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पूजा को मिला पीहर, दादी का आंचल और जमीन का हक
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 25 Sep 2017 08:29 PM IST
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विवाद निपटारे के बाद एक-दूसरे से मिलते लोग
- फोटो : amar ujala
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पिता का साया सिर से उठ गया तो मां ने दूसरी शादी रचा ली। दादी ने उसे पोती का हक देने से इनकार कर दिया। इसके बाद उसने अदालत का दरवाजा खटखटाया। तब जाकर आज राजस्व लोक अदालत में उसे ट्रिपल खुशी मिल गई।
कहानी अजमेर जिले में सावर तहसील के नापाखेड़ा गांव से शुरू हुई। गांव के स्वर्गीय देवराज मीणा की बेटी पूजा ने उपखण्ड न्यायालय में वाद दायर किया कि उसे उसकी पैतृक जमीन का हक दिलाया जाए। पूजा का कहना है कि उसकी मां सीमा ने करीब 15 साल पहले उसके पिता देवराज को छोड़कर भीलवाड़ा के जालमपुरा में रहने वाले केसरलाल फेडवा से ब्याह रचा लिया। इसके कुछ समय बाद पूजा के पिता देवराज की भी मौत हो गई।
ऐसे हालात में पूजा के चाचा खेमराज और दादी गलकू देवी ने उसे अपना मानने से इनकार कर दिया। इसी दौरान उसकी मां सीमा उसे जालमपुरा ले गई। पूजा ने वहीं पढ़ाई की और उसका ब्याह भी हो गया।
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कहानी अजमेर जिले में सावर तहसील के नापाखेड़ा गांव से शुरू हुई। गांव के स्वर्गीय देवराज मीणा की बेटी पूजा ने उपखण्ड न्यायालय में वाद दायर किया कि उसे उसकी पैतृक जमीन का हक दिलाया जाए। पूजा का कहना है कि उसकी मां सीमा ने करीब 15 साल पहले उसके पिता देवराज को छोड़कर भीलवाड़ा के जालमपुरा में रहने वाले केसरलाल फेडवा से ब्याह रचा लिया। इसके कुछ समय बाद पूजा के पिता देवराज की भी मौत हो गई।
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ऐसे हालात में पूजा के चाचा खेमराज और दादी गलकू देवी ने उसे अपना मानने से इनकार कर दिया। इसी दौरान उसकी मां सीमा उसे जालमपुरा ले गई। पूजा ने वहीं पढ़ाई की और उसका ब्याह भी हो गया।
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यूं निपटा पूरा मामला, जानिए
बालिग होने पर पूजा ने दादी से स्वर्गीय पिता का हिस्सा मांगा, लेकिन नहीं मिला। आखिरकार पूजा ने पिछले साल उपखण्ड न्यायालय में न्याय की गुहार लगाई। इस दौरान गिरवरपुरा में आयोजित राजस्व लोक अदालत के शिविर में प्रकरण को लाया गया। उपखण्ड अधिकारी सुरेश कुमार बुनकर ने बताया कि दोनों पक्षों को समझाया गया तो दादी और चाचा ने स्वीकार कर लिया कि पूजा उनके ही परिवार का हिस्सा है।
पूजा ने भी सहमति दे दी कि उसके पिता का हिस्सा भले ही कागजों में उसके नाम कर दिया जाए लेकिन खेती चाचा ही करते रहेंगे। मैं तो बस इतना चाहती हूं कि मुझे मेरा पीहर मिल जाए और बेटी के रूप में स्वीकार किया जाए। दादी गलकू देवी ने भी पूजा को गले लगा लिया।
पूजा ने भी सहमति दे दी कि उसके पिता का हिस्सा भले ही कागजों में उसके नाम कर दिया जाए लेकिन खेती चाचा ही करते रहेंगे। मैं तो बस इतना चाहती हूं कि मुझे मेरा पीहर मिल जाए और बेटी के रूप में स्वीकार किया जाए। दादी गलकू देवी ने भी पूजा को गले लगा लिया।