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संविदा पर काम कर रहे सेवानिवृत्त कर्मचारियों को हटाने के आदेश
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Wed, 30 Aug 2017 07:48 PM IST
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राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि वह सरकारी विभागों में संविदा पर काम कर रहे सेवानिवृत्त कर्मचारियों को तुरंत प्रभाव से हटाए। इसके साथ ही अदालत ने आदेश की कठोरता से पालना करने के लिए आदेश की कॉपी मुख्य सचिव को भेजी है।
अदालत ने खाली होने वाले पदों को पूर्व में सुरेन्द्र कुमार गुर्जर के मामले में दिए गए दिशा- निर्देशों के आधार पर भरने को कहा है। न्यायाधीश एसपी शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश रमाकांत वशिष्ठ की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पुन: संविदा पर सेवा में लेना ना केवल राजस्थान सेवा नियमों के खिलाफ है, बल्कि इससे भाई-भतीजावाद को भी बढ़ावा मिलता है।
याचिका में अधिवक्ता रामप्रताप सैनी ने अदालत को बताया कि वह सरकारी सेवा से पूर्व में सेवानिवृत्त हुआ था। इसके बाद राज्य सरकार ने उसे स्वास्थ्य विभाग में संविदा पर लेखाकर्मी नियुक्त कर दिया। याचिका में कहा गया कि गत 21 जून को उसकी संविदा समाप्त कर सेवा से हटा दिया गया। जिसे याचिका में चुनौती देते हुए कहा गया कि राज्य सरकार सेवानिवृत्त कर्मचारियों को संविदा पर पुन: सेवा में रखने में भेदभाव करती है। ऐसे में सरकार या तो सभी के साथ समान व्यवहार करे या फिर संविदा पर लिए गए सभी सेवानिवृत्त कर्मचारियों को हटाया जाए।
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जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों को तत्काल सेवा से हटाने के आदेश देते हुए पूर्व में दिए आदेश की पालना के तहत खाली पदों को भरने के आदेश दिए हैं।
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अदालत ने खाली होने वाले पदों को पूर्व में सुरेन्द्र कुमार गुर्जर के मामले में दिए गए दिशा- निर्देशों के आधार पर भरने को कहा है। न्यायाधीश एसपी शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश रमाकांत वशिष्ठ की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पुन: संविदा पर सेवा में लेना ना केवल राजस्थान सेवा नियमों के खिलाफ है, बल्कि इससे भाई-भतीजावाद को भी बढ़ावा मिलता है।
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याचिका में अधिवक्ता रामप्रताप सैनी ने अदालत को बताया कि वह सरकारी सेवा से पूर्व में सेवानिवृत्त हुआ था। इसके बाद राज्य सरकार ने उसे स्वास्थ्य विभाग में संविदा पर लेखाकर्मी नियुक्त कर दिया। याचिका में कहा गया कि गत 21 जून को उसकी संविदा समाप्त कर सेवा से हटा दिया गया। जिसे याचिका में चुनौती देते हुए कहा गया कि राज्य सरकार सेवानिवृत्त कर्मचारियों को संविदा पर पुन: सेवा में रखने में भेदभाव करती है। ऐसे में सरकार या तो सभी के साथ समान व्यवहार करे या फिर संविदा पर लिए गए सभी सेवानिवृत्त कर्मचारियों को हटाया जाए।
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जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों को तत्काल सेवा से हटाने के आदेश देते हुए पूर्व में दिए आदेश की पालना के तहत खाली पदों को भरने के आदेश दिए हैं।