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थार में गूंजेंगी यूएस की तोपें, 43 वर्ष पहले आज ही बना था इतिहास
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 18 May 2017 08:00 PM IST
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फाइल फोटो।
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राजस्थान के जैसलमेर का पोकरण कस्बा 18 मई 1974 को विश्व मानचित्र पर आ गया था, जब भारत ने यहां अपना पहला परमाणु परीक्षण किया था। ठीक 43 वर्ष बाद पोकरण एक बार फिर से दुनिया की निगाहों में होगा।
राजस्थान के भारत-पाक सीमा से सटे जैसलमेर जिले के पोकरण के रेगिस्तान में भारतीय सेना अमेरिका के बीएई सिस्टम से मिली दो हॉवित्जर तोप का परीक्षण कभी भी कर सकती है। फिलहाल दो 155 एमएम/39 कैलिबर अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर तोप का पोकरण की फायरिंग रेंज में परीक्षण किया जाएगा। इससे पूर्व वर्ष 1980 में स्वीडिश बोफोर्स तोप को भारतीय सेना की आर्टिलरी में सम्मलित किया गया था। गौरतलब है कि भारत अमेरिका से 145 तोप खरीदेगा। पिछले वर्ष भारत और अमेरिका के बीच 145 तोप के लिए समझौता हुआ था।
आज ही बना था इतिहास
भारत ने पहली बार परमाणु परीक्षण पोखरण में आज ही के दिन 1974 में किया था। इस परीक्षण के लिए बुद्धा इज स्माइलिंग कोर्ड वर्ड इस्तेमाल किया गया। जिस बम का परमाणु परीक्षण किया गया गया था उसका वजन 1400 किलोग्राम था। परीक्षण पोखरण के मल्का गांव के एक सूखे कुएं में किया गया था। भूमिगत परीक्षण के बाद यहां एक गहरा गड्डा हो गया था। लेकिन स्थानीय लोग बताते है कि भारत को इतिहास के पन्नों में दर्ज कराने वाला पोखरण उपेक्षा का शिकार ही रहा है। लेकिन जिस जगह परीक्षण किया गया वहां किसी प्रकार की जानकारी उपलब्ध नहीं है। हालांकि सेना ने उस क्षेत्र में 500 मीटर की तारबंदी की हुई है लेकिन साइन बोर्ड का अभाव है।
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राजस्थान के भारत-पाक सीमा से सटे जैसलमेर जिले के पोकरण के रेगिस्तान में भारतीय सेना अमेरिका के बीएई सिस्टम से मिली दो हॉवित्जर तोप का परीक्षण कभी भी कर सकती है। फिलहाल दो 155 एमएम/39 कैलिबर अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर तोप का पोकरण की फायरिंग रेंज में परीक्षण किया जाएगा। इससे पूर्व वर्ष 1980 में स्वीडिश बोफोर्स तोप को भारतीय सेना की आर्टिलरी में सम्मलित किया गया था। गौरतलब है कि भारत अमेरिका से 145 तोप खरीदेगा। पिछले वर्ष भारत और अमेरिका के बीच 145 तोप के लिए समझौता हुआ था।
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आज ही बना था इतिहास
भारत ने पहली बार परमाणु परीक्षण पोखरण में आज ही के दिन 1974 में किया था। इस परीक्षण के लिए बुद्धा इज स्माइलिंग कोर्ड वर्ड इस्तेमाल किया गया। जिस बम का परमाणु परीक्षण किया गया गया था उसका वजन 1400 किलोग्राम था। परीक्षण पोखरण के मल्का गांव के एक सूखे कुएं में किया गया था। भूमिगत परीक्षण के बाद यहां एक गहरा गड्डा हो गया था। लेकिन स्थानीय लोग बताते है कि भारत को इतिहास के पन्नों में दर्ज कराने वाला पोखरण उपेक्षा का शिकार ही रहा है। लेकिन जिस जगह परीक्षण किया गया वहां किसी प्रकार की जानकारी उपलब्ध नहीं है। हालांकि सेना ने उस क्षेत्र में 500 मीटर की तारबंदी की हुई है लेकिन साइन बोर्ड का अभाव है।
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