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सीमावर्ती ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं
Updated Sat, 11 Nov 2017 01:22 AM IST
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हीरानगर।
केंद्र सरकार द्वारा अंतर्राष्ट्रीय सीमा और एलओसी पर रह रहे लोगों की समस्याओं और गोलीबारी के बाद पैदा होने वाले हालात का जायजा लेने के लिए तीन सदस्यीय टीम को जम्मू कश्मीर भेजा गया है। शुक्रवार को आरएसपुरा और सांबा के बाद केंद्रीय टीम के सदस्य शाम के समय हीरानगर सेक्टर के गांव गुज्जरे चक में पहुंचे और विभिन्न गांवों में लोगों से मुलाकात की।
केंद्रीय टीम में विशेष सचिव रीना मित्रा, संयुक्त सचिव ज्ञानेश कुमार व राम कृष्ण गोयल के अलावा सीमा सुरक्षा बल के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। पूर्व नियोजित कार्यक्रम को देखते हुए बड़ी संख्या में सीमावर्ती ग्रामीण भी अधिकारियों को अपनी समस्याएं बताने पहुंचे। ग्रामीणों ने सीमा के हालात के बारे बताया कि हर समय दहशत का माहौल रहता है और लोग घरों में भी सुरक्षित नहीं हैं। इससे जहां लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है, वहीं बच्चों की शिक्षा पर भी बुरा असर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि किसानों को फसल का नुकसान भी झेलना पड़ रहा है।
लोगों ने कहा कि उन्हें सुरक्षित स्थानों पर बसाने के लिए पांच मरले का प्लाट देने का वायदा किया था जिसे आज तक पूरा नहीं किया गया है। ग्रामीणों के लिए व्यक्तिगत बंकर बनाने के वायदा भी किया था लेकिन अभी तक इस पर कोई अमल नहीं हुआ है। इस पर लोगों ने रोष जताया। लोगों ने कहा कि अब तक लोगों को 2014 में फसलों के नुकसान के मुआवजे की राशि भी नहीं दी गई। 2002 से मुआवजे की बकाया राशि के लिए आज भी सीमावर्ती लोग सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। उन्होंने एलओसी की तर्ज पर उन्हें भी लाभ दिए जाने और एसएसबी और पुलिस की भर्ती सीमावर्ती इलाकों से किए जाने की भी मांग रखी। सीमावर्ती लोगों की समस्याओं का जायजा लेने पहुंची टीम ने लोगों को आश्वासन दिया कि हर मांग को केन्द्र सरकार तक पहुंचाया जाएगा। इस मौके पर हीरानगर विधायक कुलदीप राज, डीसी कठुआ रोहित खजूरिया व अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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केंद्र सरकार द्वारा अंतर्राष्ट्रीय सीमा और एलओसी पर रह रहे लोगों की समस्याओं और गोलीबारी के बाद पैदा होने वाले हालात का जायजा लेने के लिए तीन सदस्यीय टीम को जम्मू कश्मीर भेजा गया है। शुक्रवार को आरएसपुरा और सांबा के बाद केंद्रीय टीम के सदस्य शाम के समय हीरानगर सेक्टर के गांव गुज्जरे चक में पहुंचे और विभिन्न गांवों में लोगों से मुलाकात की।
केंद्रीय टीम में विशेष सचिव रीना मित्रा, संयुक्त सचिव ज्ञानेश कुमार व राम कृष्ण गोयल के अलावा सीमा सुरक्षा बल के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। पूर्व नियोजित कार्यक्रम को देखते हुए बड़ी संख्या में सीमावर्ती ग्रामीण भी अधिकारियों को अपनी समस्याएं बताने पहुंचे। ग्रामीणों ने सीमा के हालात के बारे बताया कि हर समय दहशत का माहौल रहता है और लोग घरों में भी सुरक्षित नहीं हैं। इससे जहां लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है, वहीं बच्चों की शिक्षा पर भी बुरा असर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि किसानों को फसल का नुकसान भी झेलना पड़ रहा है।
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लोगों ने कहा कि उन्हें सुरक्षित स्थानों पर बसाने के लिए पांच मरले का प्लाट देने का वायदा किया था जिसे आज तक पूरा नहीं किया गया है। ग्रामीणों के लिए व्यक्तिगत बंकर बनाने के वायदा भी किया था लेकिन अभी तक इस पर कोई अमल नहीं हुआ है। इस पर लोगों ने रोष जताया। लोगों ने कहा कि अब तक लोगों को 2014 में फसलों के नुकसान के मुआवजे की राशि भी नहीं दी गई। 2002 से मुआवजे की बकाया राशि के लिए आज भी सीमावर्ती लोग सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। उन्होंने एलओसी की तर्ज पर उन्हें भी लाभ दिए जाने और एसएसबी और पुलिस की भर्ती सीमावर्ती इलाकों से किए जाने की भी मांग रखी। सीमावर्ती लोगों की समस्याओं का जायजा लेने पहुंची टीम ने लोगों को आश्वासन दिया कि हर मांग को केन्द्र सरकार तक पहुंचाया जाएगा। इस मौके पर हीरानगर विधायक कुलदीप राज, डीसी कठुआ रोहित खजूरिया व अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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