फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों को मिलेगी राहत

सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों को मिलेगी राहत

Fri, 10 Nov 2017 01:54 AM IST
Updated Fri, 10 Nov 2017 01:54 AM IST
विज्ञापन
सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों को मिलेगी राहत

विज्ञापन

हाईकोर्ट भी नहीं दिला पाया 200 दलित परिवारों को आशियाना
चिह्नित की गई भूमि पर 150 परिवार की बसाए जा सके, 200 परिवारों के लिए दी गई भूमि पर भूमाफिया ने मारी कुंडली
अपने हक के लिए 150 से ज्यादा धरना-प्रदर्शन के बाद भी नहीं मिले अधिकार
अमर उजाला ब्यूरो
हीरानगर।
संविधान में हर नागरिक को बराबरी का हक दिया गया है, इसके बावजूद आज भी हमारे समाज में दलित वर्ग गैरबराबरी का शिकार है। उसे संविधान द्वारा प्रदत्त बुनियादी अधिकारों को हासिल करने के लिए जद्दोजहद करना पड़ रहा है, लेकिन सियासत करने वालों को इनकी आवाज सुनाई नहीं पड़ रही। हीरानगर में दलितों के 200 परिवारों कोर्ट के आदेश के बाद भी आज तक अपना आशियाना हासिल नहीं कर पाए हैं। पिछले एक दशक से भी अधिक समय से हीरानगर के लगभग 200 भूमिहीन परिवार अपने हक के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन लगता है प्रशासन के अधिकारियों के कानों तक उनकी आवाज ही नहीं पहुंच रही है। 150 दलित परिवारों को चिह्नित भूमि पर बसाया गया, लेकिन 200 दलित परिवारों के लिए चिह्नित भूमि पर भूमाफिया कुंडली मारे बैठा है। लोगों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और न्यायालय ने उनके पक्ष में फैसला भी दिया, लेकिन प्रशासन चिह्नित भूमि से भूमाफिया को नहीं हटवा रहा है। यही वजह है कि कोर्ट का फैसला दलितों के पक्ष में होने के बाद भी आज तक उनके पास अपना आशियाना नहीं है और वे दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं।
1965 में भूमिहीन दलित परिवारों को भूमि देने की घोषणा की गई थी। 1977 में ज़िला कठुआ के बुद्दी, मेेरथा, नगरी, सल्लन, हरियाचक्क, कोटपुन्नू, पथवाल आदि गांवों में भूमि चिह्नित करके कुछ परिवारों को बसाया गया, लेकिन हीरानगर के भूमिहीन दलित परिवारों को आज तक उनका हक नहीं दिया गया है। सामाजिक इंसाफ मंच के संरक्षक आईडी खजूरिया ने बताया कि उनके संगठन ने इस मसले को वर्ष 2005 में प्रशासन के सामने रखा। इसके साथ ही दलित परिवारों को हक दिलाने के लिए कई बार धरना-प्रदर्शन भी किया। इसके बावजूद भी जब प्रशासन पर कोई असर नहीं हुआ तो वर्ष 2006 में 350 दलित परिवारों के आवासीय हक के लिए हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की। याचिका पर कोर्ट ने 2012 में सुनवाई करते हुए समाज कल्याण विभाग व जिला प्रशासन को लाभार्थ्यों को बसाने के निर्देश दिए। इसके बाद चिह्नित किए गए इलाकों में 150 परिवार ही बसाए जा सके। आज पांच साल बीत जाने के बाद भी 200 दलित परिवार अपने आशियाने के लिए तरस रहे हैं।
विज्ञापन

बीएल कांडले ने बताया कि सामाजिक इंसाफ मंच ने दलित परिवारों को अधिकार दिलाने के लिए अब तक लगभग 150 से अधिक धरना-प्रदर्शन कर चुका है। जबकि प्रशासन ने अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की है। प्रशासन समाज में गैरबराबरी का माहौल खुद पैदा कर रहा। भूमिहीन परिवारों के लिए जमीनों का चयन कर लिया गया है, तो फिर उन्हें देने में कैसा ऐतराज है। कोर्ट का आदेश अगर इन लोगों के विरुद्ध होता तो प्रशासन दलितों पर कार्यवाही करने में कोई परहेज नहीं करता। प्रशासन और समाज कल्याण विभाग कोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


80 साल की उम्र में लकड़ी बेचकर परिवार का भरण-पोषण करना मजबूरी
80 वर्षीय चरणदास ने बताया कि समाज में गैरबराबरी का ही नतीजा है कि आज भी वह इस उम्र में जंगलों से लकड़ी लाकर, उसे बेचकर अपने परिवार गुजर बसर कर रहे हैं। उन्हाेंने कहा कि अपनी पूरी उम्र की मेहनत में वह केवल रोटी ही पूरी कर पाए हैं। सात सदस्यों का परिवार आज भी एक ही झोपडे़ में रह रहा है। हमारे नेता हमारी तकलीफ नहीं दूर करते हैं। सच कहें तो वे हमें समझ ही नहीं पाते हैं। यही वजह है कि हमारी गरीबी, हमारी तकलीफें, निरक्षरता दूर करने में आज तक किसी ने गंभीरता नहीं दिखाई है।
नहीं साथ छोड़ रही झोपड़ी और गरीबी
व्यास देव ने अपनी दास्तां सुनाते हुए कहा कि वह सन्याल गांव में एक झोपड़ी में रहते थे। झोपड़ी टूटने के बाद अपनी ससुराल चड़वाल चले गए। यहां पर आकर मजदूरी का काम शुरू किया, लेकिन घर बनाने के लिए भूमि नहीं होने से वे अब भी झुग्गी में ही रह रहे हैं। परिवार के भरण-पोषण के अलावा उन्हें झुग्गी का किराया भी भरना पड़ता है। हाथ की उंगली टूटने के कारण बेटा भी घर बैठ गया है, ऐसे में उनको अकेले ही जिम्मेदारी उठानी पड़ रही है। कमाई की हालत ऐसी ही है कि जिस दिन काम नहीं मिला, उस दिन बड़ी दिक्कत हो जाती है।


-बयान---
इन लोगों को बसाने के लिए तहसील प्रशासन को सक्रिय कर दिया गया है। उप मंडल के सभी तहसीलदारों से इस मसले से संबंधित जो जानकारी जुटाई गई है, उसे जिला प्रशासन को भेज दिया गया है। समाज कल्याण विभाग को भी इस मसले की जानकारी देने को कहा गया था, लेकिन अभी तक विभाग द्वारा कोई सहयोग नहीं किया गया।
-सुरेश शर्मा, एसडीएम हीरानगर
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed