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जम्मू-कश्मीर: सीआरपीएफ जवानों के जूतों को नहीं भेद पाएगी कील, कांस्टेबल संतोष ने तैयार किया एंटी स्पाइक सोल

Tue, 22 Mar 2022 12:27 AM IST
अनुराग सक्सेना अजय मीनिया, जम्मू
अजय मीनिया, जम्मू Published by: अनुराग सक्सेना Updated Tue, 22 Mar 2022 12:27 AM IST
सार

कांस्टेबल संतोष कुमार देश के सबसे बड़े अर्द्धसैनिक बल में तकनीकी उपकरण विशेषज्ञ हैं। जम्मू में सीआरपीएफ के 83वें स्थापना दिवस पर भाग लेने पहुंचे संतोष कुमार ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में बताया कि इस सोल का वजन 120 ग्राम है।

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Jammu and Kashmir: Nail will not be able to pierce the shoes of CRPF jawans constable Santosh prepared anti spike sole
एंटी स्पाइक सोल और जूता - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के लिए रिमोट ऑपरेटेड व्हीकल (आरओवी) तैयार करने वाले कांस्टेबल संतोष कुमार कील रोधी सोल (एंटी स्पाइक सोल) भी तैयार किया है। केरल निवासी और दिल्ली में तैनात संतोष कुमार द्वारा तैयार जूते के इस सोल पर कील और कांटे का कोई असर नहीं होता। 300 किलो वजन के दबाव पर भी पांच कीलें या लोहे के कांटे इसे भेद नहीं पाएंगे। सीआरपीएफ इस सोल वाले जूते का नक्सल प्रभावित इलाकों में परीक्षण कर रही है। परीक्षण सफल होने पर नक्सली प्रभावित इलाकों में तैनात सीआरपीएफ जवान इसका इस्तेमाल करेंगे। इस सोल को बनाने में 18 महीने लगे। अब इसे पेटेंट के लिए भेजा गया है।

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जम्मू में सीआरपीएफ के 83वें स्थापना दिवस पर भाग लेने पहुंचे संतोष कुमार ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में बताया कि इस सोल का वजन 120 ग्राम है। इसमें बुलेट प्रूफ जैकेट तैयार करने में प्रयोग होने वाले केवलर फाइबर व एक विशेष धातु का इस्तेमाल किया गया है। इस सोल को किसी भी जूते में फिट किया जा सकता है।

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नक्सली गड्ढा खोदकर कीलें लगा कर घास से ढक देते हैं

देश के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अकसर देखा जाता है कि नक्सली जमीन में एक फीट गहरा गड्ढा खोदकर इसमें लोहे की कीले या कांटे लगा देते हैं। इनको घास या झाड़ियों से ढक दिया जाता है। नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन में गश्त के दौरान अकसर सीआरपीएफ के जवान इस कीलों की चपेट में आकर घायल हो जाते हैं। इससे नक्सली उन पर हमला कर देते हैं।

आईईडी खोजने वाला आरओवी बना चुके हैं संतोष

कांस्टेबल संतोष कुमार ने हाल ही में रिमोट आपरेटेड व्हीकल (आरओवी) तैयार किया है, जो जमीन में दो फीट नीचे दबी आईईडी को ढूंढ कर खुदाई करके बाहर निकालने के बाद 100 मीटरदूर ले जाकर निष्क्रिय कर सकता है।

दिल्ली में तकनीकी उपकरण विशेषज्ञ हैं 

कांस्टेबल संतोष कुमार देश के सबसे बड़े अर्द्धसैनिक बल में तकनीकी उपकरण विशेषज्ञ हैं। उन्होंने बताया कि 2010 में जब दंतेवाड़ा में माओवादी हमला हुआ तो उनकी बटालियन को वहां तैनात किया गया था। वह कुछ ऐसे हथियार बनाना चाहते थे, जिससे हमलों का सामना किया जाए और मुंहतोड़ जवाब दिया जाए। तब उन्होंने मोर्टार से हमला करने को लेकर एक तकनीक तैयार की, जिसकी काफी सराहना की गई। इसके बाद उन्हें दिल्ली बुलाया गया।

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