सरहद पर युद्ध जैसे हालात, जवान-किसान जंग को तैयार

रवींद्र श्रीवास्तव/भारत-पाक सीमा Updated Sat, 26 Oct 2013 01:27 AM IST
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conditions like war on border, army ready to fight

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कठुआ जिले के हीरानगर सेक्टर से जम्मू जिले के अखनूर सेक्टर तक फैली 192 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा 42 साल बाद फिर धधक उठी है।
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पांच दिनों में पाकिस्तानी फौज ने भारत की सौ से अधिक अग्रिम चौकियों पर ताबड़तोड़ हमले किए हैं। रिहायशी बस्तियों पर मोर्टार से गोले और राकेट दागे जा रहे हैं।
इसमें पचास से अधिक ग्रामीण और जवान जख्मी हो चुके हैं। 1971 के युद्ध के बाद पहली बार ऐसी अंधाधुंध गोलाबारी हो रही है। उस पार आतंकी सरगना हाफिज सईद लगातार सीमांत इलाकों के दौरे कर रहा है।

केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे भी सीमा पर आकर इस बात की पुष्टि कर चुके हैं कि दो सौ से अधिक आतंकी घुसपैठ के लिए कैंप किए बैठे हैं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनके तमाम वजीर सीमांत गांवों में घूम-घूमकर दहशतजदा लोगों को हिम्मत बंधा रहे हैं।

सरकार की नीति से नाराज जवान
इस बीच हीरानगर, सांबा, आरएसपुरा, कानाचक्क, अखनूर सेक्टर, रामगढ़ और अरनिया सब सेक्टर के सीमांत गांवों के लोगों में गुस्सा है। यहां तैनात जवानों का भी यही हाल है। दोनों ही सरकार की नीति से नाराज हैं।

रिटायर्ड ब्रिगेडियर एसएस सैनी कहते हैं कि हमारे जवानों और किसानों को पाकिस्तान से नहीं अपनी सरकार से डर लगता है। हम उनके एक्शन पर रिएक्शन करके चुप बैठ जाते हैं। वे फिर एक्शन करते हैं, हम फिर रिएक्शन करते हैं जबकि इस समय पहल अपने हाथ में लेने की जरूरत है।

'फिर ऐसी हिमाकत नहीं करेगा पाक'
सीमा पर तैनात जवान भी बातचीत के दौरान कहते हैं कि एक बार हमें छूट मिल जाए तो पाकिस्तान को कुछ ही घंटों में ऐसा सबक सिखा सकते हैं कि वह आने वाले कई सालों तक फिर ऐसी हिमाकत करने की जुर्रत न करें।

उनका कहना हैं कि हमें तो बड़े हथियारों के इस्तेमाल करने की भी इजाजत नहीं मिलती। सीमावर्ती क्षेत्र के ग्रामीणों की भी यही इच्छा है कि अब तो एक बार आरपार हो ही जाए।

ललयाल कैंप में मौजूद 71 की लड़ाई में छंब सेक्टर से विस्थापित हुए 83 वर्षीय जल्लाराम पूरी उम्र जलावतनी में गुजारने का दर्द बयान करते हैं तो अपने आंसुओं को रोक नहीं पाते।

हालात पूरी तरह युद्ध जैसे
उनका कहना है कि हालात पूरी तरह युद्ध जैसे हैं। बस जंग का ऐलान भर बाकी है। पाकिस्तान सुनियोजित रणनीति के तहत अपने सीमांत गांवों को खाली कराकर वहां सेना पहुंचा रहा है। इस पार जान की हिफाजत के लिए पलायन करना मजबूरी है।

इन सबके बीच रामगढ़, पहाड़पुर, विधिपुर, अब्दुलियां, गड़खाल सहित तमाम गांवों में धान की पकी फसल मुरझाने लगी है और किसान उसे काट नहीं पा रहे हैं। स्कूल बंद हैं। फिलहाल मासूम बच्चों, महिलाएं और किसानों के चेहरे पर उगे सवालों के जवाब किसी के पास नहीं हैं।

हजारों ग्रामीण पलायन को मजबूर
पाकिस्तान की ओर से लगातार हो रही गोलाबारी से परेशान और सहमे सीमांत क्षेत्र के ग्रामीणों के आगे अब पलायन के अलावा कोई चारा नहीं है। विभिन्न इलाकों से लगभग डेढ़ हजार लोगों ने फिलहाल फौरी तौर पर सुरक्षित स्थानों पर शरण ले ली है। इस बीच सांबा सेक्टर के सुचेतगढ़ और अखनूर सेक्टर के गडखाल गांवों से पलायन शुरू हो गया है।
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