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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   JK delimitation commission Draft report can be publicise next week

परिसीमन आयोग: अगले सप्ताह सार्वजनिक हो सकती है मसौदा रिपोर्ट, भाजपा ने भेजे सुझाव, नेकां का विरोध

Sat, 05 Mar 2022 09:46 AM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Sat, 05 Mar 2022 09:46 AM IST
सार

प्रदेश में परिसीमन आयोग अगले सप्ताह लोगों से आपत्ति व सुझाव लेने के लिए मसौदा रिपोर्ट को सार्वजनिक कर सकता हैं।
 

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JK delimitation commission Draft report can be publicise next week
परिसीमन आयोग की बैठक (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

विस्तार

जम्मू कश्मीर में परिसीमन आयोग की मसौदा रिपोर्ट अगले सप्ताह लोगों से आपत्ति व सुझाव लेने के लिए सार्वजनिक की जा सकती है। भाजपा के दो सांसदों डॉ. जितेंद्र सिंह व जुगल किशोर शर्मा ने कोई आपत्ति नहीं जताई हैं। हालांकि, कुछ सुझाव जरूर भेजे हैं। मसौदा रिपोर्ट पर पहले भाजपा की तरफ से दिए गए सुझाव के तहत जम्मू जिले में सुचेतगढ़ विधानसभा सीट को संशोधित रिपोर्ट में बहाल किया गया। लेकिन इस सीट को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया हैं। अब जाट बिरादरी को भी किसी सीट पर प्रतिनिधित्व देने का सुझाव दिया गया हैं।

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इसके अलावा अखनूर व खौड़ विधानसभा सीटों के कुछ क्षेत्रों को लेकर भी सुझाव दिए गए हैं। सांसद जुगल किशोर शर्मा ने कुछ सुझाव भेजे जाने की पुष्टि की हैं। उनका कहना हैं कि परिसीमन आयोग ने मसौदा रिपोर्ट को तैयार करने में काफी बेहतर कार्य किया है। उल्लेखनीय हैं कि केंद्र सरकार ने परिसीमन आयोग का कार्यकाल बढ़ाकर अब छह मई 2022 तक किया हुआ हैं। ऐसे में अगले सप्ताह लोगों से आपत्ति व सुझाव लेने के लिए मसौदा रिपोर्ट को सार्वजनिक कर सकता हैं।
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नेकां ने 18 पेज की आपत्तियां दर्ज करवाईं
परिसीमन आयोग के एसोसिएट सदस्यों में नेकां अध्यक्ष व सांसद डॉ. फारूक अब्दुल्ला, सांसद मोहम्मद अकबर लोन और सांसद हसनैन मसूदी की ओर से शुक्रवार को नई दिल्ली के अशोका होटल में परिसीमन आयोग के समक्ष संशोधित अंतरिम रिपोर्ट के खिलाफ 18 पेज की आपत्तियां दर्ज करवाई गई हैं।
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मसूदी ने बताया कि आपत्तियों में कहा गया है कि परिसीमन की प्रक्रिया संविधान के तहत नहीं की गई है। जम्मू कश्मीर पुनर्गठन का मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है और परिसीमन की प्रक्रिया उसी के तहत की जानी है। जबकि न्यायालय की ओर से अभी कोई फैसला नहीं आया है, लिहाजा परिसीमन की प्रक्रिया भी गलत है। इसके साथ परिसीमन प्रक्रिया को जनसंख्या, भौगोलिक स्थिति, लोगों की सुविधाओं आदि को ध्यान में रखकर किया जाता है, लेकिन परिसीमन की अंतरिम रिपोर्ट इन मानकों को दरकिनार किया गया है। हम देश की उन्नति, भाईचारा चाहते हैं, लेकिन जम्मू कश्मीर के हितों से भी कोई समझौता नहीं किया जाएगा।


प्रक्रिया में मूलमंत्रों की अनदेखी की गई: नेकां
जम्मू और कश्मीर की भौगोलिक स्थिति और वातावरण अलग-अलग है, जबकि नए निर्वाचन क्षेत्रों में जम्मू और कश्मीर के ही कुछ हिस्सों को जोड़ दिया गया है, जो लोगों के साथ अन्याय है। नेकां इस परिसीमन रिपोर्ट का विरोध करती है। इस सारी प्रक्रिया में मूलमंत्रों की अनदेखी की गई है। देश में कहीं भी इस तरह से परिसीमन की प्रक्रिया नहीं की गई है। कई पुराने निर्वाचन क्षेत्रों को नए क्षेत्रों में जोड़ने की कोशिश की जा रही है। जिससे लोगों को न्याय नहीं मिल पाएगा। रिपोर्ट में कई ऐसे क्षेत्र हैं जो नए निर्वाचन क्षेत्रों से लंबी दूरी पर स्थित है, ऐसे में वहां के लोगों की समस्याएं कैसे हल होंगी।



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