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सूनी हो गईं सीमा पर गांवों की गलियां
Updated Thu, 04 Jan 2018 08:17 PM IST
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सूनी होने लगीं सीमा पर गांवों की गलियां
घर छोड़कर जाने लगे ग्रामीण, बच्चों और महिलाओं को अपने रिश्तेदारों के यहां भेजा
घरों की दीवारों पर मोर्टार के निशान और गोलियों से छलनी मवेशी बयां कर रहे गोलाबारी का दर्द
अमर उजाला ब्यूरो
कठुआ।
बुधवार रात ग्यारह बजे तक पाकिस्तान की ओर से अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर भारतीय चौकियों और रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया गया। इस दौरान हीरानगर सेक्टर के लौंडी, भाटी मेहरू, करोल माथुरां, बोबिया के गांव में पाकिस्तान की ओर से की गई गोलाबारी के निशान वीरवार को दिखाई दिए। घरों की दिवारों पर मोर्टार के निशान तो छलनी मवेशी पाकिस्तान की ओछी हरकत को बयां कर रहे थे। वीरवार सुबह लोगों ने पाकिस्तान की गोलाबारी से हुई बर्बादी के मंजर को देखा, जिसके बाद से ही लोगों को अंदाजा हो गया कि पाकिस्तान कभी भी निशाना बना सकता है। सीमावर्ती ग्रामीणों ने बताया कि घर से महिलाओं और बच्चों के साथ बुजुर्गों को रिश्तेदारों के यहां शरण दिलाई है। एक-एक कर सीमा से सटे गांव में लोग पलायन करने लगे। कुछ ही घंटों में सीमावर्ती इलाके के गांवों के गलियां सूनी हो गईं। चहल-पहल पर मानो पाकिस्तान की बुरी नजर लग गई हो। बार्डर यूनियन के अध्यक्ष भारत भूषण ने बताया कि पाकिस्तान की अकारण गोलाबारी का यह पहला मामला नहीं है। साल दर साल हालात बिगड़ते ही जा रहे हैं। लोगों को सरकार से मिला भरोसा भी अब टूटता जा रहा है। वर्तमान केंद्र और राज्य सरकार भी सीमावर्ती लोगों के साथ होने का भरोसा दिलाकर धोखा ही कर रही है। न तो लोगों को पांच-पांच मरले के प्लाट मिले और न ही बंकर। जब भी गोलाबारी होती है तो सरकार के मंत्री और नेता सीमावर्ती इलाकों में जाकर बंकर बनाए जाने का भरोसा दिलाते हैं, जबकि पिछले तीन साल से लोगों को जमीनी स्तर पर कुछ भी हासिल नहीं हुआ है। लोग जमीनें और मवेशियों को छोड़कर नहीं जा सकते। केंद्र सरकार इस गलतफहमी को छोड़ दें कि ग्रामीण प्लाट मिलने के बाद सीमावर्ती इलाकों से पलायन कर देंगे। ऐसा सिर्फ मजबूरी में किया जाता है लिहाजा केंद्र सरकार को सीमावर्ती इलाकों के लिए टाउनशिप जल्द से जल्द बहाल करनी चाहिए।
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घर छोड़कर जाने लगे ग्रामीण, बच्चों और महिलाओं को अपने रिश्तेदारों के यहां भेजा
घरों की दीवारों पर मोर्टार के निशान और गोलियों से छलनी मवेशी बयां कर रहे गोलाबारी का दर्द
अमर उजाला ब्यूरो
कठुआ।
बुधवार रात ग्यारह बजे तक पाकिस्तान की ओर से अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर भारतीय चौकियों और रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया गया। इस दौरान हीरानगर सेक्टर के लौंडी, भाटी मेहरू, करोल माथुरां, बोबिया के गांव में पाकिस्तान की ओर से की गई गोलाबारी के निशान वीरवार को दिखाई दिए। घरों की दिवारों पर मोर्टार के निशान तो छलनी मवेशी पाकिस्तान की ओछी हरकत को बयां कर रहे थे। वीरवार सुबह लोगों ने पाकिस्तान की गोलाबारी से हुई बर्बादी के मंजर को देखा, जिसके बाद से ही लोगों को अंदाजा हो गया कि पाकिस्तान कभी भी निशाना बना सकता है। सीमावर्ती ग्रामीणों ने बताया कि घर से महिलाओं और बच्चों के साथ बुजुर्गों को रिश्तेदारों के यहां शरण दिलाई है। एक-एक कर सीमा से सटे गांव में लोग पलायन करने लगे। कुछ ही घंटों में सीमावर्ती इलाके के गांवों के गलियां सूनी हो गईं। चहल-पहल पर मानो पाकिस्तान की बुरी नजर लग गई हो। बार्डर यूनियन के अध्यक्ष भारत भूषण ने बताया कि पाकिस्तान की अकारण गोलाबारी का यह पहला मामला नहीं है। साल दर साल हालात बिगड़ते ही जा रहे हैं। लोगों को सरकार से मिला भरोसा भी अब टूटता जा रहा है। वर्तमान केंद्र और राज्य सरकार भी सीमावर्ती लोगों के साथ होने का भरोसा दिलाकर धोखा ही कर रही है। न तो लोगों को पांच-पांच मरले के प्लाट मिले और न ही बंकर। जब भी गोलाबारी होती है तो सरकार के मंत्री और नेता सीमावर्ती इलाकों में जाकर बंकर बनाए जाने का भरोसा दिलाते हैं, जबकि पिछले तीन साल से लोगों को जमीनी स्तर पर कुछ भी हासिल नहीं हुआ है। लोग जमीनें और मवेशियों को छोड़कर नहीं जा सकते। केंद्र सरकार इस गलतफहमी को छोड़ दें कि ग्रामीण प्लाट मिलने के बाद सीमावर्ती इलाकों से पलायन कर देंगे। ऐसा सिर्फ मजबूरी में किया जाता है लिहाजा केंद्र सरकार को सीमावर्ती इलाकों के लिए टाउनशिप जल्द से जल्द बहाल करनी चाहिए।