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श्रीनगर में अब कुत्ते पैदा कर रहे हैं खौफ़

Wed, 06 Apr 2016 04:50 PM IST
माजिद जहांगीर,श्रीनगर से/बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
माजिद जहांगीर,श्रीनगर से/बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए Updated Wed, 06 Apr 2016 04:50 PM IST
सार

  • साल 2011, 2012 और 2013 में कुत्तों के काटने से आठ लोगों की मौत हुई। यहां हर दिन कुत्तों के काटने के 22-25 मामले आते हैं।
  • 2011 की पशुगणना में श्रीनगर में 90 हज़ार कुत्ते थे जबकि अब ये तादाद घटकर 40 हज़ार हो गई है। 

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Fear of dogs in srinagar
dog attack - फोटो : Demo Pic.

विस्तार

भारत प्रशासित जम्मू कश्मीर के श्रीनगर में कुत्तों की आबादी में कमी आई है, लेकिन कुत्तों के काटने के मामले बढ़े हैं। नेशनल जर्नल ऑफ़ कम्युनिटी मेडिसिन (2014) में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़ श्री महाराजा हरि सिंह अस्पताल के एंटी रेबीज सेंटर में साल 2011, 2012 और 2013 में कुत्तों के काटने से आठ लोगों की मौत हुई। यहां हर दिन कुत्तों के काटने के 22-25 मामले आते हैं।

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अस्पताल में कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के डॉक्टर इनाम उल हक़ बताते हैं, 'साल 2014 में हमारे पास कुत्तों के काटने के 4,917 मामले आए जबकि 2015 में इन मामलों की तादाद बढ़कर 5,764 हो गई।'
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हेल्थ सर्विसेज़ कश्मीर के आंकड़ों के मुताबिक़, कश्मीर और लद्दाख के 13 ज़िलों में पिछले दो साल में 42,106 लोगों को कुत्तों ने काटा। साल 2014 के मुक़ाबले कुत्तों के काटने के मामले 2015 में 2,000 से भी ज़्यादा बढ़ गए हैं।

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कुत्तों की आबादी में कमी आई 

Fear of dogs in srinagar

डॉक्टर इनाम बताते हैं, 'कुत्तों के काटने के मामले बढ़ रहे हैं। ये मामला बहुत गंभीर हो चुका है।' वो बताते हैं कि कुत्तों के काटने के 25 फ़ीसद मामले 10 साल से कम उम्र वाले बच्चों के होते हैं, जो अस्पताल में इलाज कराने आते हैं।

लोगों में कुत्तों के काटने और उनकी बढ़ती आबादी को लेकर गुस्सा है। लेकिन सरकारी स्तर पर इसे लेकर तेज़ी से क़दम नहीं उठाए जा रहे हैं, जिसे सरकारी अधिकारी भी मानते हैं।

श्रीनगर म्युनिसिपल कमेटी के कमिश्नर शौकत अहमद बताते हैं, 'कुत्तों की आबादी में ज़रूर कमी आई है। 2011 की पशुगणना में श्रीनगर में 90 हज़ार कुत्ते थे जबकि अब ये तादाद घटकर 40 हज़ार हो गई है। लेकिन इसके बावजूद जिस रफ्तार से कुत्तों के काटने के मामले कम होने चाहिए, वैसा नहीं हो रहा है। लोग चलने-फिरने में बहुत डर महसूस कर रहे हैं।'

पहले तो हम गोलियों और बम धमाकों से डरते थे, अब नया डर कुत्तों का 

Fear of dogs in srinagar
कुत्ता

कुत्तों के काटने के शिकार हो चुके श्रीनगर निवासी अशफ़ाक़ अहमद बताते हैं, 'अब तो सब्र का पैमाना छलक गया है। मुझे कम से कम पचास कुत्तों ने चारों ओर से घेरा, और अगर मैं इधर-उधर भागता तो वो नोच खाते। सरकार को फ़ौरी तौर पर क़दम उठाने चाहिए। कोई अकेला यहां घर से नहीं निकल पाता है।'

मानवाधिकार आयोग ने 2012 में कुत्तों की समस्या को लेकर म्युनिसिपल कमेटी श्रीनगर को नोटिस भी जारी किया था। आयोग ने कहा था, 'कुत्तों की ओर से किेए आम लोगों पर हमले मानवाधिकारों का उल्लंघन है।'

कश्मीर के सामाजिक कार्यकर्ता ज़रीफ़ अहमद ज़रीफ़ कहते हैं कि पहले तो हम गोलियों और बम धमाकों से डरते थे। लेकिन अब नया डर कुत्तों का है। वो कहते हैं, 'हमने कुत्तों के इस आतंक के ख़िलाफ़ कई बार प्रदर्शन भी किया है। लेकिन सरकार पर उसका कोई असर नहीं हुआ। कुत्तों के हमलों ने सबका जीना हराम किया हुआ है। अब हम ख़ुद ही कुछ करने की सोच रहे हैं।'

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