{"_id":"5926ed2d4f1c1bc643536c31","slug":"why-do-you-know-damages-of-twenty-lakh-rupees-on-durlabh-ji-hospital","type":"story","status":"publish","title_hn":"जानिए क्यों लगा, दुर्लभजी अस्पताल पर बीस लाख रुपए का हर्जाना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जानिए क्यों लगा, दुर्लभजी अस्पताल पर बीस लाख रुपए का हर्जाना
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 25 May 2017 08:17 PM IST
विज्ञापन
राज्य उपभोक्ता आयोग
- फोटो : Demo pic
राज्य उपभोक्ता आयोग ने ऑपरेशन के दौरान चिकित्सीय लापरवाही के मामले में संतोकबा दुर्लभजी अस्पताल और ऑपरेशन करने वाली डॉ. प्रीति शर्मा पर बीस लाख रुपए का हर्जाना लगाया है।
अदालत ने परिवाद व्यय के तौर पर 21 हजार रुपए अलग से अस्पताल प्रशासन और डॉक्टर को देने के आदेश दिए हैं। आयोग ने यह आदेश प्रताप नगर निवासी चन्द्रावती राय व अन्य की ओर से दायर परिवाद पर सुनवाई करते हुए दिए। परिवाद में कहा गया कि दुर्लभजी अस्पताल में 11 नवंबर 2008 को परिवादिया के गर्भाशय का ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के दौरान उसके दूसरे आंतरिक अंगों को काट दिया। जिसके चलते परिवादिया को हर समय पेशाब आने लगा।
जब अस्पताल में इसकी शिकायत की गई तो संचालकों ने उसे डायपर लगाने को कहा। वहीं बाद में अस्पताल प्रशासन ने उसे वापस भर्ती कर ऑपरेशन किया, लेकिन स्थिति सामान्य नहीं हुई। आखिर में परिवादिया ने दूसरे अस्पताल में अपना इलाज कराया।
विज्ञापन
परिवाद में आरोप लगाया गया कि ऑपरेशन के दौरान चिकित्सीय लापरवाही के कारण उसके आंतरिक अंगों को काटा गया और उसे पेशाब नहीं रुकने के कारण हर समय परेशान रहना पड़ा।
जिस पर सुनवाई करते हुए आयोग ने इसे चिकित्सीय लापरवाही मानते हुए डॉ. और अस्पताल प्रशासन पर बीस लाख रुपए का हर्जाना लगाया है।
विज्ञापन
अदालत ने परिवाद व्यय के तौर पर 21 हजार रुपए अलग से अस्पताल प्रशासन और डॉक्टर को देने के आदेश दिए हैं। आयोग ने यह आदेश प्रताप नगर निवासी चन्द्रावती राय व अन्य की ओर से दायर परिवाद पर सुनवाई करते हुए दिए। परिवाद में कहा गया कि दुर्लभजी अस्पताल में 11 नवंबर 2008 को परिवादिया के गर्भाशय का ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के दौरान उसके दूसरे आंतरिक अंगों को काट दिया। जिसके चलते परिवादिया को हर समय पेशाब आने लगा।
विज्ञापन
जब अस्पताल में इसकी शिकायत की गई तो संचालकों ने उसे डायपर लगाने को कहा। वहीं बाद में अस्पताल प्रशासन ने उसे वापस भर्ती कर ऑपरेशन किया, लेकिन स्थिति सामान्य नहीं हुई। आखिर में परिवादिया ने दूसरे अस्पताल में अपना इलाज कराया।
विज्ञापन
परिवाद में आरोप लगाया गया कि ऑपरेशन के दौरान चिकित्सीय लापरवाही के कारण उसके आंतरिक अंगों को काटा गया और उसे पेशाब नहीं रुकने के कारण हर समय परेशान रहना पड़ा।
जिस पर सुनवाई करते हुए आयोग ने इसे चिकित्सीय लापरवाही मानते हुए डॉ. और अस्पताल प्रशासन पर बीस लाख रुपए का हर्जाना लगाया है।