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20 साल की जॉब के बाद यह पुलिसकर्मी कहलाएगा अब डॉक्टर साहब, जानिए क्यों
Updated Fri, 26 Jan 2018 04:10 PM IST
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एसपी गौरव यादव के साथ हैडकांस्टेबल जालमसिंह
- फोटो : Vishnu Sharma
करीब 20 साल पहले पुलिस कांस्टेबल की नौकरी पाने वाले जालमसिंह ने एक ऐसा अनूठा काम किया है कि वे अब महकमे में अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच डॉक्टर साहब के नाम से भी पहचाने जाने लगे है।
इसकी वजह है कि हैडकांस्टेबल जालमसिंह जिला पुलिस में पीएच.डी (डॉक्टरेट) की उपाधि प्राप्त करने वाले पहले पुलिसकर्मी बन गए है। राजस्थान में जैसलमेर जिले के गांव कोहरा के रहने वाले जालमसिंह पुत्र हड़वत सिंह वर्ष 1998 में राजस्थान पुलिस में भर्ती हुए थे।
उन्होंने राजस्थान पुलिस में करीब 20 साल की सर्विस पूरी कर ली है। फिलहाल वह जैसलमेर में ही हैडकांस्टेबल है। खास बात यह है कि शुरूआत से ही जालमसिंह की डॉक्टर बनने की ईच्छा थी। लेकिन पुलिस सेवाओं में आने से यह ईच्छा पूरी नहीं हो सकी। लेकिन....
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इसकी वजह है कि हैडकांस्टेबल जालमसिंह जिला पुलिस में पीएच.डी (डॉक्टरेट) की उपाधि प्राप्त करने वाले पहले पुलिसकर्मी बन गए है। राजस्थान में जैसलमेर जिले के गांव कोहरा के रहने वाले जालमसिंह पुत्र हड़वत सिंह वर्ष 1998 में राजस्थान पुलिस में भर्ती हुए थे।
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उन्होंने राजस्थान पुलिस में करीब 20 साल की सर्विस पूरी कर ली है। फिलहाल वह जैसलमेर में ही हैडकांस्टेबल है। खास बात यह है कि शुरूआत से ही जालमसिंह की डॉक्टर बनने की ईच्छा थी। लेकिन पुलिस सेवाओं में आने से यह ईच्छा पूरी नहीं हो सकी। लेकिन....
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सपनों को शांत नहीं होने दिया, उन्होंने पीएचडी करने की ठान ली
dream
- फोटो : Demo pic
जालम सिंह ने अपने सपनों को शांत नहीं होने दिया। इसे पूरा करने के लिए उन्होंने पीएचडी करने की ठान ली। पुलिस विभाग में पदस्थापित रहते हुए हैडकांस्टेबल ने विभिन्न प्रकार की पुलिस की ड्यूटियों का निवर्हन किया।
उन्होंने अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर होते हुए अपने अध्ययन को भी जारी रखा और हाल ही में हैडकांस्टेबल जालमसिंह ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविधालय, नई दिल्ली से लोक प्रशासन में पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की।
उन्होंने ‘‘राजस्थान पुलिस सेवा में निम्न स्तरीय कार्मिकों की कार्य संतुष्टि: जैसलमेर जिले के विशेष संदर्भ में एक अनुभवमूलक अध्ययन‘‘ विषय पर अपना शोध कार्य इग्नू की प्रोफेसर अलका धमेजा एवं राजस्थान विश्वविधालय जयपुर के लोक प्रशासन विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर पी.एस. भटनागर के मार्गदर्शन में पूर्ण किया।
उन्होंने अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर होते हुए अपने अध्ययन को भी जारी रखा और हाल ही में हैडकांस्टेबल जालमसिंह ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविधालय, नई दिल्ली से लोक प्रशासन में पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की।
उन्होंने ‘‘राजस्थान पुलिस सेवा में निम्न स्तरीय कार्मिकों की कार्य संतुष्टि: जैसलमेर जिले के विशेष संदर्भ में एक अनुभवमूलक अध्ययन‘‘ विषय पर अपना शोध कार्य इग्नू की प्रोफेसर अलका धमेजा एवं राजस्थान विश्वविधालय जयपुर के लोक प्रशासन विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर पी.एस. भटनागर के मार्गदर्शन में पूर्ण किया।
अब महकमे के साथी इन्हें डॉक्टर साहब भी पुकारने लगे है
डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त पुलिस कार्मिक
- फोटो : demo pic
जानकारी के अनुसार हैडकांस्टेबल जालमसिंह राजस्थान और जैसलमेर जिला पुलिस में संभवतया पहले ऐसे पुलिस कार्मिक है जिन्होंने कड़ी मेहनत एवं लगन से पीएच.डी (डॉक्टरेट) की उपाधि प्राप्त की। इससे अब महकमे के साथी इन्हें डॉक्टर साहब भी पुकारने लगे है।
वहीं, हैडकांस्टेबल जालम सिंह के पीएचडी डिग्रीधारी होने की जानकारी मिलने पर जैसलमेर के जिला पुलिस अधीक्षक गौरव यादव ने भी हैडकांस्टेबल जालमसिंह से मुलाकात कर उनको बधाई दी और हौंसला अफजाई की।
वहीं, हैडकांस्टेबल जालम सिंह के पीएचडी डिग्रीधारी होने की जानकारी मिलने पर जैसलमेर के जिला पुलिस अधीक्षक गौरव यादव ने भी हैडकांस्टेबल जालमसिंह से मुलाकात कर उनको बधाई दी और हौंसला अफजाई की।