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रेगिस्तान में फलने लगी सेब की खेती
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Tue, 16 May 2017 07:29 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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राजस्थान में शेखावटी का मौसम सेब की खेती के अनुकूल नहीं है। यहां धूलभरी आंधियां, गर्मी में 45 डिग्री के पार पारा और सर्दियों में हाड़ कंपाकंपा देने वाली सर्दी। इन चुनौतियों के बाद भी यहां सेब उगाने का प्रयास किया जा रहा हैं। सब कुछ ठीक रहा तो इस बार सितम्बर में सीकर की सेब खाने को मिल सकती है।
हिमाचल और कश्मीर की मुख्य उपज सेब की राजस्थान के सीकर में खेती का नवाचार बेरी गांव के किसान हरमन सिंह कर रहे है। वे नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन से जुड़े हैं। सिंह बताते हैं कि राजस्थान की धरती पर सेब की खेती के प्रयास नए तो नहीं हैं, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई। अब तीन साल बाद यह सफलता मिलने की उम्मीद है। बेरी गांव से पहले सेब की खेती का प्रयास जयपुर के दुर्गापुरा में भी किया गया। वहां सौ पौधे लगाए गए थे, लेकिन वे नष्ट हो गए। इसी तरह सीकर के ही दो अन्य जगहों पर भी यह प्रयास किया गया, लेकिन उनमें अंकुर नहीं फूट पाया। फिर बेरी में यह प्रयास किया गया। बेरी में इसमें सफलता मिलती नजर आ रही है।
खेती फलने लगी है और सितंबर यहां सेब की फसल मिल जाएगी। इस सफलता को लेकर अधिकारी भी उत्साहित हैं। इस बारे में राज्य सरकार के उद्यानिकी मुख्यालय, जयपुर ने भी सीकर के अधिकारियों ने भी सूचना मांगी है।
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सेब की खेती करने के लिए सबसे जरूरी थी उसे गर्मी से बचान, इसके लिए पौधों की टहनियों की कटिंग खास तरह से की गई, बिल्कुल उसी तरह जिस तरह अनार की अंब्रेला कटिंग की जाती है। जैविक खाद का उपयोग किया गया। ड्रिप सिंचाई तकनीक को छह माह तक अपनाया गया। जिसका परिणाम है कि हिमाचल और कश्मीर में बहुतायत में उगने वाली सेब रेगिस्तान में भी मिल सकेगी।
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हिमाचल और कश्मीर की मुख्य उपज सेब की राजस्थान के सीकर में खेती का नवाचार बेरी गांव के किसान हरमन सिंह कर रहे है। वे नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन से जुड़े हैं। सिंह बताते हैं कि राजस्थान की धरती पर सेब की खेती के प्रयास नए तो नहीं हैं, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई। अब तीन साल बाद यह सफलता मिलने की उम्मीद है। बेरी गांव से पहले सेब की खेती का प्रयास जयपुर के दुर्गापुरा में भी किया गया। वहां सौ पौधे लगाए गए थे, लेकिन वे नष्ट हो गए। इसी तरह सीकर के ही दो अन्य जगहों पर भी यह प्रयास किया गया, लेकिन उनमें अंकुर नहीं फूट पाया। फिर बेरी में यह प्रयास किया गया। बेरी में इसमें सफलता मिलती नजर आ रही है।
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खेती फलने लगी है और सितंबर यहां सेब की फसल मिल जाएगी। इस सफलता को लेकर अधिकारी भी उत्साहित हैं। इस बारे में राज्य सरकार के उद्यानिकी मुख्यालय, जयपुर ने भी सीकर के अधिकारियों ने भी सूचना मांगी है।
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सेब की खेती करने के लिए सबसे जरूरी थी उसे गर्मी से बचान, इसके लिए पौधों की टहनियों की कटिंग खास तरह से की गई, बिल्कुल उसी तरह जिस तरह अनार की अंब्रेला कटिंग की जाती है। जैविक खाद का उपयोग किया गया। ड्रिप सिंचाई तकनीक को छह माह तक अपनाया गया। जिसका परिणाम है कि हिमाचल और कश्मीर में बहुतायत में उगने वाली सेब रेगिस्तान में भी मिल सकेगी।