{"_id":"5cd873ffbdec2207402ea969","slug":"151557689343-kathua-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पीएचसी में डाक्टर न होने से रोषित लोगों ने किया प्रदर्शन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पीएचसी में डाक्टर न होने से रोषित लोगों ने किया प्रदर्शन
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कठुआ। तहसील बनी की सबसे पुरानी पीएचसी कोटी चंडीयार में डॉक्टर न होने से लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही दो कमरों में पीएचसी का कामकाज होने के कारण आ रही परेशानियों के विरोध में लोगों ने रविवार को स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ रोष प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि तहसील की सबसे पुरानी पीएससी होने के बावजूद अभी तक पीएचसी को केवल दो ही कमरों में चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे में कई बार दिक्कतें खड़ी हो जाती है। उनका कामकाज सही से नहीं चल पा रहा है। ऐसे में कमरों की संख्या में इजाफा किया जाना चाहिए ताकि लोगों को सही से सुविधा मिल सके। उन्होंने कहा कि इस समय में कोई भी डॉक्टर नहीं है बाकी स्टाफ है लेकिन डाक्टर की कमी के कारण लोगों को परेशान होना पड़ता है। कुछ दिन पहले एक महिला गिरकर घायल हो गई थी जिसे टांके लगाए जाने थे, लेकिन डाक्टर न होने के कारण से 15 किलोमीटर दूर दूसरे स्थान पर जाकर इलाज करवाना पड़ा। उन्होंने कहा कि पहले डॉ. रामेश्वर सिंह इस पीएससी में काम करते थे। लेकिन एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल के बाद से वह यहां नहीं आए हैं। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि उस डॉक्टर को फिर से उनकी पीएचसी में तैनात किया जाए ताकि पहले की तरह ही सही तरीके से पीएचसी का कामकाज चल सके और लोगों को बेहतर इलाज मिल सके।
विज्ञापन
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि तहसील की सबसे पुरानी पीएससी होने के बावजूद अभी तक पीएचसी को केवल दो ही कमरों में चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे में कई बार दिक्कतें खड़ी हो जाती है। उनका कामकाज सही से नहीं चल पा रहा है। ऐसे में कमरों की संख्या में इजाफा किया जाना चाहिए ताकि लोगों को सही से सुविधा मिल सके। उन्होंने कहा कि इस समय में कोई भी डॉक्टर नहीं है बाकी स्टाफ है लेकिन डाक्टर की कमी के कारण लोगों को परेशान होना पड़ता है। कुछ दिन पहले एक महिला गिरकर घायल हो गई थी जिसे टांके लगाए जाने थे, लेकिन डाक्टर न होने के कारण से 15 किलोमीटर दूर दूसरे स्थान पर जाकर इलाज करवाना पड़ा। उन्होंने कहा कि पहले डॉ. रामेश्वर सिंह इस पीएससी में काम करते थे। लेकिन एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल के बाद से वह यहां नहीं आए हैं। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि उस डॉक्टर को फिर से उनकी पीएचसी में तैनात किया जाए ताकि पहले की तरह ही सही तरीके से पीएचसी का कामकाज चल सके और लोगों को बेहतर इलाज मिल सके।
विज्ञापन