दुश्मनों की नहीं, अपनों की जान ले रहे जवान
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कश्मीर घाटी में तैनात सेना के जवानों पर तनाव फिर हावी हो रहा है। इस तनाव में जवान आत्महत्या ही नहीं, साथियों तक की हत्या को अंजाम दे रहे हैं।
सेंट्रल कश्मीर के बडगाम स्थित कैंप धरमुना में शुक्रवार को सेना के सूबेदार ने गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी, जबकि बुधवार को ही मनसाबल सोफापोरा में जवान ने अपने ही पांच साथियों को गोलियों से भून दिया था।
पुंछ में भी एक महीने पहले जवान ने खुद को गोली मार ली थी। ट्रांजिट कैंप जम्मू में भी दो जवानों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इनका कारण भी तनाव बताया गया है। ऐसी घटनाओं में पिछले एक महीने से आठ जवानों की मौत हो चुकी है।
तनाव कम करने के प्रयास जारी
सबसे अधिक मामले घाटी में सामने आए हैं। हालांकि, सेना ने अपने जवानों के लिए आर्ट आफ लिविंग और योगा जैसे कार्यक्रम भी शुरू किए हैं, ताकि जवानों में मानसिक तनाव कम हो सके। इसके बावजूद ऐसी घटनाओं में कमी नहीं आई है। इससे सेना के अधिकारी चिंतित हैं।
सैन्य प्रवक्ता के अनुसार जवानों को लगातार छुट्टियां दी जा रही हैं। कई बार घरेलू समस्या के कारण भी जवान खुदकुशी कर लेते है। तनाव कम करने के लिए जवानों के लिए खेल प्रतियोगिताएं कराई जा रही हैं। ड्यूटी पर मोबाइल के इस्तेमाल को लेकर भी पाबंदी लगाई गई है।
तनाव किस तरह से बढ़ रहा है, इसके लिए मनोचिकित्सक जवानों का मेडिकल जांच कर रहे हैं। कई बार इक्का-दुक्का घटनाएं हो जाती हैं और इन घटनाओं को रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं।