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वाजपेयी का ये फार्मूला सुलझा देगा कश्मीर की समस्या!

Sun, 15 Dec 2013 08:11 AM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र/ श्रीनगर
राघवेंद्र नारायण मिश्र/ श्रीनगर Updated Sun, 15 Dec 2013 08:11 AM IST
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bajpai formula will solve the kashmir problem!

महबूबा मुफ्ती सईद कश्मीर की उन चुनिंदा महिला नेताओं में शुमार हैं जो अपनी प्रतिभा के लिए पूरे देश में जानी जाती हैं। सियासत भले ही विरासत में मिली हो लेकिन महबूबा ने अपनी संघर्षक्षमता और वाकपटुता से खुद को सक्षम नेत्री के रूप में प्रमाणित किया है।

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सांसद रह चुकीं जम्मू कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के अध्यक्ष महबूबा कहती हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के फामूर्ले से ही कश्मीर समस्या का समाधान संभव है।
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महबूबा ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कश्मीर समस्या के समाधान के लिए ईमानदार कोशिश की थी। तब बस यात्रा शुरू हुई। वह कश्मीर आए तो कोई हड़ताल नहीं हुई। काले झंडे नहीं दिखाए गए। वह इंसानियत की बात कर रहे थे। हुर्रियत के साथ बातचीत भी शुरू हुई। हमारी सरकार पहल कर रही थी और दिल्ली उस रास्ते पर चल रही थी। तब समाधान करीब दिखने लगा था। अब हालात फिर से पीछे खिसक गया। आज वाजपेयी की तरह जुर्रत जरूरी है। रास्ते खोले जाने चाहिए। कश्मीरी अवाम में विश्वास का माहौल बनाना जरूरी है।
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पीडीपी अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी ने अनुच्छेद 370 पर चर्चा की बात कहकर बेवजह तूफान खड़ा कर दिया। इसे हटाना संभव नहीं है। अनुच्छेद 370 ही कश्मीर को पूरे देश से जोड़ता है। यह पुल है। बेहतर होता कि मोदी इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से पहले इसे ठीक से जान लेते। महबूबा ने मोदी के उस आरोप को सही बताया जिसमें उन्होंने रियासत में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की बात कही थी। पीडीपी नेत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार सरकारी संरक्षण की वजह से है न कि अनुच्छेद 370 के कारण। दिल्ली में तो अनुछेद 370 नहीं है लेकिन वहां टू जी, थ्री जी जैसे घोटाले हुए।

उन्होंने कहा कि 1990 में सेना बुलाई गई थी। तब से अबतक तीन चुनाव हो गए। जम्हूरियत कायम है इसलिए अब इसकी समीक्षा होनी चाहिए। कुछ इलाकों से सेना को बैरकों में भेजना शुरू हो। हाल के चुनाव नतीजे बताते हैं कि लोगों का यूपीए सरकार से विश्वास उठ रहा है।


कांग्रेस में युवा नेतृत्व की बात तो हुई लेकिन कुछ खास नहीं बदला। सिर्फ हम जवान हैं, कहने से कुछ नहीं होता। सोच में बदलाव जरूरी है। भ्रष्टाचार का विस्तार नहीं हुआ होता शायद अन्ना नहीं आते। दिल्ली में अरविन्द केजरीवाल को सफलता इसलिए मिली क्योंकि वह ईमानदार दिखते हैं। पहले ईमानदारी के मुद्दे पर जेपी और वीपी सिंह को देश का समर्थन मिल चुका है। केजरीवाल की सफलता को सैल्यूट करना चाहिए। यह लोकतंत्र के लिए सिलेब्रेट करने जैसा है।  कांग्रेस में कोई चेहरा नहीं दिखता जिसपर आम जनता का पूरा भरोसा हो।

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