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जम्मू-कश्मीर के DGP बोले: 30 साल की हिंसा एकदम से नहीं होगी खत्म, आखिरी बंदूक को शांत करने में लगेगा समय

Sun, 17 Dec 2023 02:29 PM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू और कश्मीर
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू और कश्मीर Published by: विजय पुंडीर Updated Sun, 17 Dec 2023 02:29 PM IST
सार

डीजीपी ने कहा, छात्र पढ़ने के लिए स्कूलों में जा रहे हैं। दुकानें खुली हैं। पर्यटन बढ़ा है। व्यापार और वाणिज्य और औद्योगिक गतिविधियां हैं, जिससे समाज की आय में वृद्धि हुई है। ये सुरक्षा प्रबंधन के बहुत महत्वपूर्ण पहलू हैं। 30 वर्षों की हिंसा अचानक समाप्त नहीं होगी।

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Jammu and Kashmir Director General of Police RR Swain said that 30 years of violence will not end suddenly
डीजीपी आरआर स्वैन - फोटो : पुलिस

विस्तार

प्रदेश में सुरक्षा स्थिति में भारी सुधार हुआ है। हालांकि 30 साल की हिंसा एकदम से खत्म नहीं होगी। आखिरी बंदूक को शांत करने में कुछ समय लगेगा। पुलिस महानिदेशक आरआर स्वैन ने यह बातें पुलिस हेडक्वार्टर (पीएचक्यू) में जन शिकायत निवारण कार्यक्रम के दौरान कहीं। बता दें कि सार्वजनिक शिकायतों का प्रत्यक्ष मूल्यांकन करने के उद्देश्य से डीजीपी द्वारा शुरू किए गए शिकायत निवारण की श्रृंखला में यह चौथा कार्यक्रम था।

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कार्यक्रम के बाद संवाददाताओं को संबोधित करते हुए डीजीपी ने कहा कि कई मापदंडों में स्थिति में सुधार हुआ है। उन्होंने कहा, हम सभी स्वीकार करते हैं कि सड़कों पर व्यवस्था सुरक्षा स्थिति का एक हिस्सा है। जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय ने कहा है कि पथराव आतंकवाद का एक कृत्य है, क्योंकि यहां पथराव का संबंध हमेशा सार्वजनिक सेवाओं जैसे पानी, बिजली, सड़क या खराब प्रशासन या खराब सेवाओं से नहीं था। यह दूसरी चीज़ के बारे में अधिक था। स्वेन ने कहा, इस तरह से देखा जाए तो आज सड़कों पर व्यवस्था है। हर कोई आराम से जिंदगी जी रहा है।
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डीजीपी ने कहा, छात्र पढ़ने के लिए स्कूलों में जा रहे हैं। दुकानें खुली हैं। पर्यटन बढ़ा है। व्यापार और वाणिज्य और औद्योगिक गतिविधियां हैं, जिससे समाज की आय में वृद्धि हुई है। ये सुरक्षा प्रबंधन के बहुत महत्वपूर्ण पहलू हैं। 30 वर्षों की हिंसा अचानक समाप्त नहीं होगी। जैसा कि किसी ने कहा है, आखिरी बंदूक को शांत करने में समय लगेगा।

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पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष जम्मू-कश्मीर की स्थिति में 52 प्रतिशत सुधार की रिपोर्ट के बारे में पूछे जाने पर स्वैन ने कहा कि यह न केवल भौतिकी के बारे में है, बल्कि रसायन विज्ञान के बारे में भी है। उन्होंने कहा, आपने इसमें केवल भौतिकी को गिना है, आपको इसका विश्लेषण रसायन विज्ञान में करना चाहिए, जहां हमने 90 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। हमारे यहां पथराव में शून्य घटनाएं हैं। पथराव के दौरान कितने लोग मारे जाते थे या घायल होते थे। इसमें चाहे सुरक्षाबल हों या नागरिक, आपको इसकी गिनती करनी चाहिए।

डीजीपी स्वैन ने कहा, वह गणित है और आपको उसमें हमें 99 अंक देने होंगे। आप यह 52 प्रतिशत कहां से लेकर आए हैं। हमें और अंक चाहिए। इस सवाल पर कि क्या वे युवा जो पथराव करते थे, जनता दरबार में आते हैं और उन्होंने उनसे क्या कहा। इस पर स्वैन ने कहा कि ऐसा है जनता के जीवन की सुरक्षा के लिए कुछ लोगों पर लगाम कसने की जरूरत है।

उन्होंने कहा, हमें यह जांचना होगा कि क्या वह (पत्थरबाज) अब कुछ अच्छा कर रहा है, ताकि यह कम हो सके। हम जानते हैं कि उसने गलत किया है। हम जांच करते हैं और हर चीज को रिकॉर्ड में रखते हैं। ऐसा नहीं है कि हम चेहरा देखें और फिर निर्णय लें। हम वस्तुनिष्ठ रूप से विवरण में जाते हैं। इसमें एक मैसेजिंग भी है। इस कमरे में हर कोई कहेगा कि हिंसा कम होनी चाहिए, लेकिन कोई यह नहीं बताता कि यह कैसे कम होगी। वे तो यही कहते हैं कि ऐसा मत करो, वैसा मत करो, उसे या किसी और को जाने दो। कितनों को गिरफ्तार करना है, कितनों को छोड़ना है, अंततः मुझे केवल आपकी सुरक्षा की चिंता है। ऐसा करने के लिए कुछ लोगों पर लगाम कसने की जरूरत है। डीजीपी आरआर स्वैन ने कहा कि पुलिस को एहसास है कि वह लोगों के समर्थन के बिना कुछ नहीं कर पाएगी और उन्होंने जनता से सहयोग मांगा।

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