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पाक गोलाबारी प्रभावितों ने केंदीय टीम को बताई व्यथा
Updated Sun, 12 Nov 2017 01:58 AM IST
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नौशेरा/पुंछ। पाक गोलाबारी प्रभावितों की समस्याओं का अध्ययन करने के लिए गठित केंद्रीय गृह मंत्रालय की टीम के समक्ष ग्रामीणों ने रो रोकर अपनी पीड़ा बताई। टीम ने शनिवार को राजोरी जिले में नौशेरा तथा पुंछ का दौरा कर ग्रामीणों की बात सुनी।
नौशेरा में टीम ने एलओसी से सटे गांवों का दौरा किया। इसके बाद झांगड के सरकारी मिडिल स्कूल में ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। पीड़ा सुनाते हुए पूर्व सरपंच व नौशेरा बार्डर माइग्रेंट के प्रधान पुरुषोत्तम लाल रो पड़े। यह देख मौजूद अन्य लोगों की आंखें भी नम हो आईं। उनका कहना था कि पाक गोलाबारी के चलते बार बार उन्हें उजड़ना पड़ रहा है। वर्ष 1947 से लेकर अब तक हमारे साथ-साथ बच्चों का भविष्य भी बिखर गया है। ग्रामीणों ने कश्मीरी विस्थापितों की तर्ज पर कोटा देने, घर-घर में बंकर बनाए जाने, केंद्रीय विद्यालय खोलने तथा विस्थापितों का बिजली बिल एवं लोन माफ करने की मांग की। इसके साथ ही गोलाबारी में मारे गए मवेशियों का मुआवजा एक लाख व घायल का 50 हजार देने, तारबंदी को बार्डर के पास करने की भी आवाज उठाई।
झांगड़-मीरपुर कोटली मार्ग खोलने की मांग भी उठी
नौशेरा में उपस्थित विधायक रवींद्र रैना तथा एमएलसी सुरिंदर चौधरी ने झांगड़ से मीरपुर कोटली तक के मार्ग को खोलने की मांग उठाई ताकि भारत-पाक के बीच व्यापार बढ़ने के साथ ही अपनों से बिछुडे़ लोगों से मिलने का मार्ग भी प्रशस्त हो सके। उन्होंने एलओसी से सटे गांवों में सामुदायिक बंकर के साथ ही हर घर में बंकर बनाने, सुरक्षित स्थानों पर ग्रामीणों को पांच मरले जमीन देने, केंद्र तथा सरकार की भर्तियों में एलओसी के युवाओं को प्राथमिकता देने, बार्डर एरिया डेवलपमेंट का कोटा देने की मांग रखीं।
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बन रहे बंकरों का स्थलीय निरीक्षण किया
ग्रामीणों की समस्याएं सुनने के बाद टीम ने गणया (डनका) में बन रहे बंकरों का भी स्थलीय निरीक्षण किया। टीम में शामिल गृह मंत्रालय की आंतरिक सुरक्षा की विशेष सचिव रीना मित्रा, संयुक्त सचिव ज्ञानेश्वर कुमार, निदेशकआरके स्वर्णकार के साथ डिविजनल कमिश्नर डा. मंदीप भंडारी तथा संबंधित जिलों के अधिकारी थे। ज्ञात हो कि शुक्रवार को टीम ने आईबी का दौरा कर गोलाबारी प्रभावितों का दर्द जाना था।
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नौशेरा में टीम ने एलओसी से सटे गांवों का दौरा किया। इसके बाद झांगड के सरकारी मिडिल स्कूल में ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। पीड़ा सुनाते हुए पूर्व सरपंच व नौशेरा बार्डर माइग्रेंट के प्रधान पुरुषोत्तम लाल रो पड़े। यह देख मौजूद अन्य लोगों की आंखें भी नम हो आईं। उनका कहना था कि पाक गोलाबारी के चलते बार बार उन्हें उजड़ना पड़ रहा है। वर्ष 1947 से लेकर अब तक हमारे साथ-साथ बच्चों का भविष्य भी बिखर गया है। ग्रामीणों ने कश्मीरी विस्थापितों की तर्ज पर कोटा देने, घर-घर में बंकर बनाए जाने, केंद्रीय विद्यालय खोलने तथा विस्थापितों का बिजली बिल एवं लोन माफ करने की मांग की। इसके साथ ही गोलाबारी में मारे गए मवेशियों का मुआवजा एक लाख व घायल का 50 हजार देने, तारबंदी को बार्डर के पास करने की भी आवाज उठाई।
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झांगड़-मीरपुर कोटली मार्ग खोलने की मांग भी उठी
नौशेरा में उपस्थित विधायक रवींद्र रैना तथा एमएलसी सुरिंदर चौधरी ने झांगड़ से मीरपुर कोटली तक के मार्ग को खोलने की मांग उठाई ताकि भारत-पाक के बीच व्यापार बढ़ने के साथ ही अपनों से बिछुडे़ लोगों से मिलने का मार्ग भी प्रशस्त हो सके। उन्होंने एलओसी से सटे गांवों में सामुदायिक बंकर के साथ ही हर घर में बंकर बनाने, सुरक्षित स्थानों पर ग्रामीणों को पांच मरले जमीन देने, केंद्र तथा सरकार की भर्तियों में एलओसी के युवाओं को प्राथमिकता देने, बार्डर एरिया डेवलपमेंट का कोटा देने की मांग रखीं।
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बन रहे बंकरों का स्थलीय निरीक्षण किया
ग्रामीणों की समस्याएं सुनने के बाद टीम ने गणया (डनका) में बन रहे बंकरों का भी स्थलीय निरीक्षण किया। टीम में शामिल गृह मंत्रालय की आंतरिक सुरक्षा की विशेष सचिव रीना मित्रा, संयुक्त सचिव ज्ञानेश्वर कुमार, निदेशकआरके स्वर्णकार के साथ डिविजनल कमिश्नर डा. मंदीप भंडारी तथा संबंधित जिलों के अधिकारी थे। ज्ञात हो कि शुक्रवार को टीम ने आईबी का दौरा कर गोलाबारी प्रभावितों का दर्द जाना था।