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साल गुजर गया, रह गए अधूरे सपने

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साल गुजर गया, रह गए अधूरे सपने
कठुआ। वर्ष 2018 के 365 दिन भी गुजर गए, लेकिन जिले की कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं अगले साल के खाते में डाल दी गईं। इसमें से 150 करोड़ की लागत से बनकर तैयार कीड़ियां गंडियाल परियोजना जिले की सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक है। अब इस परियोजना का लाभ 2019 में ही मिलेगा।
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कीड़ियां गंडियाल पुल का निर्माण लगभग एक महीना पहले पूरा कर लिया गया था। बाकायदा दोनों ओर सड़क निर्माण भी अंतिम चरण में है। स्वतंत्रता के दशकों बाद कीड़ियां गंडियाल की एक बड़ी आबादी को इस परियोजना का लाभ मिलना तय है, लेकिन वर्ष 2018 के अंत तक भी यह परियोजना पूरी नहीं हो पाई। कीड़ियां गंडियाल से कठुआ मुख्यालय तक आने के लिए लोगों को पंजाब के इलाके से होकर लगभग तीन से चार घंटे का सफर तय कर आने को मजबूर होना पड़ता था। कीड़ियां गंडियाल पुल के तैयार होने के बाद इन पंचायतों की कठुआ से दूरी मात्र 20 मिनट में पूरी की जा सकेगी।
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इसी तरह से उज्ज मल्टीपर्पज परियोजना जिले के लिए दूसरा मील का पत्थर साबित होने वाला है। 4780 करोड़ की भारी भरकम राशि से राज्य प्रशासनिक काउंसिल द्वारा मंजूर की गई उज्ज मल्टीपर्पज परियोजना को लेकर भी इंतजार अभी कुछ साल और करना पड़ सकता है। पिछले लगभग डेढ़ दशक से यह परियोजना फाइलों तक ही सीमित रही। आखिरकार इस वर्ष राज्यपाल शासन के दौरान परियोजना को एसएसी ने मंजूर कर दिया। 186 मेगावाट बिजली उत्पादन और 31 हजार 380 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई के प्रावधान वाली इस परियोजना में प्रभावितों को किशनगंगा परियोजना की तर्ज पर ही पुनर्वास दिया जाना है।
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पिछले चार वर्षों से लटीक शाहपुर कंडी परियोजना भी आखिरकार केंद्र सरकार की मध्यस्थता के बाद इस वर्ष शुरू हो गई। चार वर्ष पहले इस परियोजना के काम को जम्मू कश्मीर सरकार ने रूकवा दिया था जिसके बाद बातचीत के दौर जारी रही। अक्टूबर माह के बाद से शाहपुर कंडी परियोजना को लेकर मशीनरी हिलना शुरू हो गई और आखिरकार कई वर्षों बाद फिर इस परियोजना के आगे बढ़ने से लोगों की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं।


लखनपुर-बनी-पुल डोडा नेशनल हाईवे और छत्रगलां टनल
3500 करोड़ की लागत से छत्रगलां टनल और लखनपुर पुल डोडा नेशनल हाईवे की सैद्धांतिक रूप से घोषणा को लगभग डेढ़ साल बीत गया है। बावजूद इसके वर्ष 2018 के अंत तक भी परियोजना की डीपीआर का काम पूरा नहीं हो पाया है। लखनपुर से बसोहली, बनी, भद्रवाह और पुल डोडा को जोड़ने वाले इस नेशनल हाईवे से क्षेत्र के विकास की राहें और पर्यटन के साथ साथ रोजगार की संभावनाएं भी रूकी हुई हैं। फिलहाल ग्रेफ बनी भद्रवाह सड़क विस्तारीकरण का काम जारी रखे हुए है जिसे भी अभी पूरा होने में दो से तीन साल और लगने की संभावना है।


मेडिकल कॉलेज और इंजीनियरिंग कॉलेज
कठुआ मेडिकल कॉलेज को लेकर घोषणा भले ही कई साल पहले हो चुकी हो लेकिन इमारत को काम इस वर्ष के अंत तक भी पूरा नहीं हुआ है। उम्मीद है कि वर्ष 2019 में यह काम पूरा होगा। ऐसे में कठुआ मेडिकल कॉलेज की सौ सीटों को महात्मा गांधी अस्पताल में लगाए जाने की योजना थी जो इस साल के अंत तक भी परवान नहीं चढ़ पाई है। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की इंस्पेक्शन के बाद ही यह साफ हो पाएगा की अगले सत्र से कठुआ मेडिकल कॉलेज की कक्षाएं लग भी पाती हैं या नहीं। इंजीनियरिंग कॉलेज कठुआ की अपनी इमारत में कक्षाएं शुरू हो पाना भी इस वर्ष मुनासिब नहीं हो पाया है। वर्तमान में जम्मू में ही इंजीनियरिंग कॉलेज की कक्षाएं चल रही हैं लिहाजा क्षेत्र के युवाओं को इस योजना को भी अपने इलाके में लाभ नहीं मिल पाया है।


इंटर स्टेट बस स्टॉप
पिछले तीन साल से कुछ ही महीनों में इंटर स्टेट बस स्टॉप को सक्रिय किए जाने के मंत्रियों से लेकर नेताओं ने भी दावे किए, लेकिन वर्ष 2018 के अंत तक भी काम पूरा नहीं हुआ। न ही इंटर स्टेट बसें यहां रुकती हैं और न ही इसे सक्रिय करने को लेकर कवायद शुरू हो पाई है। चींटी चाल से चल रहे काम में फंड का अभाव आड़े आता रहा है।

दियालाचक-उधमपुर और लखनपुर बसोहली नेशनल हाईवे
सैद्धांतिक रूप से मंजूर हुए दियालाचक-उधमपुरऔर लखनपुर बसोहली नेशनल हाईवे की डीपीआर प्रक्रिया को पूरा हुए एक साल बीतने को आया है, लेकिन इन परियोजनाओं का काम भी इस वर्ष शुरू नहीं हो पाया है। हैरत की बात है कि दियालाचक उधमपुर नेशनल हाईवे जहां घाटी के लिए वैकल्पिक रूट है वहीं इस मार्ग के विस्तारीकरण को लेकर दशकों से लोग मांग करते आए हैं।

बार्डर पर बंकर बनाने की परियोजना
भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तनाव एक बार फिर बढ़ चुका है। पाकिस्तान की ओर से पिछले एक दशक में लगातार होती रही गोलाबारी से ग्रामीणों को राहत के लिए बंकर बनाने की योजना वादे के तीन साल बाद 2018 में शुरू तो हुई लेकिन आधी अधूरी ही रही। जहां काम शुरू हुआ वहां खत्म नहीं हो रहा। जमीनी स्तर पर सर्वे न किए जाने से लोगों को इसका उचित लाभ मिलता भी नजर नहीं आ रहा है।


तरनाह नाले पर पुल का काम
करीब तीन वर्ष पहले तरनाह नाले पर पुल का निर्माण कार्य शुरू हुआ। लोगों को बताया गया कि वर्ष 2018 में इसे पूरा तैयार कर दिया जाएगा। लेकिन अभी तक केवल 60 प्रतिशत काम ही हुआ है। बीच में कुछ समय के लिए इस काम को बंद भी किया गया। जिसके बाद लोगों ने विरोध प्रदर्शन किए और डीसी कठुआ को इसकी जानकारी दी। उसके बाद यह कार्य फिर से शुरू किया गया। यह कार्य पूरा होता है तो करीब दो दर्जन सीमावर्ती गांव तहसील मुख्यालय से सीधा जुड़ेंगे।
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