'कश्मीर युवाओं को आतंकवाद से जोड़ने के लिए गल्फ देशों से आ रहा है पैसा'
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खाड़ी देशों से आने वाला संदिग्ध हवाला का पैसा कश्मीर घाटी में सुरक्षाबलों के लिए मुश्किलें पैदा कर रहा है। ऐसी खबरें आ रही हैं कि इस अवैध धन का उपयोग सदियों पुरानी सूफी परंपरा से नौजवानों को हटाकर उन्हें चरमपंथ की चरफ मोड़ा जा रहा है। कश्मीर घाटी में इस तरह की नई धार्मिक संस्थाएं काम कर रही है।
सुरक्षा एजेंसियों की मानें तो ये संस्थाए ज्यादा युवाओं को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। घाटी के युवाओं के बीच उस धर्म को पेश किया जा रहा है जिस पर आईएसएआईएस और अलकायदा चल रहे हैं। युवाओं के इस रुझान से बहुत से धार्मिक नेता परेशान हैं क्योंकि वे महसूस कर रहे कि घाटी के युवाओं को सदियों पुरानी सूफी परंपरा हटाया को हटाया जा रहा है। ये धार्मिक नेता अपना नाम सार्वजानिक नहीं करना चाहते हैं।
एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने नाम उजागर ना करने की शर्त पर बताया कि पुरानी पीढ़ी के परिवार अपनी पारंपरिक मस्जिदों में इबादत करते हैं। वहीं युवा नए धार्मिक स्थलों पर इबादत करना पंसद करते हैं। जिनका निर्माण कुछ सालों पहले ही हुआ है। नई मस्जिदों के वित्त पर उठते सवालों के बीच सेना पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों का मनना है कि इस सब के लिए खाड़ी देशों के भारी मात्रा में धन राशि कश्मीर घाटी में भेजी जा रही है।
आईएस का झंडा लहराना सिर्फ पब्लिसिटी स्टंट है
फंड को छुपाने के लिए ये राशि को छोटी मात्रा में भेजी जाती है। इसके अलावा हम मानते हैं कि कुछ व्यावसायिक घराने इन देशों में अपनी स्थापना कर रखी है। जहां से वे इन फंड को को भारत भेजते रहते हैं।
वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि, घाटी में पथराव की विभिन्न घटनाओं के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने आईएसआईएस-जेक के झंडों को देखा है। जिन्हें शरारती तत्वों द्वारा लहराया जा रहा है। हालांकि यह एक पब्लिसिटी स्टंट है, लेकिन हम इसे एक ही समय में मिलकर देख रहे हैं।
हाल ही स्थानीय आतंकियों के इस नए ट्रेड को अपनाने की संख्या में खासा उछाल देखा गया है। इस ट्रेड से नई पीढ़ी की मानसिक स्थिति में बदलाव आने से ये युवा ज्यादा प्रतिरोधी बन गए हैं।