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जम्मू-कश्मीर: एलओसी पर पाकिस्तान के आगे चट्टान की तरह खड़ा रहा कचरियाल गांव, जानिए पूरी कहानी
Sat, 14 Aug 2021 11:16 PM IST
करिश्मा चिब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: करिश्मा चिब
Updated Sat, 14 Aug 2021 11:16 PM IST
सार
कचरियाल क्षेत्र से रखी जाती है पाकिस्तान के छंब सेक्टर पर नजर। पाकिस्तान छंब सेक्टर से अखनूर, पलांवाला पर कब्जा करने की रचता रहा साजिश। एलओसी के चप्पे चप्पे पर सेना के सतर्क जवानों की नजर।
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भारतीय सेना
- फोटो : निखिल मेहता
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विस्तार
पूरा भारत आजादी के जश्न में डूबा हुआ है। पाकिस्तान इस जश्न में खलल न डाले, इसके लिए भारतीय सेना भी पूरी मुस्तैदी से सीमा पर डटी हुई है। खासतौर पर हमेशा से पाकिस्तान की नजर में रहने वाले पलांवाला सेक्टर के कचरियाल क्षेत्र में सेना की हर पल पाकिस्तान पर नजर है। यह वही क्षेत्र है, जहां से पाकिस्तान ने हर बार घुसकर अखनूर, पलांवाला, राजोरी और पुंछ पर कब्जा करने का प्रयास किया, लेकिन उसे मुंह की खानी पड़ी। कचरियाल में तैनात सेना ने पाकिस्तान को हर बार धूल चटाई।
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जानकारी के अनुसार 1948 में पाकिस्तान ने इस क्षेत्र में घुसने का प्रयास किया, लेकिन उसे खदेड़ दिया गया। इसके बाद पाकिस्तान ने धोखे से 1965 में इस क्षेत्र में घुसने की कोशिश की। पाकिस्तान ने यहां रहने वाले खानाबदोशों को आगे किया और उनके पीछे-पीछे अपनी सेना भेज दी। वह इससे क्षेत्र से आगे जरूर बढ़ा, लेकिन कलीठ के आगे नहीं बढ़ने दिया गया।
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1971 में पाकिस्तान ने फिर से कचरियाल क्षेत्र से भारत के पलांवाला और अखनूर सेक्टर पर कब्जा करने की कोशिश की, लेकिन तब यहां तैनात 10 इन्फेंटरी ब्रिगेड ने पाकिस्तान को ऐसी धूल चटाई कि वह वापस जाने के लिए मजबूर हो गया। यहां तक कि 1971 की जंग में कचरियाल के 10 इन्फेंटरी के जवानों ने अपनी कई पोस्टों को पाकिस्तान से वापस भी लिया। तब मेजर जनरल जसवंत सिंह के हाथ में इन्फेंटरी की कमान थी। 1999 में जब पाकिस्तान कारगिल में जंग हारने लगा तो उसने फिर से इस क्षेत्र में ताबड़तोड़ गोलाबारी करके घुसने की कोशिश की, लेकिन उसको फिर से 10 इन्फेंट्री ने मुंहतोड़ जवाब दिया।
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थ्री लेयर सुरक्षा में पाकिस्तान का घुसना नामुमकिन
इस क्षेत्र में दोनों देशों के बीच मनावर तवी एक सरहद के तौर पर गुजरती है। तवी के उस पार पाकिस्तान का इलाका है और इस पार भारत का, लेकिन तवी के पीछे भारतीय सेना ने दो तरह की फेंसिंग की है, जिससे पाकिस्तान का अब यहां घुसना नामुमकिन है। सेना की चप्पे चप्पे पर नजर है। थ्री लेयर में सेना की तैनाती की गई है, जिससे पाकिस्तान की हर मंशा को मुंहतोड़ जवाब देने का पूरा बंदोबस्त है।
सेना ने पाकिस्तान की हर कोशिश नाकाम की
पलांवाला के रहने वाले हंस राज का कहना है कि पाकिस्तान हमेशा से ही इस सेक्टर पर कब्जा करने का प्रयास करता रहा है, लेकिन उसे 1971 में ऐसा सबक मिला कि इसके बाद उसकी हर कोशिश नाकाम हुई है। सेना की तैनाती काफी मजबूत है।
गांव के ही रमेश लाल का कहना है कि 1971 में पाकिस्तान को सेना ने करारा जवाब दिया। छोटे हथियारों के बावजूद पाकिस्तान को आगे नहीं बढ़ने दिया गया था। अशोक कुमार कहते हैं कि सेना की ओर से सिर्फ सरहद पर ही नहीं, बल्कि गांव में भी कड़ी सुरक्षा है। 2018 तक पाकिस्तान लगातार गोलाबारी कर रहा था, लेकिन अब यहां शांति है।
मेडिकल कैंप: भारतीय सेना ने आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य पर शुक्रवार को कचरियाल में एक मेडिकल कैंप लगाया। यहां कई लोगों ने अपना चेकअप कराया।
इस क्षेत्र में दोनों देशों के बीच मनावर तवी एक सरहद के तौर पर गुजरती है। तवी के उस पार पाकिस्तान का इलाका है और इस पार भारत का, लेकिन तवी के पीछे भारतीय सेना ने दो तरह की फेंसिंग की है, जिससे पाकिस्तान का अब यहां घुसना नामुमकिन है। सेना की चप्पे चप्पे पर नजर है। थ्री लेयर में सेना की तैनाती की गई है, जिससे पाकिस्तान की हर मंशा को मुंहतोड़ जवाब देने का पूरा बंदोबस्त है।
सेना ने पाकिस्तान की हर कोशिश नाकाम की
पलांवाला के रहने वाले हंस राज का कहना है कि पाकिस्तान हमेशा से ही इस सेक्टर पर कब्जा करने का प्रयास करता रहा है, लेकिन उसे 1971 में ऐसा सबक मिला कि इसके बाद उसकी हर कोशिश नाकाम हुई है। सेना की तैनाती काफी मजबूत है।
गांव के ही रमेश लाल का कहना है कि 1971 में पाकिस्तान को सेना ने करारा जवाब दिया। छोटे हथियारों के बावजूद पाकिस्तान को आगे नहीं बढ़ने दिया गया था। अशोक कुमार कहते हैं कि सेना की ओर से सिर्फ सरहद पर ही नहीं, बल्कि गांव में भी कड़ी सुरक्षा है। 2018 तक पाकिस्तान लगातार गोलाबारी कर रहा था, लेकिन अब यहां शांति है।
मेडिकल कैंप: भारतीय सेना ने आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य पर शुक्रवार को कचरियाल में एक मेडिकल कैंप लगाया। यहां कई लोगों ने अपना चेकअप कराया।