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गन्ने का रस बेचने वाला प्रदीप बोर्ड परीक्षार्थियों के लिए बना मिसाल
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Fri, 02 Jun 2017 02:42 PM IST
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प्रदीप
- फोटो : amar ujala
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कोटा में गन्ने का रस बेचकर अपने परिवार का पालन—पोषण करने वाले प्रदीप ने विद्यार्थियों के लिए मिसाल पेश की है। स्कूल के बाद पढ़ाई और अपने जूस के ठेले को चलाने वाला प्रदीप इंजीनियर बनना चाहता है।
दरअसल, प्रदीप के पिता नंदकिशोर आॅटो चलाकर परिवार का पेट पालते हैं, लेकिन उनकी कमाई से घर खर्च और पढ़ाई का खर्चा नहीं चल पाता। ऐसे में प्रदीप ने अपने पिता का हाथ बटाते हुए गन्ने का रस बेचना शुरू किया। इसके बावजूद उसने 12वीं बोर्ड की परीक्षा में विज्ञान वर्ग में 89 प्रतिशत अंक हासिल कर अपना और अपने परिजनों का नाम रोशन किया। संतोषी नगर में किराये के मकान में रहने वाला प्रदीप अब आगे भविष्य में इंजीनियर बनना चाहता है ताकि अपने लिए एक सुंदर सा घर बना सके। इसके लिए प्रदीप ने यहां एक कोचिंग इंस्टीट्यूट से इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी है। कोचिंग इंस्टीट्यूट के निदेशक नवीन माहेश्वरी ने भी उसकी प्रतिभा को देखते हुए फीस में 75 फीसदी की रियायत दी है। प्रदीप ने राजस्थान बोर्ड से दसवीं कक्षा में भी 89.5 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे।
पिता नन्दकिशोर ने बताया कि जब वे डॉक्टर—इंजीनियर की तैयारी करने के लिए करने के लिए दूरदराज से कोटा में आए हुए छात्रों को देखते तो उनके मन भी ये भावना उठती कि उनका बेटा भी ऐसा ही नाम करे। इसी दौरान जब प्रदीप के 10वीं व 12वीं में अच्छे नंबर आए तो उत्साह और बढ़ा। आर्थिक तंगी के बावजूद कोचिंग संस्थान का सहयोग मिला और अब बेटा सपना सच करने में जुटा हुआ है।
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प्रदीप की मां मंजू राठौड़ गृहिणी है और छोटा भाई अभी दसवीं कक्षा में पढ़ रहा है।
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दरअसल, प्रदीप के पिता नंदकिशोर आॅटो चलाकर परिवार का पेट पालते हैं, लेकिन उनकी कमाई से घर खर्च और पढ़ाई का खर्चा नहीं चल पाता। ऐसे में प्रदीप ने अपने पिता का हाथ बटाते हुए गन्ने का रस बेचना शुरू किया। इसके बावजूद उसने 12वीं बोर्ड की परीक्षा में विज्ञान वर्ग में 89 प्रतिशत अंक हासिल कर अपना और अपने परिजनों का नाम रोशन किया। संतोषी नगर में किराये के मकान में रहने वाला प्रदीप अब आगे भविष्य में इंजीनियर बनना चाहता है ताकि अपने लिए एक सुंदर सा घर बना सके। इसके लिए प्रदीप ने यहां एक कोचिंग इंस्टीट्यूट से इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी है। कोचिंग इंस्टीट्यूट के निदेशक नवीन माहेश्वरी ने भी उसकी प्रतिभा को देखते हुए फीस में 75 फीसदी की रियायत दी है। प्रदीप ने राजस्थान बोर्ड से दसवीं कक्षा में भी 89.5 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे।
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पिता नन्दकिशोर ने बताया कि जब वे डॉक्टर—इंजीनियर की तैयारी करने के लिए करने के लिए दूरदराज से कोटा में आए हुए छात्रों को देखते तो उनके मन भी ये भावना उठती कि उनका बेटा भी ऐसा ही नाम करे। इसी दौरान जब प्रदीप के 10वीं व 12वीं में अच्छे नंबर आए तो उत्साह और बढ़ा। आर्थिक तंगी के बावजूद कोचिंग संस्थान का सहयोग मिला और अब बेटा सपना सच करने में जुटा हुआ है।
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प्रदीप की मां मंजू राठौड़ गृहिणी है और छोटा भाई अभी दसवीं कक्षा में पढ़ रहा है।