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जानिए, भगवान को चिट्ठी लिखकर भक्तों ने क्या—क्या मांगा
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 08 Apr 2017 03:38 PM IST
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सांवलिया सेठ
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किसी ने अपने लिए कार मांगी है तो किसी ने पत्नी के साथ जनम—जनम का साथ। मेवाड़ के प्रसिद्ध सांवलिया सेठ मंदिर में भक्तों ने प्रभु को कुछ इस तरह की अर्जियां लगाई है।
दरअसल, सांवलिया सेठ के मंदिर का भंडार खोला गया तो उसमें कई भक्तों के पत्र भी मंदिर प्रशासन को मिले हैं। इसमें किसी ने अपने लिए कार मांगी है तो किसी ने पत्नी का साथ बने रहने की मनोकामना पूरी करने की बात लिखी है।
गुजरात के एक भक्त ने लिखा है कि प्रभु मेरे बिजनेस को और अच्छा कर देना। मेरी जो गाड़ियां चलती हैं उनमें कोई नुकसान ना हो। एक अन्य भक्त ने अपने पत्र में लिखा है कि प्रभु पिछली बार जो अर्जी लगाई थी उसमें से मेरा आधा काम तो हो गया है, अब मेरी सरकारी नौकरी और लगवा दो।
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एक दंपती ने लिखा है कि हमारी जोड़ी सलामत रखना। काम में व्यस्त होने के कारण दर्शन करने नहीं आ सका हूं, जल्द ही आउंगा और प्रसादी भी करूंगा। भक्त प्रहलात ने प्रभु से अपने लिए कार मांगी है। वहीं, मध्यप्रदेश के एक व्यापारी ने अर्जी में लिखा है कि प्रभु पांच कमाता हूं और दस खर्च हो जाते हैं। मुझसे ऐसी क्या भूल हो गई है जो मेरे साथ ऐसा हो रहा है।
ऐसे ही कई भक्तों ने अपनी मन की बात कागज पर लिखकर प्रभु तक पहुंचाई है ताकि उनके कष्ट दूर हो सके और सुख—संपत्ति बनी रहे।
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दरअसल, सांवलिया सेठ के मंदिर का भंडार खोला गया तो उसमें कई भक्तों के पत्र भी मंदिर प्रशासन को मिले हैं। इसमें किसी ने अपने लिए कार मांगी है तो किसी ने पत्नी का साथ बने रहने की मनोकामना पूरी करने की बात लिखी है।
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गुजरात के एक भक्त ने लिखा है कि प्रभु मेरे बिजनेस को और अच्छा कर देना। मेरी जो गाड़ियां चलती हैं उनमें कोई नुकसान ना हो। एक अन्य भक्त ने अपने पत्र में लिखा है कि प्रभु पिछली बार जो अर्जी लगाई थी उसमें से मेरा आधा काम तो हो गया है, अब मेरी सरकारी नौकरी और लगवा दो।
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एक दंपती ने लिखा है कि हमारी जोड़ी सलामत रखना। काम में व्यस्त होने के कारण दर्शन करने नहीं आ सका हूं, जल्द ही आउंगा और प्रसादी भी करूंगा। भक्त प्रहलात ने प्रभु से अपने लिए कार मांगी है। वहीं, मध्यप्रदेश के एक व्यापारी ने अर्जी में लिखा है कि प्रभु पांच कमाता हूं और दस खर्च हो जाते हैं। मुझसे ऐसी क्या भूल हो गई है जो मेरे साथ ऐसा हो रहा है।
ऐसे ही कई भक्तों ने अपनी मन की बात कागज पर लिखकर प्रभु तक पहुंचाई है ताकि उनके कष्ट दूर हो सके और सुख—संपत्ति बनी रहे।