{"_id":"617a412243e32f0e7a036381","slug":"jammu-kashmir-the-condition-of-classes-in-46-percent-government-schools-is-poor-the-facts-came-out-in-the-unesco-report","type":"story","status":"publish","title_hn":"जम्मू-कश्मीर: 46 फीसदी सरकारी स्कूलों में कक्षाओं की हालत खस्ता, यूनेस्को की रिपोर्ट में तथ्य आया सामने","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जम्मू-कश्मीर: 46 फीसदी सरकारी स्कूलों में कक्षाओं की हालत खस्ता, यूनेस्को की रिपोर्ट में तथ्य आया सामने
Thu, 28 Oct 2021 11:50 AM IST
करिश्मा चिब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: करिश्मा चिब
Updated Thu, 28 Oct 2021 11:50 AM IST
सार
जम्मू-कश्मीर के 79 फीसदी स्कूलों में पुस्तकें मुहैया कराई जाती हैं। स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की काफी कमी है। यूनेस्को की ओर से जारी रिपोर्ट में यह बात समाने आई है।
विज्ञापन
सरकारी स्कूल की दीवार में दरार (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जम्मू-कश्मीर के 29708 सरकारी स्कूलों में से 46 फीसदी यानी 16042 ऐसे स्कूल हैं, जिनमें कक्षाओं की स्थिति खस्ता है। केवल 56 फीसदी ही ऐसे स्कूल हैं, जिसमें कक्षाओं की स्थिति अच्छी पाई गई है। यह तथ्य देशभर के स्कूलों को लेकर यूनेस्को की ओर से जारी रिपोर्ट में सामने आए हैं।
विज्ञापन
प्रदेश के सरकारी स्कूलों की स्थिति काफी खराब है। स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की काफी कमी है। यूनेस्को की ओर से जारी रिपोर्ट में यह बात समाने आई है। सरकारी स्कूलों में कक्षाओं की स्थिति काफी खराब है। कक्षाओं में बैठने के लिए डेस्क, फैन, स्मार्ट बोर्ड आदि की कमी है। अच्छी स्थिति वाली कक्षाओं के मामले में पड़ोसी राज्य हिमाचल 58 फीसदी और 68 फीसदी है।
विज्ञापन
प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में कक्षाओं की स्थिति ज्यादा खराब है, जिसके कारण अभिभाव बच्चों को निजी स्कूलों में भेजने के लिए मजबूर हैं। रिपोर्ट में सामने आया है कि प्रदेश के 79 फीसदी स्कूलों में निशुल्क पुस्तकें मुहैया करवाई जाती हैं।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें- जम्मू-कश्मीर: भारतीय सेना के श्रीनगर पहुंचने के 74 साल पूरे होने का मनाया जश्न, लड़ाकू विमानों ने दिखाया दमखम, देखिए तस्वीरें
स्कूल शिक्षा विभाग स्कूलों की स्थिति में सुधार को लेकर कितना गंभीर है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से मंजूर 24 मॉडल स्कूलों के लिए जारी किए गए 44.13 करोड़ रुपये को दस साल में भी खर्च नहीं किए गए और सरकार को यह राशि ब्याज सहित लौटने को कहा था।