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भागवत का मंत्र, सबके मित्र बने प्रचारक
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Fri, 15 Sep 2017 07:26 PM IST
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MOHAN BHAGWAT
- फोटो : GETTY IMAGES
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत जयपुर में छह दिन के प्रवास पर है। अपने प्रवास के दूसरे दिन आज उन्होंने राजस्थान क्षेत्र के प्रचारकों की बैठक ली।
इस अवसर पर डॉ. भागवत ने भेदभाव को हटाते हुए प्रचारकों को सब का मित्र बनने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि परिवारों की आपस में मित्रता होनी चाहिए और प्रचारक इस मित्रता निर्माण में जुड़े। उन्होंने कहा कि सहज दोस्ताना व्यवहार से समरसता बढ़ेगी और समाज तोड़ने वाले लोगों के प्रयास निष्फल होंगे। स्वस्थ समाज व सफल राष्ट्र के लिए सामाजिक समरसता पहली आवश्यकता है।
डॉ. भागवत ने कहा कि प्रचारक एक सामाजिक साधना का प्रकार है। प्रचारक को समाज में रहकर देश और समाज के हित के लिए कार्य करना होता है। उन्होंने अशोक सिंघल का उदाहरण देते हुए कहा कि मन में ईश्वर के प्रति श्रद्धा और विश्वास रखकर अपना कार्य करना चाहिए करना चाहिए। डॉ. मोहनराव भागवत ने कहा कि कार्य विस्तार के साथ कार्य का दृढ़ीकरण भी होना चाहिए।
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उन्होंने बताया कि अनौपचारिकता व सहजता संघ कार्य की विशेषता है। उन्होंने कहा कि नित्य व्यायाम और दीर्घश्वसन क्रिया से बेहरत स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।
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इस अवसर पर डॉ. भागवत ने भेदभाव को हटाते हुए प्रचारकों को सब का मित्र बनने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि परिवारों की आपस में मित्रता होनी चाहिए और प्रचारक इस मित्रता निर्माण में जुड़े। उन्होंने कहा कि सहज दोस्ताना व्यवहार से समरसता बढ़ेगी और समाज तोड़ने वाले लोगों के प्रयास निष्फल होंगे। स्वस्थ समाज व सफल राष्ट्र के लिए सामाजिक समरसता पहली आवश्यकता है।
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डॉ. भागवत ने कहा कि प्रचारक एक सामाजिक साधना का प्रकार है। प्रचारक को समाज में रहकर देश और समाज के हित के लिए कार्य करना होता है। उन्होंने अशोक सिंघल का उदाहरण देते हुए कहा कि मन में ईश्वर के प्रति श्रद्धा और विश्वास रखकर अपना कार्य करना चाहिए करना चाहिए। डॉ. मोहनराव भागवत ने कहा कि कार्य विस्तार के साथ कार्य का दृढ़ीकरण भी होना चाहिए।
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उन्होंने बताया कि अनौपचारिकता व सहजता संघ कार्य की विशेषता है। उन्होंने कहा कि नित्य व्यायाम और दीर्घश्वसन क्रिया से बेहरत स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।