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ओबीसी आरक्षण मामला: मुख्य सचिव सहित अन्य को अवमानना नोटिस जारी
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Wed, 25 Oct 2017 07:04 PM IST
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राजस्थान हाईकोर्ट ने अदालती आदेश के बावजूद अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची का पुन: परीक्षण नहीं करने पर केबिनेट सचिव पीके सिन्हा, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग चेयरमैन, मुख्य सचिव अशोक कुमार जैन, अतिरिक्त मुख्य सामाजिक न्याय सचिव जेसी मोहंती और राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के चेयरमैन जेआर गोयल को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
न्यायाधीश केएस झवेरी और न्यायाधीश वीके व्यास की खंडपीठ ने यह आदेश मूलसिंह व अन्य की ओर से दायर अवमानना याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता शोभित तिवाड़ी ने अदालत को बताया कि हाईकोर्ट ने 10 अगस्त 2015 को जाट आरक्षण का फैसला देते हुए केन्द्र व राज्य सरकार को निर्देश दिए थे कि वह किसी जाति को ओबीसी वर्ग में शामिल करने या निकालने के संबंध में लंबित आपत्तियों से प्रभावित हुए बिना केन्द्र व राज्य की ओबीसी सूची का अध्ययन करें और आंकड़े एकत्रित कर उनका पुन: परीक्षण करे।
याचिका में कहा गया कि इस आदेश की पालना नहीं की गई है। केन्द्र की ओर से मिली जानकारी के अनुसार इस संबंध में गुजरात व पंजाब हाईकोर्ट में मामला लंबित है। वहीं राज्य सरकार ने अब तक ऐसी समीक्षा करने से इनकार कर दिया। याचिका में कहा गया कि ओबीसी सूची का पुन: परीक्षण किए बिना गत 23 अगस्त को भरतपुर और धौलपुर के जाटों को आरक्षण का लाभ दिया गया। वहीं अब सरकार ओबीसी के आरक्षण को 21 फीसदी से बढ़ाकर 26 फीसदी कर रही है।
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जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने संबंधित अधिकारियों को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
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न्यायाधीश केएस झवेरी और न्यायाधीश वीके व्यास की खंडपीठ ने यह आदेश मूलसिंह व अन्य की ओर से दायर अवमानना याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता शोभित तिवाड़ी ने अदालत को बताया कि हाईकोर्ट ने 10 अगस्त 2015 को जाट आरक्षण का फैसला देते हुए केन्द्र व राज्य सरकार को निर्देश दिए थे कि वह किसी जाति को ओबीसी वर्ग में शामिल करने या निकालने के संबंध में लंबित आपत्तियों से प्रभावित हुए बिना केन्द्र व राज्य की ओबीसी सूची का अध्ययन करें और आंकड़े एकत्रित कर उनका पुन: परीक्षण करे।
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याचिका में कहा गया कि इस आदेश की पालना नहीं की गई है। केन्द्र की ओर से मिली जानकारी के अनुसार इस संबंध में गुजरात व पंजाब हाईकोर्ट में मामला लंबित है। वहीं राज्य सरकार ने अब तक ऐसी समीक्षा करने से इनकार कर दिया। याचिका में कहा गया कि ओबीसी सूची का पुन: परीक्षण किए बिना गत 23 अगस्त को भरतपुर और धौलपुर के जाटों को आरक्षण का लाभ दिया गया। वहीं अब सरकार ओबीसी के आरक्षण को 21 फीसदी से बढ़ाकर 26 फीसदी कर रही है।
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जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने संबंधित अधिकारियों को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
ये है मामला, जानिए...
राजस्थान हाईकोर्ट ने 10 अगस्त 2015 को जाट आरक्षण मामले में सरकार को स्थायी वैधानिक पिछड़ा वर्ग आयोग बनाने के आदेश दिए थे। ऐसे में यदि 10 अगस्त 2015 के बाद यदि सरकार किसी जाति विशेष को आरक्षण देती है, तो केवल स्थाई पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिश पर ही दे सकती है।
पुरानी रिपोर्ट के आधार पर 10 अगस्त 2015 के आदेश के बाद कोई नया कानून बनाना गलत है। कोर्ट ने आदेश में सरकारी आदेश से बने आयोग को गलत मानकर स्थाई वैधानिक आयोग बनाने के आदेश दिए थे।
पुरानी रिपोर्ट के आधार पर 10 अगस्त 2015 के आदेश के बाद कोई नया कानून बनाना गलत है। कोर्ट ने आदेश में सरकारी आदेश से बने आयोग को गलत मानकर स्थाई वैधानिक आयोग बनाने के आदेश दिए थे।