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आरसीए चुनाव: हाईप्रोफाइल सियासी मुकाबला

Fri, 26 May 2017 07:13 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Fri, 26 May 2017 07:13 PM IST
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rca election process, first day for nomination
नामांकन जमा करवाते दावेदार - फोटो : अमर उजाला
राजस्थान क्रिकेट संघ (आरसीए) के चुनाव हाईप्रोफाइल सियासी मुकाबला बन गया है। चुनावों में जोशी और मोदी के बीच टक्कर के साथ ही बीजेपी कांग्रेस की लड़ाई भी नजर आ रही है। ये लड़ाई भी हर रोज नया मोड़ ले रहे हैं।
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इन चुनावों के तहत शुक्रवार को भरे गए नामांकन में तीन बड़े नामों ने अध्यक्ष पद पर नामांकन दाखिल किए हैं। आईपीएल के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी के बेटे रुचिर मोदी और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सीपी जोशी का नाम इस पद के दावेदारों में पहले से ही तय माना जा रहा था, लेकिन जिस नाम ने नामांकन भर चौंकाया है, वह है राज्यसभा सांसद हर्षवर्धन सिंह का। इससे भाजपा-कांग्रेस का सियासी एंगल भी चुनावों में बन सकता है। राजस्थान के 33 जिलों के क्रिकेट संघ इन चुनावों में मतदान कर नया अध्यक्ष बनाएंगे।
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चुनाव में कुल 6 पदों पर 25 नामांकन दाखिल हुए हैं। चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक मतदान 29 मई को होंगे। 26 मई यानी शुक्रवार को नामांकन भरे जाने थे। पूरे दिन भर नाटकीय घटनाक्रम चलता रहा। अब मैदान में आरसीए की कुर्सी की लड़ाई किनके बीच होगी, यह स्थिति आने वाले दो दिनों में स्पष्ट होगी। इसमें शनिवार को नामांकनों की जांच होगी तो रविवार को नामांकन वापिस लिए जाने का दिन होगा। इसके बाद बचने वाले दावेदारों के बीच ही चुनाव आरसीए का भविष्य तय करेंगे।
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जहां तक बात असली लड़ाई की है, वो जोशी गुट और मोदी गुट के बीच की है। मौजूदा स्थिति में आरसीए पद पर ललित मोदी ही काबिज है। वे लंदन में हैं और वहीं से सब ऑपरेट कर रहे हैं। मोदी को लेकर ही आरसीए को बीसीसीआई ने निलंबित कर रखा है। जिसकी वजह से राजस्थान को बड़े मैच नसीब नहीं हो पा रहे।

मोदी चाहते हैं कि सत्ता उन्हीं के हाथ में रहे तो उन्होंने अलवर जिला क्रिकेट संघ के रास्ते अपने बेटे को इस गेम में उतार दिया। अब रुचिर को ही मोदी का फेस माना जा रहा है। हांलाकि मोदी ने इस बात से हमेशा इंकार किया है, उनका कहना है कि यह रुचिर का खुद का फैसला है।


दूसरी तरफ रुचिर को टक्कर देने में जुटे हैं सियासत के एक्सपर्ट सीपी जोशी। जोशी पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं, आरसीए अध्यक्ष भी रह चुके हैं। चुनावों से पहले रणनीति को लेकर काफी सक्रिय भी रहे हैं।
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