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अनोखा समर कैम्प, बच्चों के साथ 'दादाजी' भी!
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 15 Jun 2017 06:18 PM IST
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थिएटर प्रशिक्षण हासिल करते बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
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सिटी पैलेस में समर आर्ट कैम्प की विभिन्न कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। शिविर में थिएटर का प्रशिक्षण कशिश भाटिया द्वारा दिया जा रहा है। इस कार्यशाला की अनोखी बात यह है कि इसके प्रतिभागी 21 जून को शिविर समापन के दौरान मंच पर प्रस्तुत किए जाने वाले नाटक की स्क्रिप्ट भी खुद ही तैयार कर रहे हैं। प्रतिभागियों में बच्चों के साथ ही साठ साल के बुजुर्ग भी हैं।
कशिश भाटिया ने बताया कि इस नाटक की कहानी एक गांव में रहने वाले पिता एवं पुत्री के संबंधों पर केंद्रित है। 20 मिनट के इस नाटक के माध्यम से 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' का संदेश दिया जाएगा। प्रत्येक प्रतिभागी थिएटर का बुनियादी कौशल सीखने एवं कहानी के साथ इम्प्रोवाइज करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने आगे बताया कि प्रतिभागियों में इम्प्रोवाइजेशन स्किल विकसित करने, उनका आत्मविश्वास बढ़ाने एवं उन्हें एक-दूसरे के साथ सहज बनाने के लिए स्पेशल गेम्स एवं एक्टिविटीज भी आयोजित की जा रही है।
कार्यशाला की सबसे खास बात यह है कि कार्यशाला में बच्चों के साथ ही उनके दादाजी की उम्र के प्रतिभागी भी शामिल हैं। इस कार्यशाला में 60 वर्षीय प्रतिभागी हरि शंकर भी अभिनय की बारीकियां सीख रहे हैं, और वे नाटक में पिता की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने बताया कि मेरी रूचि भावनात्मक एवं कॉमेडी नाटकों में अधिक है। इस वर्कशॉप के माध्यम से मैंने आत्मविश्वास बढ़ाने से लेकर टीमवर्क वाली गतिविधियों से काफी कुछ सीखा है।
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कशिश भाटिया ने बताया कि इस नाटक की कहानी एक गांव में रहने वाले पिता एवं पुत्री के संबंधों पर केंद्रित है। 20 मिनट के इस नाटक के माध्यम से 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' का संदेश दिया जाएगा। प्रत्येक प्रतिभागी थिएटर का बुनियादी कौशल सीखने एवं कहानी के साथ इम्प्रोवाइज करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने आगे बताया कि प्रतिभागियों में इम्प्रोवाइजेशन स्किल विकसित करने, उनका आत्मविश्वास बढ़ाने एवं उन्हें एक-दूसरे के साथ सहज बनाने के लिए स्पेशल गेम्स एवं एक्टिविटीज भी आयोजित की जा रही है।
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कार्यशाला की सबसे खास बात यह है कि कार्यशाला में बच्चों के साथ ही उनके दादाजी की उम्र के प्रतिभागी भी शामिल हैं। इस कार्यशाला में 60 वर्षीय प्रतिभागी हरि शंकर भी अभिनय की बारीकियां सीख रहे हैं, और वे नाटक में पिता की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने बताया कि मेरी रूचि भावनात्मक एवं कॉमेडी नाटकों में अधिक है। इस वर्कशॉप के माध्यम से मैंने आत्मविश्वास बढ़ाने से लेकर टीमवर्क वाली गतिविधियों से काफी कुछ सीखा है।
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