{"_id":"5ccf4795bdec22076f51038f","slug":"11557088149-kathua-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गुरु के बिना ज्ञान नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गुरु के बिना ज्ञान नहीं
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कठुआ। ब्राह्मण सभा में परशुराम जयंती समारोह के तहत कथा जारी है। दूसरे दिन रविवार को गंगाधर महाराज ने प्रवचनों से संगत को निहाल किया। रविवार को भारी संख्या में कथा सुनने के लिए पहुंची संगत को उन्होंने गुरु की महिमा का बखान कर बताया।
कथा वाचक ने बताया कि जीवन में मनुष्य कुछ भी प्राप्त कर सकता है, लेकिन इसके लिए उसे सही दिशा और मार्ग दर्शन की आवश्यकता होती है। इसके लिए गुरु की आवश्यकता होती है। ऐसे में हर व्यक्ति को जीवन में एक गुरु जरूर बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर किसी का गुरु नहीं है, तो उसे जीवन में सही मार्ग दर्शन और दिशा के लिए सालों भटकना पड़ सकता है। भगवान राम और कृष्ण ने भी गुरु से शिक्षा दीक्षा प्राप्त की और पूरे समाज में परिवर्तन लाए। ज्ञान पाने के लिए गुरु जरूरी है। ऐसे में एक काबिल गुरु की पहचान कर उससे जीवन का मोल और जीवन की दिशा का ज्ञान लेना चाहिए। एक काबिल गुरु ही किसी व्यक्ति को धर्म मार्ग का ज्ञान दे सकता है। परशुराम को भी भगवान का दर्जा पाने के लिए गुरु की आवश्यकता पड़ी। भगवान शिव ने उन्हें शस्त्र का ज्ञान दिया, जिसके बाद उन्होंने समाज में धर्म स्थापित करने के लिए 21 बार अधर्मी लोगों का विनाश किया। इसके बाद लोगों ने कीर्तन भजन कर समय व्यतीत किया। बाद में प्रसाद ग्रहण करने के साथ ही लोग घरों को लौटे।
विज्ञापन
कथा वाचक ने बताया कि जीवन में मनुष्य कुछ भी प्राप्त कर सकता है, लेकिन इसके लिए उसे सही दिशा और मार्ग दर्शन की आवश्यकता होती है। इसके लिए गुरु की आवश्यकता होती है। ऐसे में हर व्यक्ति को जीवन में एक गुरु जरूर बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर किसी का गुरु नहीं है, तो उसे जीवन में सही मार्ग दर्शन और दिशा के लिए सालों भटकना पड़ सकता है। भगवान राम और कृष्ण ने भी गुरु से शिक्षा दीक्षा प्राप्त की और पूरे समाज में परिवर्तन लाए। ज्ञान पाने के लिए गुरु जरूरी है। ऐसे में एक काबिल गुरु की पहचान कर उससे जीवन का मोल और जीवन की दिशा का ज्ञान लेना चाहिए। एक काबिल गुरु ही किसी व्यक्ति को धर्म मार्ग का ज्ञान दे सकता है। परशुराम को भी भगवान का दर्जा पाने के लिए गुरु की आवश्यकता पड़ी। भगवान शिव ने उन्हें शस्त्र का ज्ञान दिया, जिसके बाद उन्होंने समाज में धर्म स्थापित करने के लिए 21 बार अधर्मी लोगों का विनाश किया। इसके बाद लोगों ने कीर्तन भजन कर समय व्यतीत किया। बाद में प्रसाद ग्रहण करने के साथ ही लोग घरों को लौटे।
विज्ञापन