुए हैं।
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सरसों के फूल देख खिले किसानों के चेहरे
मौसम अनुकूल रहा तो लोहड़ी से पहले शुरू कर देंगे गेहूं की बुआई
अमर उजाला ब्यूरो
बिलावर। उपजिला में सरसों की फसल को लेकर किसान इस इस बार खुश हैं। अधिकतर किसान अपनी फसलों की पैदावार के लिए ज्यादातर बारिशों पर ही निर्भर है। इस बार समय पर हुई बारिश से जहां फसल लहलहा रही है वहीं किसानों के चेहरे की खुशी भी साफ महसूस की जा सकती है। किसान पुरुषोत्तम कुमार, सरदारी लाल, रविंद्र कुमार,और विद्यासागर स्पोलिया आदि ने बताया कि इस बार सरसों की फसल की पैदावार पिछले वर्ष की तुलना में अधिक हुई है। ज्यादातर किसानों ने सरसों की फसल को इकट्ठा कर लिया है और जो थोड़ी बहुत बची है उसको कुछ ही दिनों में वह इकट्ठा कर उसी जगह पर गेहूं की बुआई करेंगे।
उन्होंने बताया कि अगर मौसम अनुकूल रहता है तो वे लोहड़ी से पहले पहले गेहूं की बुआई कर सकते हैं। समय पर अगर बारिश मिल जाती है तो लोहड़ी से पहले गेहूं की फसल की उन्हें पैदावार भी अच्छी मिलेगी। उन्होंने बताया कि पिछले महीनों में हुई ओलावृष्टि और बारिश के चलते जो उनकी धान की फसल बर्बाद हुई थी सरकार ने अभी तक उसका मुआवजा उनको नहीं दिया है। किसानों ने सरकार से मांग की कि जो पिछले दिनों उनकी धान की फसल बर्बाद हुई थी जल्द से जल्द उसका मुआवजा किसानों को दिया जाए।