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जम्मू-कश्मीर: श्रीनगर का बशीर निकला बेगुनाह, 11 साल जेल के बाद लौटा घर, जानिए क्या है पूरा मामला
Fri, 02 Jul 2021 05:33 PM IST
करिश्मा चिब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: करिश्मा चिब
Updated Fri, 02 Jul 2021 05:33 PM IST
सार
2010 में अहमदाबाद में एटीएस ने हिजबुल आतंकी के शक में किया था गिरफ्तार। 11 साल तक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद पाया गया बेगुनाह।
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Bashir of Srinagar
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
श्रीनगर के रैनावाड़ी इलाके के रहने वाले बशीर अहमद बाबा (44) के साथ कुछ ऐसा हुआ जो हैरान कर देने वाला है। उसे बिना किसी जुर्म के 11 साल तक आतंकी के ठप्पे के साथ गुजरात की जेल में रहना पड़ा। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अब बेगुनाह साबित हुआ तो घर लौटा। बशीर को इस बात का अफसोस है कि वह पिता की मृत्यु से पहले आखिरी बार उनका चेहरा नहीं देख पाया।
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इग्नू से उर्दू में परा स्नातक करने के बाद बशीर श्रीनगर में एक माया फाउंडेशन स्वयंसेवी संस्था के साथ काम करता था। कंप्यूटर भी चला लेता था। इसलिए उच्च ट्रेनिंग के लिए फाउंडेशन ने बशीर को 2010 में गुजरात भेजने का फैसला किया। नजीर अहमद ने बताया कि उनका भाई माया फाउंडेशन के किमाया क्लेफ्ट सेंटर के लिए कैंप कोर्डिनेटर का काम कर रहा था। क्लेफ्ट लिप के साथ जन्मे बच्चों को ढूंढ़ने और उनके उपचार का काम यह एनजीओ करता था।
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उन्होंने बताया कि 17 फरवरी 2010 में बशीर घर से अहमदाबाद के लिए रवाना हुआ। वहां उसे पहले एक कंप्यूटर सेंटर में ट्रेनिंग लेनी थी और उसके बाद फाउंडेशन के एक और कार्यालय में कुछ महीने काम सीखना था। अहमदाबाद पहुंचने के एक हफ्ते के भीतर ही वह गुजरात एटीएस के हत्थे चढ़ गया। बशीर के साथ एक और व्यक्ति को भी गिरफ्तार किया गया, लेकिन उसको पुलिस ने छोड़ दिया और बशीर का कई दिनों तक इंट्रोगेशन किया गया। लेकिन इस दौरान बशीर को पता ही नहीं था कि उसका जुर्म क्या है और उसको क्यों गिरफ्तार किया गया है।
बशीर ने बताया कि जब जुडिशल रिमांड के लिए ले जाया गया तो उसे पता चला कि एटीएस उसे हिजबुल मुजाहिदीन का आतंकी बता रही थी और उसपर गुजरात में इसी संगठन के लिए रिक्रूटमेंट कराने का आरोप भी लगाया गया। एटीएस ने अपनी चार्जशीट में बशीर को आतंकी रिक्रूटर बताया था और उसके खिलाफ ईपीसी की धारा 120बी और यूएपीए की धारा 16, 17, 18 और 20 के तहत केस दर्ज किया।
11 साल तक लंबी लड़ाई के बाद उसकी बेगुनाही साबित हुई और वह घर लौट आया। बशीर ने कहा कि अफसोस इस बात का है कि उसके पिता इस दिन को नहीं देख सके। उनकी मृत्यु 2017 में हुई और आखिरी समय में भी बशीर अपने पिता का मुंह नहीं देख सका जिसका उससे काफी दुख है।
जेल में की पढ़ाई
बशीर की रिहाई के आदेश गुजरात के वडोदरा के एडिशनल सेशन जज एस नकुम ने सुनाते हुए एटीएस की सारी दलीलों को फर्जी बताया। रिहाई के बाद बशीर अब नई जिंदगी शुरू करना चाहता है। उसने जेल में बीए भी किया और दो एमए भी किए। इसके अलावा कई डिप्लोमा और पीजी डिप्लोमा भी किए।
बशीर ने बताया कि जब जुडिशल रिमांड के लिए ले जाया गया तो उसे पता चला कि एटीएस उसे हिजबुल मुजाहिदीन का आतंकी बता रही थी और उसपर गुजरात में इसी संगठन के लिए रिक्रूटमेंट कराने का आरोप भी लगाया गया। एटीएस ने अपनी चार्जशीट में बशीर को आतंकी रिक्रूटर बताया था और उसके खिलाफ ईपीसी की धारा 120बी और यूएपीए की धारा 16, 17, 18 और 20 के तहत केस दर्ज किया।
11 साल तक लंबी लड़ाई के बाद उसकी बेगुनाही साबित हुई और वह घर लौट आया। बशीर ने कहा कि अफसोस इस बात का है कि उसके पिता इस दिन को नहीं देख सके। उनकी मृत्यु 2017 में हुई और आखिरी समय में भी बशीर अपने पिता का मुंह नहीं देख सका जिसका उससे काफी दुख है।
जेल में की पढ़ाई
बशीर की रिहाई के आदेश गुजरात के वडोदरा के एडिशनल सेशन जज एस नकुम ने सुनाते हुए एटीएस की सारी दलीलों को फर्जी बताया। रिहाई के बाद बशीर अब नई जिंदगी शुरू करना चाहता है। उसने जेल में बीए भी किया और दो एमए भी किए। इसके अलावा कई डिप्लोमा और पीजी डिप्लोमा भी किए।