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World Tourism Day:धोरों की धरती पर पहुंचे पावणे,ढोल नगाड़ों के बीच हुआ स्वागत
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Wed, 27 Sep 2017 01:24 PM IST
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विश्व पर्यटन दिवस के मौके पर स्वर्णनगरी पहुंचे सैलानी
- फोटो : amar ujala
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आज दुनियाभर में विश्व पर्यटन दिवस की धूम है वहीं कलात्मकता एवं भव्यता की धनी स्वर्णनगरी जैसलमेर में आज इस उपलक्ष पर विदेशी सैलानी पहुंचे हुए है। राजस्थान में पर्यटन के क्षेत्र में अपना विशेष महत्व रखने वाले जैसलमेर शहर में प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में सैलानी धोरों की धरती पहुंचते हैं।
मरूस्थलीय जिले की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में पर्यटन व्यवसाय का अमूल्य योगदान रहा है। स्वर्णनगरी के ऐतिहासिक गडीसर सरोवर पर आज सवेरे से ही ढोल नगाड़ों के साथ देसी व विदेशी सैलानियों का स्वागत किया जा रहा है।
पर्यटन दिवस के अवसर पर ऐतिहासिक गडीसर सरोवर पर लोक कलाकारों द्वारा पारंपरिक लोक संगीत के साथ भी सैलानियों का स्वागत किया जा रहा है।
विश्व पर्यटन दिवस पर स्वर्णनगरी पहुंचने पर हो रहे स्वागत सत्कार से सैलानी भी अभिभूत नजर आ रहे हैं। धोरों की धरती पर पहुंचते ही मिल रहे आदर सत्कार को लेकर सैलानी पर्यटन विभाग व पर्यटन व्यवसाईयों का तहे दिल से आभार भी जताया।
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गौरतलब है कि पिछले तीन दशकों से सैलानियों के स्वर्णनगरी के प्रति बढ़ रहे लगाव के बाद धोरों की धरती की तस्वीर के साथ-साथ तकदीर भी बदल गई है। सैलानियों की बम्पर आवक से जहां स्वर्णनगरी की प्रसिद्धि सात समंदर पार तक पहुंची है वहीं मरूप्रदेश के बाशिंदो को बड़ी संख्या में रोजगार भी मिला है।
अनुमान के तौर पर प्रतिवर्ष करीबन 5 लाख सैलानी स्वर्णनगरी की सैर करने आते हैं। वहीं सालाना 250 करोड़ रूपए का टर्न ओवर स्वर्णनगरी को पर्यटन के क्षेत्र से मिलता है। स्वर्णनगरी को ऐतिहासिक सोनार दुर्ग, कलात्मकता हवेलियां, रेत के धोरे सैलानियों को बरबस आकर्षित करते हैं।
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मरूस्थलीय जिले की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में पर्यटन व्यवसाय का अमूल्य योगदान रहा है। स्वर्णनगरी के ऐतिहासिक गडीसर सरोवर पर आज सवेरे से ही ढोल नगाड़ों के साथ देसी व विदेशी सैलानियों का स्वागत किया जा रहा है।
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पर्यटन दिवस के अवसर पर ऐतिहासिक गडीसर सरोवर पर लोक कलाकारों द्वारा पारंपरिक लोक संगीत के साथ भी सैलानियों का स्वागत किया जा रहा है।
विश्व पर्यटन दिवस पर स्वर्णनगरी पहुंचने पर हो रहे स्वागत सत्कार से सैलानी भी अभिभूत नजर आ रहे हैं। धोरों की धरती पर पहुंचते ही मिल रहे आदर सत्कार को लेकर सैलानी पर्यटन विभाग व पर्यटन व्यवसाईयों का तहे दिल से आभार भी जताया।
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गौरतलब है कि पिछले तीन दशकों से सैलानियों के स्वर्णनगरी के प्रति बढ़ रहे लगाव के बाद धोरों की धरती की तस्वीर के साथ-साथ तकदीर भी बदल गई है। सैलानियों की बम्पर आवक से जहां स्वर्णनगरी की प्रसिद्धि सात समंदर पार तक पहुंची है वहीं मरूप्रदेश के बाशिंदो को बड़ी संख्या में रोजगार भी मिला है।
अनुमान के तौर पर प्रतिवर्ष करीबन 5 लाख सैलानी स्वर्णनगरी की सैर करने आते हैं। वहीं सालाना 250 करोड़ रूपए का टर्न ओवर स्वर्णनगरी को पर्यटन के क्षेत्र से मिलता है। स्वर्णनगरी को ऐतिहासिक सोनार दुर्ग, कलात्मकता हवेलियां, रेत के धोरे सैलानियों को बरबस आकर्षित करते हैं।