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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Dogri in jammu-kashmir: Young generation of Duggar carrying forward the legacy of poor writing

जम्मू-कश्मीर में डोगरी: गरी लेखन की विरास्त को आगे बढ़ा रही डुग्गर की युवा पीढ़ी

Wed, 22 Dec 2021 01:24 PM IST
करिश्मा चिब अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: करिश्मा चिब Updated Wed, 22 Dec 2021 01:24 PM IST
सार

पुस्तक लेखने के साथ-साथ सरोज बाला जम्मू-कश्मीर कला संस्कृति और भाषा अकादमी की ओर से प्रकाशित होने वाली पुस्तक शिराजा के लिए भी लिखती है।

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Dogri in jammu-kashmir: Young generation of Duggar carrying forward the legacy of poor writing
सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

डोगरी भाषा के उत्थान को लेकर प्रदेश सरकार की निराशाजनक नीतियों के बावजूद डोगरी लेखन की विरास्त को डुग्गर पद्रेश की युवा पीढ़ी आगे बढ़ा रही है। कम संसाधनों के अभाव के बीच युवा पीढ़ी डोगरी लेखन के कारवां सोशल मीडिया जैसे प्लेटफार्म के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने में भी लगी हुई है। कठुआ जिले के गांव रिज्जू की रहने वाली युवा डोगरी लेखिका सरोज बाला डोगरी भाषा की उभरती हुई लेखिका है। उनकी डोगरी कहानी संग्रह सोचै दी गैहराई उनके कुशल लेखन की पहचान भी है।
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पुस्तक में लघु कथाएं है जो बेरोजगारी, परिवारक परेशानी, महिलाओं की परेशानियों के बारे में बताती है। पुस्तक लेखने के साथ-साथ सरोज बाला जम्मू-कश्मीर कला संस्कृति और भाषा अकादमी की ओर से प्रकाशित होने वाली पुस्तक शिराजा के लिए भी लिखती है। सरोज बाला ने महसूर के किले, अमर पैलेस, बसोली पेंटिंग सहित अन्य विरास्त स्थलों के उपर डोगरी में संस्मरण लिखे ताकि युवा पीढ़ी में अपने मातृभाषा इन विरास्त स्थलों की जानकारी मिल सके।
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उन्होंने कहा कि बसोली पेंटिंग में प्रकृति रंगों का उपयोग होता है और विषय में बड़ी सूंदरता से बयां करती है। उन्होंने कहा कि वह सोशल मीडिया के माध्यम से डोगरी लेखकों से जुड़ी जानकारी लोगों तक भी पहुंच रही है। सरोज बाला अपने डोगरी कहानी संग्रह सोचे दी गैहराई के लिए कुवर वियोगी युवा पुरस्कार और हिंदी काव्य संग्रह प्रकृति की गौद में के लिए मोक्षदायनी गुप्ता गंगा सम्मान मिला है। 2020 में युवा उत्सव में भाग लिया है, जहां डोगरी कहानी कही थी।
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